रायगढ़( नईदुनिया प्रतिनिधि)। कला एवं सांस्कृतिक नगरी में अविभाजित मध्यप्रदेश से ऐतिहासिक तौर पर चक्रधर समारोह व गणेश आयोजन होता रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद इसके आयोजन में भव्यता भी आने लगी लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण पिछले 2 सालों से इसका आयोजन नहीं हो सका। इसके बाद बाढ़ और अब राजनीति के चलते यह आयोजन ठंडे बस्ते में चला गया है। आलम यह है कि इससे हर वर्ग जहां इंटरनेट मिडीया में सवाल पूछते हुए तंज कस रहा है जबकि भाजपा व अन्य राजनीतिक दल भी इसे कांग्रेस सरकार की विफलता बता रहे है। इस तरह इस महोत्सव के आयोजन पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है।
सुर-ताल, छंद और घुंघरू की सुरीली परंपरा को अपने में समेटे चक्रधर समारोह का मंच किसी पहचान की मोहताज नहीं है। ऐतिहासिक चक्रधर समारोह की ख्याति पूरे देश में फैली हुई है लेकिन पिछले दो सालों से कोरोना व बाढ़ की वजह से इसका आयोजन खुले मंच की बजाय वर्चुअल तौर पर हो रहा था। शहरवासियों को उम्मीद है कि इस बार पूरी भव्यता के साथ चक्रधर समारोह का आयोजन होगा लेकिन इसकी आयोजन से जुड़ी पूर्व तैयारियों में काफी देरी हो चुकी है। ऐसे में इसकी प्रक्रियाओं पूरा करने में समस्याएं आ सकती हैं। 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी के साथ ही समारोह का आगाज होना है।
मगर अब तक जिला प्रशासन की ओर से इसके आयोजन के लिए कोई भी तैयारी की शुरुआत नहीं की गई है। यही वजह है कि कला नगरी की परंपरा से जुड़े इस आयोजन को लेकर इस बार भी संशय के बादल छाने लगे हैं। लोगों को लगने लगा है कि क्या इस साल भी चक्रधर समारोह के आयोजन पर राजनीति खतरा बताया जा रहा है। यही वजह है कि जुलाई माह समाप्त हो गया लेकिन आयोजन को लेकर किसी भी तरह की सुगबुगाहट नजर नहीं आ रहा है। जिसकी वजह से जिले की जनता कलाकार राजनीति से जुड़े दुखद प्रसंग बता रहे हैं।
ढाई माह पहले से होने वाली तैयारी एक माह पीछे
कार्यक्रम की भव्यता इतनी है कि देश विदेश के नामचीन ख्यातिप्राप्त कलाकार कला संस्कृति नगरी में आकर इस कार्यक्रम तारीफ हर स्तर में कर चुके है। फिलहाल कलाकार चयन समिति व उक्त समिति की बैठक तक नही हो सकी हैं। ऐसे में किस स्तर में कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा, आयोजन होगा या नही इसे लेकर हर वर्ग विभिन्न माध्यम से चर्चाएं कर रहे है। जबकि सूत्रों के मुताबिक एक बैठक में इसे स्थगित करने की बात सामने आई है वही राजघराने का पत्र भी सामने आया है। जिसमें स्व राजा भानुप्रताप के निधन का हवाला देकर स्थगित करना उल्लेख है। इन सभी के बीच कार्यक्रम की तैयारी जो ढाई माह पहले से हो जाती है वह एक माह विलंब चल रहा है। जिसको लेकर राजधानी स्तर में भी चर्चा होने लगीं है।
राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय कलाकार ने श्रोताओं को किए है मंत्रमुग्ध
कला संस्कृति नगरी ख्याति संगीत सम्राट राजा चक्रधर सिंह से जुड़ी हैं। राजा चक्रधर सिंह की याद में हर साल मनाये जाने वाले इस दस दिवसीय संगीत महोत्सव की ख्याति पूरे देश में फैली हुई है। यही वजह है कि देश विदेश के भी ख्यातिलब्ध कलाकार शिरकत कर चुके हैं। वे अपने कला से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते आए है। जिसमे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय एवं कला के क्षेत्र में मिलने वाले पुरुस्कार से सम्मानित कालाकार शामिल है। यही वजह है कि हर वर्ष इस आयोजन का लोगो को बेसब्री से रहता है।
राजपरिवार से एक पत्र ना में तो दूसरा कराने के पक्षधर फिर एक और पत्र प्रसारित
इन दिनों राजपरिवार दो धड़ों में बंट गया है। दरअसल इसी साल 14 जून को महाराज कुमार भानु प्रताप का स्वर्गवास हो गया। ऐसे में भानूप्रताप की तीन बेटियों राजमाता रूकमणि देवी, राजकुमारी राजश्री देवी सिंह व राजकुमारी विजयश्री देवी सिंह ने 20 जुलाई को सीएम को एक पत्र लिख कर आग्रह किया है कि उनके पिता के निधन के बाद राज परिवार गमगीन है। अतः इस शोक की घड़ी को देखते हुए इस वर्ष आयोजित होने वाले चक्रधर समारोह को स्थगित किया जाए। जबकि राजाचक्रधर सिंह की पुत्रवधु राजमाता स्नेहलता देवी सिंह ने भी सीएम भूपेश बघेल को पोस्ट कार्ड के माध्यम से पत्राचार करते हुए कहा है कि चक्रधर समारोह रायगढ़ का गौरव, धरोहर है। जिससे पूरे देश की नजरें टिकी होती है। इसे धीरे-धीरे अनदेखा करना और विलुप्ति की ओर ले जाना दुखद है। चक्रधर समारोह महाराजा चक्रधर सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि है इसे पूरी भव्यता देना चाहिए। समस्त राजपरिवार की ओर से आग्रह है कि यह कार्यक्रम कराया जाए।
राज्यनिर्माण के बाद और भी भव्यता आई
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद आयोजन में और भी भव्यता आने लगी। लोक संगीत व लोक कलाकारों को भी अब अवसर प्रदान किया जाने लगा है। साल दर साल मंच और आयोजन के लिए प्रशासन स्तर सेफंड भी बढ़ता गया। इससे कार्यक्रम को देश विदेश तक ख्याति मिलने लगी। और यह अत्यधिक लोकप्रिय हो गया। इसकी वजह केवल रायगढ़ की संगीत परंपरा को प्रोत्साहित किया जा सके वर्तमान में 2020 व 2021 संक्रमण काल में था। फिर बाढ़ का मंजर आ गया। हालांकि बाढ़ और कोरोना दोनो का कहर वर्तमान में नदारद है। इधर समारोह आयोजित नही किये जाने की चर्चाएं का बाजार गर्म है। ऐसे में हर वर्ग इसे लेकर तंज कस रहा है। जिसमे कला प्रेमियों से लेकर अन्य वर्ग भी शामिल है।
गौरवशाली आयोजन का नही यह नाकामी है
महाराजा चक्रधर सिंह ऐसे ही विशिष्ट सांगीतिक व्यक्तित्व के धनी और कलापारखी नरेश थे। रायगढ़ से लेकर छत्तीसगढ़ का गौरवशाली कार्यक्रम चक्रधर समारोह है। यह वर्षो से परंपरागत तरीके से गणेश चतुर्थी के दिन से शुरुआत होती है। इसका न होना कहीं न कही कांग्रेस सरकार और प्रशासनिक विफलता है। इसे जिले वासी गौरवशाली पर्व की तरह मानते है। इसका विधिवत पूरे भव्यता के साथ आरंभ होना चाहिए।
- गोपाल बापोडिया,आम आदमी पार्टी नेता।
सरकार और प्रशासन की नाकामी का स्मारक
कला संस्कार धानी नगरी में चक्रधर समारोह ऐतिहासिक समारोह है। इस आयोजन में देश विदेश तक रायगढ़ का डंका बजता हैं। रायगढ़ के सांस्कृतिक गौरव के रूप में पूरे देश मे प्रसिद्ध हुआ जिसमे देश के शीर्षर्थ प्रतिष्ठित कला , संगीत एवं साहित्य साधको और क्रीड़ा जगत की प्रख्यात प्रतिभाओं को आमंत्रित कर सम्मानित किया जाता था। हर कार्यक्रम को राजनीति से दूर रखना चाहिए। चक्रधर समारोह रायगढ़ अपितु पूरे देश के लिए गौरवान्वित करने वाला समारोह है। कांग्रेस नेताओं को राजनीति से उठकर इसे आयोजित पुर्व की भांति नही बल्कि और अच्छे स्तर में किया जाना चाहिए। इस आयोजन का न होना यह आगे चलकर सरकार और प्रशासन की नाकामी का स्मारक बनेगा।
- राजेश जैन, शिव सेना प्रदेश उपाध्यक्ष
आयोजन को लेकर आवाज करना होगा बुलंद
राजपरिवार के तरफ से पत्र जारी करते हुए स्व कुंवर भानुप्रताप जी के निधन व इसके चलते परिवार में शोक के कारण इसे स्थगित किये जाने की मांग की जा रही है। जबकि भानुप्रताप जी इस आयोजन को निरन्तर कराये जाने के पक्षधर रहे हैं। ऐसे में इस वर्ष भले ही आयोजन 10 दिन के बजाए तीन दिवसीय हो पर ऐतिहासिक चक्रधर समारोह जरूर आयोजित किये जायें। स्व भानुप्रताप जी को सच्ची श्रद्धांजलि होंगी । हमारी अस्मिता,संस्कृति और परंपरा को अक्षुण्ण रखने कला संस्कारधानी नगरी के जनमानस से आगे बढ़ कर आयोजन कराये जाने आवाज बुलन्द किये जाने की अपेक्षा है , क्योंकि शहर सत्ता या सिस्टम का नही हमारा है और इसका निर्णय भी हम करेंगे ,सिस्टम नही।
-तरुण बघेल, कलाकर
राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान को मिटाने कांग्रेस कर रही है षडयंत्र
कला संस्कृति के पुजारी महाराज चक्रधर सिंह के राजघराने की पीढ़ी में राजा भूपदेव सिंह के द्वितीय पुत्र गोंड़वंश के आदिवसी राजा चक्रधर सिंह का जन्म भाद्र पद संवत 1862 को हुआ। उनके जन्मदिवस को राजकीय समारोह के रूप में मनाने के लिए ऐतिहासिक गणेश मेला का आयोजन किया जाता है । चक्रधर समारोह के जरिए रायगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान को मिटाने का षडयंत्र कांग्रेस कर रही हैं। भाजपा नेता विजय अग्रवाल ने कहा रायगढ़ की जनता इस गुनाह के लिए विधायक प्रकाश नायक को माफ नही करेगी। कला संस्कृति की विरासत वाली नगरी रायगढ़ के कलाकारों की आत्मा चक्रधर समारोह में बसती है।
विरोध करने वाले लोगों को भगवान सद्बुद्धि दे
चक्रधर समारोह का अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों का इस कार्यक्रम का इंतजार रहता है। हमें भी मौका मिले तो हम अपनी कला को निखार कर अपने प्रदर्शन को चक्रधर समारोह में बेहतर कर सके।लेकिन कुछ वर्षों से इस कार्यक्रम को कराने के लिए कुछ लोग जी जान से भिड़े है तो कुछ लोगों ने जमींदोज करने को ही अपनी शान समझ रहें हैं यह सरासर गलत और रायगढ़ की जनता के साथ अन्याय है। रायगढ़ जिले के कई ऐसे छोटे बड़े कलाकार हैं जिन्होंने अपने कला का प्रदर्शन कर चक्रधर समारोह को इस मुकाम तक पहुंचने में अपना योगदान दिया। भगवान विरोध करने वालो को सद्बुद्धि दे और सुचारू रूप से चक्रधर समारोह हमेशा सफल और निरन्तर चलता रहे।
-लालचंद यादव , कलाकार
समारोह में कलाकारों को प्रतिभा दिखाने का मिलता है अवसर
जिस तरह लोग मीना बाजार लगवाने के लिए सहमति दे रहे है ठीक उसी तरह पार्षद नेता और जनप्रतिनिधि को भी रायगढ़ व देश के लिए होने वाला चक्रधर समारोह का कार्यक्रम आयोजन करवाने के लिए आगे आना चाहिए चक्रधर समारोह जिसमे पूरे देश के कलाकार शिरकत करते है। और उनकी कला को इस स्टेज पर सम्मान मिलता है ऐसे समारोह अगर आने वाले समय मे ना हो तो बहुत से कलाकारो को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिलेगा ऐसे समारोह को होने के लिए हमारे रायगढ़ वासियो को एक होने की जरूरत हैं। अगर वह मेरी मांग यही है कि इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए।
-शुभम सिंह, कांग्रेस नेता
भाजपा शासन में निरंतर चलता रहा
भाजपा कार्यकाल में कभी भी चक्रधर समरोह को स्थगित नहीं किया गया। समारोह की निरंतरता बनी रहनी चाहिए नही तो रायगढ़ शहर की जनता जिला प्रशासन एवं छत्तीसगढ़ शासन को कभी माफ नहीं करेगी। पूरे देश भर में चक्रधर समारोह रायगढ़ शहर की पहचान है यहां आयोजन को विलुप्त की ओर ले जाना दुःखत है क्या शहर की जनता आयोजन के लिए हड़ताल बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं इसका ना होना एक दुखद पहलू है कांग्रेस सरकार और प्रशासन की नाकामी भी है।
शशिभूषण चौहान, उपाध्यक्ष अनुसूचित जाति मोर्चा भाजपा