
रायपुर (ब्यूरो)। नियंत्रक महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली, धान खरीद और कस्टम मिलिंग में करोड़ों की गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक अधिक मिलिंग दरों में भुगतान के कारण राज्य सरकार को करीब 591 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके अलावा धान के भंडारण में लापरवाही के चलते भी 278 करोड़ 36 लाख की क्षति का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014-15 के दौरान राज्य सरकार राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने में भी असफल रही। जिसके चलते घाटा बढ़कर 9500 करोड़ रुपए हो गया।
कैग के प्रतिवेदन में यह तथ्य भी सामने आया है कि पिछले पांच बरस में प्रति व्यक्ति कर्ज में लगभग 74 फीसदी का इजाफा हुआ। महालेखाकार बीके मोहंती ने सदन पटल में सीएजी की रिपोर्ट रखने के बाद आयोजित पत्रवार्ता में बताया कि वर्ष 2014-15 के दौरान सकल राज्य घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 13 वे वित्त आयोग में किए गए 12.50 प्रतिशत के प्रावधान के विस्र्द्ध 13.20 फीसदी रही। इसी दौरान राज्य को राजस्व घाटा 1573 करोड़ स्र्पए हुआ।
राजस्व व्यय भी बढ़ा : 2013-14 की तुलना में राजस्व व्यय मे 6702 करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई, जो 20
फीसदी अधिक थी। हालांकि यह बजट अनुमान 46191 करोड़ से 6630 करोड़ कम था। वर्ष 2014-15 के दौरान पिछले साल की तुलना में पूंजीगत व्यय में 43 फीसद यानी 1970 करोड़ की वृद्धि हुई।
अपूर्ण योजनाओं में 4 हजार 800 करोड़ बेकार में खर्च : लोक निर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग के 167 अधूरी परियोजनाओं पर 31 मार्च, 2015 तक 4824 करोड़ का बेकार में व्यय हुआ। प्राकृतिक आपदा के छह मौकों पर 20.97 करोड़ का अग्रिम आहरण ऐसे व्यय को पूरा करने के लिए किया
गया, जो न तो अप्रत्याशित थे और न ही आकस्मिक प्रकृति के।
16 हजार करोड़ का उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं : सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों में 16 हजार 476 करोड़ से अधिक के कार्यों का उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं लेने का मामला पकड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2015 की स्थिति में 224 व्यक्तिगत जमा खातों में 1630.82 करोड़ का महत्वपूर्ण अंश शेष था। 14 अप्रचलित पीडी खाते जिनमें 22.63 करोड़ शामिल थे बंद नहीं किए गए और इन खातों में अवशेष पांच साल से अधिक समय तक अनुपयोगी पड़े रहे।
833 करोड़ का अनियमित व्यय सीएजी के मुताबिक 2014
15 के दौरान चार अनुदानों और एक विनियोग में 833.54 करोड़ स्र्पए का प्रावधान से अधिक व्यय किया गया था। नियमितीकरण के लिए इसे विधानसभा से पारित कराना जरूरी होता है। 2013-14 के
लिए भी 2313.39 करोड़ के अधिक व्यय का नियमितीकरण नहीं किया गया।
सीएजी की रिपोर्ट में जितनी आपत्तियां आई हैं, उनका निराकरण किया जाएगा। 9500 करोड़ का राजकोषीय घाटा हुआ है तो इसके बारे में विशेषज्ञों से राय ली जाएगी। रिपोर्ट में सरकार के
कामकाज को सराहा भी गया है। -डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री
सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा से भागने के लिए सरकार ने विधानसभा के अंतिम दिवस इसे प्रस्तुत किया। भाजपा सरकार सीएजी रिपोर्ट में उजागर हुए घोटालों पर कार्रवाई करने के बजाय बचाव कर रही है। घोटालेबाजों की सरकार है। सरकार में साहस है तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा करा ले। -टीएस सिंहदेव, नेता प्रतिपक्ष