नईदुनिया प्रतिनिधि, रायगढ़: अदालत में मुकदमा लड़ने वाला पक्षकार हो या जमीन-राजस्व से जुड़ा दस्तावेज लेने पहुंचा व्यक्ति, कई जरूरी प्रक्रियाओं के बीच कुछ रुपये का टिकट ही ऐसा छोटा हिस्सा है, जिसके बिना फाइल आगे नहीं बढ़ती। अब यही छोटा टिकट रायगढ़ समेत प्रदेश के कोषालयों के लिए बड़ी परेशानी बनता दिख रहा है। कोर्ट फीस और कॉपिंग टिकटों की उपलब्धता प्रभावित होने से अधिवक्ताओं, पक्षकारों और दस्तावेजी काम से जुड़े लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इसका असर न्यायालयीन काम के साथ प्रतिलिपि, शपथपत्र और विभिन्न राजस्व दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रियाओं पर भी पड़ने लगा है। दरअसल न्यायालय से लेकर राजस्व अन्य कार्यों के लिए अधिक अधिवक्ताओं से लेकर पक्षकारो को को छोटी टिकट की दरकार पड़ती है। लेकिन बीते कुछ माह से नागपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस से इसकी आपूर्ति प्रभावित हो गई है। जिसके चलते प्रदेश में यह एक समस्याओं को लेकर उभर रहा है।
वहीं, यह टिकटों की कमी का दायरा केवल न्यायालय परिसर तक सीमित नहीं है। राजस्व न्यायालयों और तहसील स्तर पर बी-1, खसरा, पांचशाला, मिसल सहित विभिन्न दस्तावेजों की प्रतिलिपि लेने वाले लोगों के काम पर भी इसका असर पड़ सकता है। जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र से संबंधित शपथपत्र जैसी प्रक्रियाओं में भी टिकट की जरूरत पड़ने से आम लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।
दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से न्यायालय या राजस्व कार्यालय पहुंचने वाले लोगों के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है। यदि जरूरी टिकट उपलब्ध नहीं हुआ तो उन्हें एक छोटे से काम के लिए दोबारा कार्यालय या टिकट विक्रेता के पास जाना पड़ सकता है। इससे समय और अतिरिक्त खर्च दोनों बढ़ेंगे।देखा जाए तो भौतिक टिकटों की व्यवस्था के साथ छत्तीसगढ़ में ई-कोर्ट फीस का विकल्प भी उपलब्ध है। ऑनलाइन भुगतान के बाद ई-चालान तैयार किया जा सकता है।
हालांकि जिन प्रक्रियाओं में भौतिक कोर्ट फीस या कॉपिंग टिकट की आवश्यकता बनी हुई है, वहां इसकी नियमित आपूर्ति महत्वपूर्ण है। इधर कुछ स्तर पर यह भी शिकायत आ रही है की टिकट की ब्लैक मार्केटिंग भी आ रही है। बहरहाल में टिकटों की कमी से विभागीय कामकाज में काफी प्रभाव पड़ा है जिसका असर अधिवक्ताओं से लेकर पक्षकारों को परेशानी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
वकीलों के लिए छोटी कमी, लेकिन काम में बड़ी अड़चन
अधिवक्ताओं के लिए कोर्ट फीस टिकट महज एक कागज का टुकड़ा नहीं है। केस की फाइल तैयार करने से लेकर आवेदन लगाने और आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने तक इसकी जरूरत पड़ती है। टिकट नहीं मिलने पर अधिवक्ता को वैकल्पिक व्यवस्था तलाशनी पड़ती है, वहीं पक्षकार की प्रक्रिया भी आगे बढ़ने में अटक सकती है। खासकर न्यायालय में निर्धारित समय के भीतर आवेदन या दस्तावेज प्रस्तुत करना जरूरी होने की स्थिति में टिकट की अनुपलब्धता व्यावहारिक परेशानी पैदा कर सकती है। इसी तरह न्यायालयीन रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतिलिपि लेने की प्रक्रिया में कापिंग टिकट की आवश्यकता होने से इसकी कमी का सीधा असर प्रतिलिपि संबंधी काम पर पड़ सकता है।
इन कामकाज में पड़ता है असर
कोर्ट फीस और कॉपिंग टिकट की जरूरत न्यायालयीन प्रक्रिया के कई चरणों में पड़ती है। नए आवेदन, केस फाइल, अनुपस्थिति माफी आवेदन, वकालतनामा और न्यायालय से दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि लेने जैसे काम इससे जुड़े हैं। कॉपिंग टिकट न्यायालयीन रिकॉर्ड की प्रतिलिपि प्राप्त करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। टिकट उपलब्ध नहीं होने पर दस्तावेज तैयार होने के बावजूद संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने में अड़चन आ सकती है। इसका असर अधिवक्ताओं और पक्षकारों के साथ न्यायालय व राजस्व कार्यालयों में दस्तावेजी प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों के कामकाज पर भी पड़ सकता है।
समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने से लंबित कार्य का बोझ बढ़ने की आशंका रहती है टिकट यहां से होकर पहुंचते हैं जिलों तक प्रदेश में कोर्ट फीस और कॉपिंग टिकटों की आपूर्ति नासिक स्थित शासकीय प्रिंटिंग प्रेस से होती है। वहां से टिकट नोडल डिपो के माध्यम से जिलों तक पहुंचाए जाते हैं। रायगढ़ में जिला कोषालय के अलावा खरसिया, धरमजयगढ़ और घरघोड़ा में उपकोषालय हैं, जहां से संबंधित क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार वितरण व्यवस्था संचालित होती है।
बार काउंसिल ने शासन को लिखा पत्र, कोर्ट फीस टिकट की कमी पर तत्काल कदम उठाने की मांग
छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में 2, 5 और 10 रूपये मूल्यवर्ग के कोर्ट फीस टिकटों की कमी को लेकर शासन को पत्र भेजा है। परिषद के उपाध्यक्ष विराट वर्मा ने वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग तथा महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक से टिकटों की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ई-कोर्ट फीस की व्यवस्था लागू करने की मांग की है। पत्र में बताया गया है कि कम मूल्यवर्ग के टिकट दैनिक न्यायालयीन कार्य में आवेदन-पत्र, वकालतनामा और विविध आवेदनों में उपयोग होते हैं।
इनकी कमी से अधिवक्ताओं व पक्षकारों को परेशानी हो रही है और प्रकरणों की प्रस्तुति में अनावश्यक विलंब के साथ समय व धन का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्र के पक्षकार इससे अधिक प्रभावित हैं। परिषद ने सभी जिला कोषालयों एवं उपकोषालयों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने, अधिकृत कोर्ट फीस/स्टाम्प विक्रेताओं को जरूरत के अनुसार टिकट उपलब्ध कराने तथा स्टॉक, मांग और वितरण की नियमित निगरानी की व्यवस्था तथा ई कोर्ट फीस एवं अंतरिम व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है।
कोषालय की समुचित व्यवस्था पर बार काउंसिल का पत्र खोल रहा पोल 2, 5 और 10 रूपये मूल्यवर्ग के कोर्ट फीस टिकटों की कमी को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विधिज्ञ परिषद का शासन को भेजा गया पत्र कोषालय स्तर पर उपलब्धता और वितरण की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
परिषद ने सभी जिला कोषालयों एवं उपकोषालयों में इन टिकटों के स्टॉक की तत्काल समीक्षा कर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा अधिकृत कोर्ट फीस/स्टाम्प विक्रेताओं को जरूरत के अनुसार स्टॉक उपलब्ध कराने की मांग की है। इससे साफ है कि व्यवस्था केवल टिकट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं, बल्कि स्टॉक से लेकर वितरण तक नियमित निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।
वहीं परिषद ने व्यवस्था सामान्य होने तक कोषालय चालान जैसी वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग कर मौजूदा व्यवस्था की खामियों को भी उजागर किया है। वर्जन रायगढ़ जिले में सभी प्रकार की टिकटों की समस्या नही है। मौजूदा समय मे पर्याप्त स्टाक है। चेंबर आफ कॉमर्स से लेकर अधिवक्ता संघ को भी उपलब्ध कराया जाता है। चंद्रपाल सिंह ठाकुर, जिला कोषालय अधिकारी।