0 संकुल स्तरीय बैठक में शिक्षकों की लगी क्लास
0 शिक्षा गुणवत्ता अभियान के दौरान वांछित परिणाम मिले
रायगढ़ । नईदुनिया न्यूज
शिक्षा गुणवत्ता अभियान को देखते हुए शहर के इंदिरा बालक शाला में संकुल स्तरीय शिक्षकों की बैठक आहूत की गई। जिसमें स्कूल में भयमुक्त व तनाव मुक्त वातावरण निर्मित करने की हिदायत दी गई। बैठक में बच्चों के कौशल दक्षता पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों में जिन दक्षताओं व कौशल विकास की अपेक्षा की जा रही है वह विकसित नहीं हो पा रहा है। इससे प्रतित होता है कि स्कूल में बच्चों के बीच भयमुक्त व तनावमुक्त वातावरण नहीं बन पा रहा है। इसे लेकर संकुल स्तरीय बैठक में शिक्षकों की जमकर खिंचाई की गई।
शिक्षा गुणवत्ता अभियान के मद्देनजर शहर के इंदिरा बालक में संकुल स्तरीय शिक्षकों की बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति रही। कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि कक्षा में बच्चों के बीच वातावरण उनके अनुकूल हो। स्कूल का वातावरण भयमुक्त तनाव रहित बनाने पर जोर दिया गया। शिक्षकों को अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन करने व एक आदर्श शिक्षक की भूमिका अदा करने कहा गया। स्कूली बच्चों के बीच भयमुक्त तनाव रहित वातावरण निर्मित होने से बच्चे अपनी बात को शिक्षकों के बीच रखने में सहज महसूस करेंगे और यहीं से बच्चों में आत्म विश्वास पैदा होगा और तभी बच्चों में शिक्षा का अपेक्षित सुधार संभव है। बैठक में शाला स्वच्छता के साथ छात्रों में स्वच्छता को लेकर विशेष कार्य करने की बात कही गई। शौचालय का उपयोग व खाने के पूर्व साबुन से हांथ धोने की परंपरा को विकसित करने की बात कही गई। कार्यशाला में 60 शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। कार्यशाला का आयोजन संकुल समन्वयक राजेन्द्र मेहर द्वाराा आयोजित की गई।
शिक्षकों में हो सकारात्मक सोच
बैठक में उपस्थित शिक्षकों से साकारात्मक सोच विकसित करने की बात कही गई। सकारात्मक सोच से नौकरी नहीं सेवा की भावना जागृत होती है। शिक्षक उसी सकारात्मक भावना से बच्चों के बीच जाए शिक्षकों से कहा गया कि वे स्कूली बच्चों में अपने बच्चों जैसा भाव उत्पन्न करें ताकि बच्चे बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकें। लेकिन इस दौरान शिक्षक अपनी गरिमा के अनुरुप रहे। वे स्कूल निर्धारित समय के पूर्व पहुंच जाएं इससे छात्रों में भी समय पर स्कूल पहुंचने की प्रेरणा मिलेगी।
बच्चों की छोटी-छोटी सफलता की करें तारीफ
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों की छोटी-छोटी उनकी सफलता पर तरीफ कर उनकी हौसला हफजाई करें। साथ ही प्रार्थना के समय सामने खड़े कर प्रार्थना कराने हर बच्चों को मौका दिया जाए। कमजोर बच्चों को होशियार बच्चों के साथ आगे बैठाया जाए। इसके अलावा हर दिन बच्चों की सिटिंग व्यवस्था में बदलाव किया जाए। ऐसा करने से बच्चों में एक अलग भावना विकसित होगी और कमजोर व होशियार बच्चों के बीच की खाई धीरे-धीरे कम होता जाएगा। हर बच्चों में कोर्स की पढ़ाई के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और पुस्तकालय में पढ़ने की आदत डलवाई जाए।