
रायपुर । डेंगू के मरीजों की संख्या ने बीते 4 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। साल 2011में सर्वाधिक 222 मरीज रिपोर्टेड हुए थे। इस साल आंकड़ा 300 पार हो चुका है। सोमवार को 8 नए मरीज रिपोर्टेड हुए। इसके बाद भी जिले के स्वास्थ्य अधिकारी इसे सामान्य बता रहे हैं।
राजधानी में डेंगू का कहर ठंड बढ़ने से कम होने के बजाय बढ़ता चला जा रहा है। सितंबर-अक्टूबर में जहां आंकड़ा 150 से अधिक था, वह नवंबर में 260 पार हो चुका था और अब दिसंबर की शुरुआत में 301तक जा पहुंचा है। रोजाना 4-5 नए मरीज आ रहे हैं। डेंगू से पीड़ित मरीज रामकृष्ण केयर अस्पताल, लाइफ वर्थ, श्री नारायणा हॉस्पिटल, एनएच-एमएमआई समेत कई अस्पतालों में मरीज भर्ती हैं। अंबेडकर अस्पताल में 1मरीज का इलाज चल रहा है। डेंगू से अब तक 8 जानें जा चुकी हैं। पहली मौत शंकर नगर स्थित गांधी नगर निवासी में 2 साल के बच्चे की हुई थी। नवंबर में भी 2 जानें जा चुकी हैं। गौरतलब है कि साल 2011 में 222, 2012 में 151 और 2013 में डेंगू के 45 मरीज रिपोर्टेड हुए थे। शहर में साफ-सफाई न होना, जगह-जगह पानी का जमा होना, गंदगी मच्छरों के पनपने की वजहें हैं।
डॉ. आई रहमान, सीनियर कंसलटेंट फिजिशियन
डेंगू और मलेरिया दोनों ही मच्छर के काटने से होते हैं। एक व्यक्ति को डेंगू है तो मच्छर इस व्यक्ति को काटता है और उसके बाद स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो स्वस्थ व्यक्ति भी इसकी चपेट में आ जाता है। शहर में सफाई एक बड़ी समस्या है, जिसकी वजह से जगह-जगह गंदगी का ढेर लगा हुआ है, जो मच्छर को पनपने का मौका देता है, इसलिए जरूरी है कि लोग स्वयं सावधानी बरतें। घर के एक सदस्य को डेंगू है तो यह भी देखने को आया है कि सभी सदस्य पीड़ित हो जाते हैं, इसलिए घर के आसपास, घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
चिंता जैसी कोई बात नहीं है
डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन बस दिसंबर तक ही, इसके बाद संख्या नहीं बढ़ेगी। डेंगू नियंत्रण में हैं, चिंता जैसी कोई बात नहीं हैं। (पूछे जाने पर की केंद्र ने तो रैपिड टेस्ट को डेंगू का कंफर्मेट्री टेस्ट माना है, बोले...) नहीं, रैपिड टेस्ट विथ एलाइजा होगा।
-डॉ. अश्वनी देवांगन, जिला मलेरिया अधिकारी, रायपुर