
खरसिया (नईदुनिया न्यूज)। कथा वाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भागवत कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालुआंें से कहा कि पूतना रूपी वृत्ति से सावधान रहना चाहिए। हर व्यक्ति को यह ध्यान रखना है कि क्या देखना, सुनना और क्या पढ़ना चाहिए । किस तरीके का भोजन करना चाहिए । उन्होंने कहा कि भोजन को छोड़ा जा सकता है क्योंकि यह शरीर के काम आता है परंतु दृष्टि से देखा गया, कान से सुना गया और स्वयं का पढ़ा हुआ व्यक्ति के आचरण में आकर समाज को सत्य और असत्य की दिशा का मार्गदर्शन करता है ।
कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने ज्ञान यज्ञ कथा के पंचम दिन वेदों की प्रेरणा एवं ऐतिहासिक प्रश्नों पर प्रकाश डाला। उन्होंने राक्षसी पुतना पर कहा कि आज भी समाज में हजारों पूतना जीवित हैं। कथा व्यास ने कहा कि भगवान किसी को मारते नहीं बल्कि उतारते हैं । अपने तीन अवतारों में महिला रूपी राक्षसों को विनाश किया, इसका अर्थ यह है नहीं है कि भगवान किसी को मारते हैं बल्कि अ विद्या रूपी राक्षस का नाश अपने भक्तों की रक्षा के लिए करते हैं । यदि अ विद्या घर परिवार में आ जाए तो घर में कलह एवं अशांति रहती है। मोबाइल-टीवी रुपी पूतना राक्षसी प्रत्येक घर व परिवार में पहुंच चुकी है । परिवार को तोड़ने का कार्य कर रही है। इसका प्रभाव पूरे जीवन और समाज में पड़ रहा है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि क्या देखना, क्या पढना और क्या सुनना चाहिए । कथा व्यास ने वासुदेव और नंदलाला के मिलन के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता वही है जो मित्र के कष्ट को सुनकर उसे अपना कष्ट मानकर दूर करने का प्रयत्न करते हैं। व्यक्तिगत कष्टों को सबके सामने कभी चर्चा नहीं करनी चाहिए । मनुष्य जिस भाव से भगवान का स्मरण करता है भगवान उसी भाव से उसे अपने हृदय से बसा लेते हैं। भगवान केवल भाव देखते हैं। उन्होंने भगवान के बाल स्वरूप की पूजा पर बल दिया। श्री कृष्ण की बाल लीला, माखन चोरी के प्रसंगों को प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गायों में भगवान स्वयं विराजमान है। आज गायों की सेवा ही सर्वमान्य है। पार्टी के रूप में या किसी भी रूप में गौशाला जाकर गांव की गायों की सेवा करना चाहिए। उन्होंने लोगों से कहा कि प्रतिदिन गऊग्रास निकाल कर अपने बच्चों को दें जिसे वह अपने स्कूल में शिक्षकों को दें और कहे कि यह ग्रास गौशाला में भेजे जिससे गायों को भोजन मिले। गायों को भोजन मिलने से भगवान खुश होते हैं।