इंदिरा विहार में बना बंदर नसबंदी केंद्र का मुख्यमंत्री ने किया था लोकापर्ण
बंदरो की बढ़ती आबादी और आतंक कम करने ढाई साल पूर्व आई थी प्रोजेक्ट
पᆬोटो क्रमांक 28 आरजीएचपी 08,09 (इंदिरा विहार में बना बंदर नसबंदी केंद्र )
रायगढ़। नईदुनिया प्रतिनिधि
जिले में सभी पिकनिक स्पाट में बंदरों का आतंक देखने को मिलता है। जिससे लोग डरे सहमे रहते है। इसे देखते हुए प्रदेश का पहला मंकी इस्टरलाइजेशन प्रोजेक्ट लाया गया। इसके तहत बंदरो को पकड़ कर उनकी आबादी कम करने के लिए नसबंदी करना था। इस प्रोजेक्ट में 59 लाख की लागत से इंदिरा विहार में बंदर इस्टरलाइजेशन गृह ढाई साल पूर्व बनाया गया था। जिसका लोकापर्ण तत्कालीन मुख्यमंत्री डा रमन सिंह किये थे।
परंतु उद्घाटन के बाद ढाई साल का समय बीत जाने के बावजूद इस प्रोजेक्ट के तहत एक भी बंदरो का नसबंदी नही हो पाया।
विदित है कि लंबे समय से रायगढ़ वन मंडल में रेस्क्यू सेंटर की मांग की जा रही थी। यहां हर साल कई वन्यप्राणी घायल या पानी की तालाश में भटकते हुए मर जाते हैं। रेस्क्यू सेंटर की तर्ज पर ही यहां मंकी इस्टरलाईजेशन (बधियाकरण केन्द्र) सेंटर तैयार किया गया है। जहां बंदरो की नसबंदी की जानी थी और जरूरत पड़ने पर अगर कोई बीमार या घायल वन्यप्राणी जंगल या आबादी वाले क्षेत्र में मिल जाता है, तो उसका भी इलाज कर उसे जंगल में छोड़े जाने की मंशा रखी गई थी। इसका सीधा लाभ घायल वन्य जीवों से लेकर पिकनिक स्पट में लोगो को भय मुक्त वातावरण में प्रकृति का आनंद ले सकते। परंतु वन विभाग की उदासीनता से यह प्रोजेक्ट आने के बाद भी धरातल में नही आ पाई आलम यह है कि इसके पीछे शासन की लाखों रुपये बर्बाद हो गए। इसका खामियाजा पिकनिक स्पट में बंदरों का आतंक व घायल जानवर इलाज के आभाव में दम तोड़ रहे है।
लाखों रुपये की दवाएं पड़ा फेंकना
इंदिरा विहार नसबंदी केंद्र में बंदरों की नसबंदी के पश्चात उपचार के लिए लाखों रुपए की दवा वन विभाग द्वारा खरीदी गई थी । वहीं नसबंदी केंद्र का इस्तेमाल नहीं किए जाने से यहां रखी गई दवाएं खराब हो गई । जिन्हें वन विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से अस्पताल से निकाल कर में फेंक दिया गया । इसको लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर चर्चा का माहौल बना हुआ था।
तीन कर्मचारियों को शासन ने भेजा था ट्रेनिंग पर
बंदर नसबंदी केंद्र आस्तित्व में आने के बाद वन्य कर्मियों को बंदरों व अन्य घायल वन्य जीव को पकड़ने के बाद उसका इलाज, देखभाल, नसबंदी करने के तौर-तरीकों को सीखने के लिए हैदराबाद प्रशिक्षण पर भेजा गया था। प्रतीक्षा में 3 साल पूर्व वन विभाग द्वारा 2 कर्मचारी एक अधिकारी को हैदराबाद भेजा था। इसके बावजूद अब तक वन विभाग कर्मचारियों ने पिकनिक स्पाट में बंदर को पकड़ने और इनका आतंक कम करने में कुछ पहल कर पाये है।
वर्सन
इंदिरा विहार में मंकी इस्टरलाईजेशन सेटंर बनाया गया है। जिसमें बंदरो की नसबंदी की जानी है। नर बंदरो के लिए मशीन है पर मादा बन्दरो के लिए नही है। इसे मंगवाने शासन को बजट के लिए पत्र भेजा गया है । मुझे आये हुए ज्यादा समय नही है परंतु इसे आंरभ करने के लिए प्रयासरत हूं।
मनोज पांडेय, वन विभाग