
सतीश पांडेय रायपुर। राजधानी की जीवनदायिनी खारुन नदी को दूषित होने से बचाने के लिए सरकार के साथ निगम प्रशासन ने कवायद तेज कर दी है। शहर के सीवरेज का पानी विभिन्न् छोटे-बड़े 17 नालों से होकर खारुन में मिल रहा है। इन नालों के नदी में मिलने वाले स्थानों पर जल शुद्धिकरण संयंत्र यानी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है। वहीं भाठागांव में छह एमएलडी का एक प्लांट स्थापित कर लिया गया है। जिससे करीब 60 लाख लीटर दूषित जल को शोधित किया जा रहा है।
वहीं चंदनडीह, कारा और निमोरा में तीन नये संयंत्र लगाए जा रहे हैं, जो करीब 200 एमएलडी क्षमता के है। प्रशासन का दावा है कि तीन संयंत्र को आने वाले वर्ष में प्रारंभ कर दिया जाएगा। बतादें कि भाठागांव एनीकट के पास छह करोड़ रुपये की लागत से छह एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र की स्थापना की गई है। बतादें कि 17 नालों से करीब 16.50 करोड़ लीटर दूषित जल खारुन नदी में जाकर मिल रहा है। तीन संयंत्र के प्रारंभ होने के कारण 20 करोड़ लीटर दूषित पानी को शोधित कर नदी में छोड़ा जा सकेगा।
यहां बन रहा प्लांट
चंदनडीह: 75 एमएलडी क्षमता।
कारा: 35 एमएलडी क्षमता
निमोरा: 90 एमएलडी क्षमता।
कुल क्षमता: 200 एमएलडी
लागत: 261 करोड़ रुपये (15 वर्षों के प्रचालन एवं अनुक्षरण सहित) है।
छह इंटेक चेंबर एवं कुल 11.78 किमी लंबी आरसीसी पाइप के माध्यम से नालों का सीवेज तीनों एसटीपी तक पहुंचाया जाएगा।
योजना क्षेत्रफल-226 वर्ग किमी.(केचमेंट क्षेत्र)।
डिजाइन अवधि- 30 वर्ष।
निर्माण अवधि-30 माह
निर्माण एजेंसी-मेसर्स एसएमएस लिमिटेड नागपुर(महाराष्ट्र)
जल परीक्षण प्रयोगशाला
पानी की गुणवत्ता के सघन जांच करने संयंत्र परिसर में जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जिसमें केमिकल आक्सीजन डिमांड, बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड, टोटल संस्पेंडेड सालिड, पीएच वैल्यु, फिस्कल कालिफार्म जैसे महत्वपूर्ण परीक्षण की सुविधा हैं।
यह है मिशन क्लीन खारून
राजधानी के साथ आसपास के गावों से भी सीवरेज का पानी खारुन में मिलता है। इस समस्या के निराकरण के लिए शासन ने 330.92 करोड़ रुपये की लागत से रायपुर सीवरेज मास्टर प्लान तैयार किया है। इस के अंतर्गत जल शुद्धिकरण संयंत्र लगाया जा रहा है।
इन नालों का पानी जा रहा खारुन
रायपुर नगर निगम क्षेत्र के 70 वार्डों के अतंर्गत प्रवाहित 17 बड़े नालों में मुख्य रूप से चिंगरी नाला, गोवर्धन नाला, वंडर पार्क नाला, अटारी नाला, तेंदुआ नाला, छोकरा नाला, अछोली नाला सहित कई छोटे-बड़े नालों के माध्यम से शहर के सीवरेज का दूषित पानी नदी में मिल रहा है।
जैव परिस्थिति में सुधार
आगामी वर्ष में तीनों जल शुद्धिकरण संयंत्र के प्रारंभ हो जाने से खारुन में शुद्ध पानी जाएगा। इससे नदी के जैव परिस्थितितंत्र में सुधार होने के साथ इसका संतुलन बना रहेगा। संयंत्र में उपचारित किए गए जल का भविष्य में विविध उपयोग किया जा सकता है।
मल-जल का भी शोधन
सिक्वेसिंग बैच रियेक्टर (एसबीआर) तकनीक पर आधारित इस संयंत्र में निगम क्षेत्र से एकत्रित किए गए मल-मूत्र का भी शोधन किया जा सकेगा। इस परियोजना में एसटीपी के 15 वर्ष के संचालन और संधारण का कार्य भी शामिल है।
काफी हद तक सुधरी है हालत
भाठागांव में ट्रीटमेंट प्लांट शुरू होने से काफी हद तक हालत सुधरी है। निमोरा, कारा और चंदनीडीह में निर्माणाधीन जल शोधन संयंत्र का 90 फीसद काम पूरा किया जा चुका है। आने वाले कुछ महीने के भीतर सीवरेज का पानी शुद्ध होकर पहुंचेगा।
-एजाज ढेबर, महापौर, रायपुर नगर निगम