
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। राज्य की सड़कों पर करीब 42 लाख पुराने वाहन अब भी बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) के दौड़ रहे हैं। वाहन चोरी और फर्जी नंबर प्लेट के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए शुरू किया गया अभियान डेढ़ साल बाद भी लक्ष्य से काफी पीछे है।
प्रदेश में एक अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत 52.48 लाख वाहनों में अब तक केवल 10.72 लाख पर ही सुरक्षा प्लेट लग पाई है। यानी पांच में से करीब एक वाहन पर ही एचएसआरपी लग सकी है, जबकि 79.56 प्रतिशत वाहन अब भी इस सुरक्षा कवच से बाहर हैं।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले में 13.34 लाख पुराने वाहनों में से केवल 3.06 लाख पर एचएसआरपी लगाई गई है। जिले के 10.28 लाख वाहन अभी भी प्लेट लगने का इंतजार कर रहे हैं। रायपुर में अभियान की कवरेज 23.53 प्रतिशत है, जो प्रदेश के औसत 20.44 प्रतिशत से थोड़ी बेहतर है।
एचएसआरपी लगाने की जिम्मेदारी दो अधिकृत कंपनियों को सौंपी गई है। इनमें रियल मेजान इंडिया लिमिटेड ने 23.53 प्रतिशत और रोसमर्टा सेफ्टी सिस्टम लिमिटेड ने 17.35 प्रतिशत वाहनों पर प्लेट लगाई है। दिसंबर 2024 में व्यवस्था लागू होने के बाद एक साल में अभियान पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद लाखों वाहन बिना सुरक्षा प्लेट के हैं।
एचएसआरपी के लिए दोपहिया वाहन मालिकों को 365.80 रुपये, तीनपहिया के लिए 427.16 रुपये, कार और हल्के मोटर वाहन के लिए 656.08 रुपये तथा अन्य हल्के वाहनों के लिए 705.64 रुपये देने होंगे। परिवहन विभाग के अनुसार, अधिकृत कंपनियों को पात्र वाहनों पर जल्द प्लेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। हालांकि, अभियान की धीमी गति के कारण इतने बड़े वाहन वर्ग का सुरक्षा प्लेट से बाहर रहना विभाग के सामने चुनौती बना हुआ है।
परिवहन विभाग के अपर आयुक्त डी. रविशंकर ने बताया कि अधिकृत कंपनियों को सभी पात्र वाहनों में एचएसआरपी लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही इस काम में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जा रहे हैं। वाहन मालिकों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्लेट लगवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जल्द ही जांच अभियान चलाकर कार्रवाई भी करेंगे।