गोमर्डा अभयारण्य में छोड़े जाएंगे 50 काले हिरण, जंगल सफारी से सारंगढ़ बिलाईगढ़ में बढ़ेगा रोजगार
छत्तीसगढ़ शासन ने सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य में 50 काले हिरण छोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वन मंत्री केदार कश्यप की अ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 01:44:59 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 01:48:29 PM (IST)
गोमर्डा में काले हिरण छोड़े जाने की तैयारी। - अर्काइवHighLights
- गोमर्डा अभयारण्य में छोड़े जाएंगे पचास काले हिरण
- सारंगढ़ बिलाईगढ़ में जंगल सफारी का रास्ता साफ
- स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे नए रोजगार अवसर
नईदुनिया प्रतिनिधि, सारंगढ़-बिलाईगढ़। प्राकृतिक सौंदर्य, घने वनों और समृद्ध जैव विविधता से संपन्न छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ अब मध्य भारत के पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान स्थापित करने जा रहा है। जिले के प्रसिद्ध गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य में 50 काले हिरण (कृष्णमृग) छोड़ने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। इस बहुप्रतीक्षित पहल से गोमर्डा में बहुप्रतीक्षित जंगल सफारी शुरू होने का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।
राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की उच्चस्तरीय बैठक वन मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में विशेषज्ञों की राय और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए गोमर्डा अभयारण्य में काले हिरणों के पुनर्वास पर मुहर लगाई गई।
बारनवापारा में सफल रहा पुर्नवास
इससे पहले राज्य के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरणों के पुनर्वास का प्रयोग बेहद सफल रहा था, जहां उनकी संख्या और प्राकृतिक अनुकूलन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उसी तर्ज पर अब गोमर्डा के प्राकृतिक पर्यावास को भी काले हिरणों के लिए पूरी तरह अनुकूल पाया गया है।
जंगल सफारी से पर्यटन को लगेंगे नए पंख
गोमर्डा में 50 काले हिरणों की चहलकदमी शुरू होते ही यह अभयारण्य वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाएगा। अब तक सीमित दायरे में रहे इस अभयारण्य में जंगल सफारी शुरू होने से पर्यटकों को दुर्लभ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में करीब से देखने का रोमांचक अनुभव मिलेगा। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला ओडिशा सीमा और रायगढ़ से सीधे जुड़े होने के कारण पड़ोसी राज्यों के पर्यटकों के लिए भी एक पसंदीदा और सुगम गंतव्य के रूप में तेजी से उभरेगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं को रोजगार का संबल
अभयारण्य में पर्यटन गतिविधियां तेज होने से आसपास के वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को जबरदस्त गति मिलेगी। जंगल सफारी के संचालन से स्थानीय युवाओं को सफारी वाहन चालक, प्रशिक्षित नेचर गाइड, टिकटिंग और सुरक्षा प्रबंधन में प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त होगा। इसके साथ ही ढाबा, स्थानीय भोजनालय, ग्रामीण होमस्टे, हस्तशिल्प और परिवहन से जुड़े सहायक व्यवसायों में भारी उछाल आएगा। इससे महिला स्व-सहायता समूहों और छोटे ग्रामीण उद्यमियों की आय में इजाफा होगा। रायगढ़ विधायक व वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के गृह अंचल से जुड़े इस क्षेत्र के आर्थिक विकास को इससे नया संबल मिलेगा।
प्रशासनिक स्तर पर सुविधाओं का विस्तार
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के नेतृत्व में जिला प्रशासन और वन विभाग ने पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए समन्वित कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। अभयारण्य तक पहुंचने वाले पहुंच मार्गों का उन्नयन, स्वच्छ पेयजल, पर्यावरण-अनुकूल विश्राम स्थल और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। इसके अतिरिक्त स्थानीय युवाओं को हॉस्पिटैलिटी का पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति, पारंपरिक शिल्प और स्थानीय खान-पान को पर्यटन से जोड़कर पर्यटकों को एक विशिष्ट अनुभव देने की पूरी रूपरेखा तैयार की गई है।