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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के ग्राम पंडरी में नई क्रांति: पानी ढोने की मजबूरी खत्म, मिला स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल

शीला ने कहा कि पहले घर के सारे जरूरी काम छोड़कर पानी लाने के लिए दूर जाना पड़ता था और पूरी सुबह इसी में निकल जाती थी। अब घर में ही नल से स्वच्छ जल मिल...और पढ़ें

By Gaurav TiwariEdited By: Gaurav Tiwari
Publish Date: Mon, 21 Sep 2026 06:20:06 PM (IST)Updated Date: Mon, 21 Sep 2026 06:20:06 PM (IST)
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के ग्राम पंडरी में नई क्रांति: पानी ढोने की मजबूरी खत्म, मिला स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल
गांव की शीला केवट जैसी अनगिनत महिलाओं के लिए घर के आंगन में लगा नल अब केवल पानी का साधन नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और सुविधा का प्रतीक बन चुका है।

डिजिटल टीम, रायपुर। कभी सुबह की पहली किरण के साथ ही सिर पर बर्तन रखकर मीलों दूर पानी की तलाश में निकलना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों की नियति बन चुका था। घंटों इंतजार और भीषण जद्दोजहद के बाद मिलने वाला पानी न केवल समय लेता था, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार की दिनचर्या को भी बुरी तरह प्रभावित करता था। हालांकि, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर जल’ के संकल्प को धरातल पर उतारकर ग्रामीण जिंदगी की इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के ग्राम पंडरी से उठी बदलाव की नई बयार

आदिवासी बहुल जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के मरवाही विकासखंड का ग्राम पंडरी आज इस ऐतिहासिक कायाकल्प का जीवंत उदाहरण पेश कर रहा है। गांव की शीला केवट जैसी अनगिनत महिलाओं के लिए घर के आंगन में लगा नल अब केवल पानी का साधन नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान और सुविधा का प्रतीक बन चुका है।


शीला ने कहा कि पहले घर के सारे जरूरी काम छोड़कर पानी लाने के लिए दूर जाना पड़ता था और पूरी सुबह इसी में निकल जाती थी। अब घर में ही नल से स्वच्छ जल मिल रहा है। बचे हुए समय का उपयोग हम बच्चों की परवरिश, पढ़ाई और परिवार के अन्य जरूरी कामों में कर पा रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। उस समय देश के 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 17 प्रतिशत (लगभग 3.23 करोड़) के पास ही नल से जल की सुविधा थी। पिछले सात वर्षों की निरंतर यात्रा में इस योजना ने न केवल पाइपलाइन बिछाने का काम किया, बल्कि इसे जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और 'ग्रे-वॉटर मैनेजमेंट' के साथ एक जन आंदोलन का रूप दे दिया है।

महिलाओं के जीवन में आया यह बदलाव केवल सुविधा का नहीं, बल्कि क्वालिटी ऑफ लाइफ में सुधार का है। घर-घर सुरक्षित पेयजल पहुंचने से जल जनित बीमारियों का खतरा कम हुआ है। दूर से पानी ढोने की कठिन शारीरिक मेहनत से राहत मिलने से महिलाओं को आजीविका और स्वरोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। पानी लाने की मजबूरी खत्म होने से बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की स्कूल उपस्थिति और खेलकूद का समय बढ़ा है।

केंद्र सरकार की दूरदर्शी पहल और छत्तीसगढ़ की साय सरकार के प्रभावी क्रियान्वयन से यह योजना अब अगले पड़ाव में प्रवेश कर चुकी है। केंद्र सरकार ने इस मिशन को दिसंबर 2028 तक विस्तार देते हुए 'जल जीवन मिशन 2.0' के तहत जलापूर्ति सेवाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और दीर्घकालिक स्थिरता को सुनिश्चित करने का संकल्प लिया है।

आज ग्राम पंडरी के आंगन में नल से बहती पानी की धार सिर्फ प्यास नहीं बुझा रही, बल्कि यह साय सरकार के उस कुशल सुशासन की कहानी बयान कर रही है, जिसने ग्रामीण भारत में 'सहज और सुगम जीवन' की एक नई इबारत लिख दी है।