0 जिले के विभिन्न तहसील में 580 से ज्यादा प्रकरण है दर्ज

0 आयोग के सामने 170 ख का उठाया जाएगा मामला

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रायगढ़ । नईदुनिया प्रतिनिधि

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष उद्योगों द्वारा दबाए गए 170 ख का मामला उठाया जाएगा। जिले के विभिन्न उद्योगों व कोल ब्लॉक में 685 हेक्टेयर से ज्यादा आदिवासी जमीन दबा कर रखा गया है। दरअसल जिले में बीते कई वर्षों से आदिवासियों द्वारा अपनी जमीन की मांग कर रहे हैं जो जिले के विभिन्न उद्योगों द्वारा अपने कब्जे में रखा गया है। इस मामले में पूर्व में राजस्व मंडल द्वारा अपने एक आदेश में ऐसे मामलों पर त्वरित कार्रवाई का भी निर्देश दिया था। लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। जिसे देखते हुए अब ऐसे मामलों को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष उठाया जाएगा।

जिले में व्यापक पैमाने पर आदिवासी जमीन की अवैधानिक तरीके से खरीदी बिक्री की गई है इसके अलावा बड़ी संख्या में आदिवासी जमीनों का बेनामी अंतरण कराया गया है। आदिवासियों की जमीन मामले में पूर्व में सर्व आदिवासी संघ द्वारा मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए जमीन वापसी की मांग की गई थी। इसी मामले में राजस्व मण्डल द्वारा भी चिंता जाहिर करते हुए त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था। राजस्व मण्डल द्वारा आदिवासी जमीन मामले में एफआईआर तक कराने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अब तक आदिवासी जमीन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है जिससे अब मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष उठाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के उद्योगों व कोल ब्लॉक में करीब दो हजार एकड़ से अधिक आदिवासियों की जमीन को दबाकर रखा गया है। आदिवासी जमीन मामले में कार्रवाई न होने से अब इस मामले को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में रखकर न्याय की गुहार लगाई जाएगी।

बड़ी संख्या में बेनामी अंतरण का मामला

जिले के उद्योगों द्वारा आदिवासियों की जमीनों को अवैधानिक तरीके से खरीदी बिक्री तो किया ही है लेकिन सारे नियम कानुन को ताक पर रखकर बेनामी अंतरण तक कराया गया है। दरअसल आदिवासी जमीन को औद्योगिक घरानों द्वारा अवैधानिक तरीके से दुसरे प्रदेश के लोगों के नाम पर जमीन ली गई तो कुछ उद्योगों द्वारा बेनामी तरीके से अंतरण कराया गया है। जिसमें कोरबा वेस्ट में आदिवासी जमीन के सभी मामले बेनामी अंतरण के हैं। इसी तरह से खरसिया के मे. गोयल व राजन कोल वाशरी द्वारा आदिवासियों की जमीन को बेनामी तरीके से अंतरण कराकर अपने कब्जे में लिया गया है। इसी तरह से घरघोड़ा में शारडा एनर्जी, दुर्गा फ्यूल, जिंदल व जेपीएल का कब्जा है।

दिगर प्रदेश के आदिवासियों के नाम पर हुई खरीदी

औद्योगिक घरानों द्वारा अपने फैक्ट्रियों के आसपास की जमीन को दूसरे प्रदेश के आदिवासियों के नाम पर खरीदी गई है। जबकि जमीन खरीदी बिक्री के मामले में दूसरे प्रदेश का आदिवासी किसी दूसरे जिले में आदिवासी के तौर पर मान्य नहीं होता है लेकिन जिले में इस तरह से लगभग अधिकांश मामले इसी तरह के हैं और शेष बेनामी अंतरण के हैं। अब मामले को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में रखा जाएगा।

2 हजार एकड़ से अधिक का है घोटाला

जिले में आदिवासी जमीन का घोटाले की फेहरिस्त बहुत लंबी है अधिकृत दस्तावेजों की मानें तो 2 हजार एकड़ से अधिक के आदिवासी जमीन का घोटाला हुआ है। दस्तावेजों की मानें तो सर्वाधिक आदिवासी जमीन घोटाला खरसिया ब्लॉक में हुआ है इसके बाद घरघोड़ा ब्लॉक में सर्वाधिक आदिवासी जमीन घोटाले को अंजाम दिया गया है। इसके अलावा रायगढ़ व घरघोड़ा ब्लॉक में भी बड़े पैमाने पर आदिवासी जमीन घोटाले को अंजाम दिया गया है।

फैक्ट फाइल

कहां कितने आदिवासी प्रकरण

रायगढ़- 63 प्रकरण

खरसिया-276 प्रकरण

घरघोड़ा - 211

धरमजयगढ़-30 प्रकरण

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