रायगढ़( नईदुनिया प्रतिनिधि)। धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथी मानव द्वंद की घटनाएं आम हो चुकी है। बेजुबान आए दिन बिजली करेंट से असमय जान गवा रहे है। विडंबना यह है कि इसकी भनक तब विभाग को लगती है जब शव की सड़ांध गंध उन तक पहुंचती है। ऐसे में करेंट और हाईटेंशन तार के लूज पाइंट को चिन्हित कर हाथियों को बचाने का प्रयास में अमला जिला कलेक्टर के निर्देश पर जुट चुका है। जिसमे वन व बिजली विभाग संयुक्त रूप से सामंजस्य बनाकर चिन्हित 296 पाइंट को दुरुस्त करने का बेड़ा उठाया हैं।
कलेक्टर कार्तिकेया गोयल की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला स्तरीय हाथी सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित हुई। जिसमें जिले में विद्युत करंट से हुई हाथियों की मृत्यु के संबंध में समीक्षा की गई। जिसमे यह जानकारी सामने आई कि बीते वर्ष 2023 में 8 हाथी की मृत्यु हुई हैं जिसके पीछे की वजह मानव द्वंद है।
रिकार्ड के मुताबिक वन मंडल धरमजयगढ़ में वर्ष 2023 में हुई आठ हाथी मृत्यु में से छह हाथी मृत्यु विद्युत करंट से हुई है। 6 हाथियों में से एक हाथी की मृत्यु विद्युत तार की मानक ऊंचाई से कम होने पर उसकी चपेट में आने से हुई। इसी प्रकार एक हाथी की शिकार हेतु बिछाए गए तार की चपेट में आने तथा चार हाथी की मृत्यु फसल सुरक्षा हेतु बिछाए करंट तार के कारण हुई है। इस समीक्षा में तार की मानक ऊंचाई अगर होती तो एक हाथी की जान बच सकती थी। वही वन अमला धरमजयगढ़ ने ततपरता दिखाते हुए नवंबर माह में 296 प्वाइंट का सूची मुख्यालय भेजा गया है।
जबकि अब तक 821 लूज पाइंट को सुधार कराया गया है। जिस पर कलेक्टर ने ऐसे सभी लूज प्वाइंट को सुधार करने और एक माह के भीतर सभी विद्युत लाइन का मानक ऊंचाई अनुसार सुधार करने हेतु निर्देशित किया। साथ ही गांव में वन्य प्राणियों के शिकार करने वाले तथा हाथियों को नुकसान पहुंचाने के लिए करंट प्रवाह करने वालों पर भी सूचना रखने और विजिलेंस टीम द्वारा आवश्यक कार्यवाही करने हेतु भी निर्देशित किया। इसके अलावा वन विभाग को मानव हाथी द्वंद्व की रोकथाम हेतु पुलिस विभाग द्वारा आवश्यक सुरक्षा बल उपलब्ध कराने हेतु कलेक्टर गोयल ने सभी एसडीएम को भी निर्देशित किया।
सुरक्षित रहवास सुगम आवागमन, द्वंद रोकना सबकी जिम्मेदारी
जिला कलेक्टर ने बैठक में कहां कि जिले में विद्युत करंट से हो रही हाथियों की मृत्यु अत्यंत चिंताजनक है जिसे रोकथाम करना नितांत आवश्यक है। वन्य हाथियों हेतु सुरक्षित रहवास, सुगम आवागमन, सुरक्षा और मानव हाथी द्वंद्व प्रबंधन हमारी साझा जिम्मेदारी है। वही इसके लिए हर स्तर में प्रयास किए जाने पर जोर दिया है।ताकि वन्य जीव जंगलो में सुरक्षित तरीके से रह सके। यहां यह बताया जाना लाजमी होगा कि जिले में 2 वन मंडल है जिसमें सबसे अधिक वन्य जीव धरमजयगढ़ वन मंडल में पाए जाते है। हाथी भालू, हिरन, चौसिंघा, कोटरी सियार व अन्य जीव शामिल है जो गाहे बगाहे मानव द्वंद के चलते जान गवाते हैं।
हाथियों की सबसे ज्यादा तादात और पड़ोसी जिले से आवजाही
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में तीन जिले से हाथियों का आना जाना बना रहता है। हर मौसम में ये हाथी धरमजयगढ़ से निकलकर या दूसरे जिले से यहां खव जंगल आते है। जिसमें कोरबा जशपुर सरगुजा का अम्बिकापुर शामिल है। वहीं धरमजयगढ़ में वर्तमान में करीब 125 से अधिक हाथी विभिन्न वन परिक्षेत्र के जंगल में है इसके साथ ही उनके बच्चे भी बड़ी संख्या में है। इसके चलते वे आक्रमकता का रूख ज्यादा अख्तियार कर विचरण कर रहे है।