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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 09, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के 142 केस दर्ज, इन 6 अफसरों के खिलाफ नहीं मिल रही कार्रवाई की अनुमति

छत्तीसगढ़ में EOW ने पिछले 2.5 सालों में भ्रष्टाचार और घोटालों के मामलों में 142 केस दर्ज किए हैं, लेकिन इन घोटालों में शामिल 6 बड़े अधिकारियों के खिल...और पढ़ें

By Satish PandeyEdited By: Roman Tiwari
Publish Date: Sat, 09 Aug 2025 08:41:56 AM (IST)Updated Date: Sat, 09 Aug 2025 09:42:39 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के 142 केस दर्ज, इन 6 अफसरों के खिलाफ नहीं मिल रही कार्रवाई की अनुमति
भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं

HighLights

  1. कस्टम मिलिंग घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई नहीं
  2. भारतमाला परियोजना में घोटाले में 3 का अधिकारियों के खिलाफ केस
  3. तेंदूपत्ता घोटाला मामले में आरसी दुग्गा के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति नहीं

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया,रायपुर: राज्य आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो-एंटी करप्शन ब्यूरो(ईओडब्ल्यू-एसीबी) ने पिछले ढाई साल में 142 प्रकरण दर्ज किए हैं,इनमें आईएएस अफसरों के साथ ही छह लोकसेवक ऐसे भी हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई की अनुमति जांच एजेंसी को नहीं मिल पाई है,जिससे जांच की रफ्तार पर असर पड़ा है।

लोक सेवकों में नागरिक आपूर्ति निगम के तत्कालीन चेयरमैन व कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का नाम भी शामिल हैं। भारतमाला परियोजना में घोटाले में संलिप्त एनएचएआई के चेयरमैन सव्यसाची चौधरी, रीजनल आफिसर पंकज ओझा और एके मिश्रा के खिलाफ प्रकरण तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन इनके खिलाफ भी कार्रवाई करने अब तक हरी झंडी नहीं मिल पाई है। शराब घोटाले में फंसे झारखंड के संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए झारखंड सरकार को दो बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन वहां से भी अनुमति नहीं मिलने के कारण उनपर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।


कस्टम मिलिंग घोटाले में रामगोपाल फरार घोषित

कस्टम मिलिंग घोटाले में नागरिक आपूर्ति निगम के तत्कालीन चेयरमैन रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ प्रकरण दर्ज है। उन पर नान चेयरमैन रहते राइस मिलरों से सांठ-गांठ कर अवैध राशि की वसूली कर शासन को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। रामगोपाल के खिलाफ राइस मिलरों ने बयान भी दिया है।

ईओडब्ल्यू-एसीबी ने रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई के लिए 13 फरवरी को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन अब तक शासन से विधिवत अनुमति नहीं मिल पाई है। हालांकि रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कोल लेवी घोटाले में भी प्रकरण दर्ज हैं, और वो फरार घोषित हैं। रामगोपाल से परे आबकारी घोटाले में संलिप्त झारखंड के संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज है।

तेंदूपत्ता बोनस घोटाले के आरोपी वन अफसर दुग्गा

सीसीएफ आरसी दुग्गा के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति के लिए वन विभाग को पत्र लिखा गया है। यह पत्र दो जून को भेजा गया है। दुग्गा पर तेंदूपत्ता पारिश्रमिक के लिए संग्राहकों को प्रदान की जाने वाले करोड़ों की राशि में भ्रष्टाचार का आरोप है। इस पूरे मामले पर ईओडब्ल्यू ने डीएफओ समेत आधा दर्जन से अधिक अफसरों-कर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। किंतु दुग्गा के मामले में अनुमति नहीं मिल पाई है।

यह भी पढ़ें:CG News: बालोद जिले में बिना हेलमेट के नहीं मिलेगी शराब और पेट्रोल, प्रशासन ने लिया सख्त फैसला

भारत माला घोटाले में एनएचएआइ के तीन अफसर भी शामिल

रायपुर-विशाखापटनम भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाला मामले में एनएचएआइ के चेयरमैन सव्यसाची चौधरी, रीजनल आफिसर पंकज ओझा और एके मिश्रा के खिलाफ धोखाधड़ी और गलत ढंग से मुआवजा देते हुए 48 करोड़ का आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। ईओडब्ल्यू-एसीबी ने एनएचएआइ को चिट्ठी लिखी है, लेकिन अब तक जांच की अनुमति नहीं मिल पाई है।

40 से अधिक प्रकरणों का कोर्ट में चालान पेश

ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 142 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। इनमें 40 से अधिक प्रकरणों पर चालान कोर्ट में पेश किया जा चुका है। भ्रष्टाचार के अलग-अलग प्रकरणों में आधा दर्जन आइएएस अफसर निरंजन दास, अनिल टूटेजा, विवेक ढांड और अतंरिम जमानत पर छूटे समीर विश्नोई और रानू साहू के खिलाफ जांच चल रही है।

यह है नियम

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए में प्राविधान है कि किसी भी लोकसेवक के भ्रष्टाचार की जांच के लिए सरकार से अनुमति लेना जरूरी है। संबंधित विभाग या फिर सरकार को पत्र लिखने के तीन महीने बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है, तो जांच एजेंसी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है। मगर बाद में अदालती कार्रवाई में दिक्कत आती है, इसलिए समय-सीमा के भीतर कोई जवाब नहीं मिलने पर स्मरण पत्र लिखा जाता है। अभी तक अनुमति मिलने के बाद ही लोक सेवकों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की जाती रही है।