
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसा के संवर्धन के लिए जंगल सफारी में निर्मित ब्रीडिंग सेंटर में पंजाब के करनाल से आई क्लोन मादा वन भैंस दिपाशा को रखा गया है। 3 वर्ष की 8 क्विंटल वजनी इस मादा वन भैंसा को अभी चिकित्सकीय परीक्षण में रखा गया है।
पंजाब के करनाम में जब मादा वन भैंस का क्लोन पशु वैज्ञानिकों ने तैयार किया तो उन्हें इसमें आशा का दीप (एक किरण) दिखाई दी। इसके बाद इसका नाम दिपाशा रखा गया। दिपाशा के लिए यहां एक विशेष बाड़ा तैयार किया है, जहां किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। जंगल सफारी में अब एक नर वन भैंसा को भी लाने की तैयारी चल रही है ताकि इनकी वंश वृद्धि हो सके।
आशा के टिश्यू से तैयार की गई है दिपाशा
करीब ढ़ाई साल पहले देश में पहली बार वन भैंसे की क्लोनिंग से बच्चा पैदा करने में नेशनल डेयरी रिसर्ट इंस्टिट्यूट करनाल हरियाणा (एनडीआरआई) को सफलता मिली थी। एनडीआरआई ने देश में सबसे सर्वशुद्ध नस्ल की मादा वन भैंस आशा के टिश्यू लेकर क्लोनिंग की थी और इस क्लोनिंग में मादा वन भैंस दिपाशा का जन्म हुआ था। दिपाशा अब ढ़ाई वर्ष की हो चुकी है। फिलहाल विशेषज्ञों की निगरानी में है।
इस तरह हुआ था दिपाशा का जन्म
देश में सबसे दुर्लभ और सर्वशुद्ध नस्ल की मादा वन भैंसा छत्तीसगढ़ में है। इस संकटग्रस्त और सर्वशुद्ध नस्ल की एकमात्र मादा वन भैंसा आशा जीवित है, जबकि बाकी सात वन भैंसे नर हैं। मादा के अभाव में वंश ही खतरे में है।
वंश को बचाने की कोशिश की जा रही थी। नेशनल डेयरी रिसर्ट इंस्टिट्यूट करनाल हरियाणा (एनडीआरआई) ने अप्रैल 2013 में आशा के टिश्यू लेकर क्लोनिंग कराने के लिए 27 सामान्य भैंसों के गर्भ में डाला। इसमें तीन भैंसों ने गर्भ धारण किया, लेकिन सिर्फ एक ही बच्चे को जन्म दे सकी। इसके बाद ही यह साफ हुआ कि दिपाशा का डीएनए सर्वशुद्ध नस्ल की मादा वन भैंसा आशा के डीएनए से मेल खाता है।