संदीप तिवारी, रायपुर। राज्य के किसानों को अब अपने खाद्य उत्पाद में मौजूद कीटनाशक के अवशेष की जांच कराने के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला को कीटनाशक के अवशेष की जांच के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) ने मंजूरी दे दी है। किसान विवि की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला में कुछ शुल्क अदा करके चावल, सब्जी की जांच कराकर इसे विदेशी बाजार तक सीधे निर्यात कर सकेंगे।

प्राथमिकता को देखते हुए अभी चावल समेत सब्जियों में मिर्च, टमाटर, मुनगा और लौकी में मौजूद कीटनाशक के अवशेष की जांच करने अनुमति मिली है। विवि के डिपार्टमेंट आफ प्लांट मालिकुलर बायोलाजी एंड बायोटेक्नोलाजी के प्रोफेसर डा. गिरीश चंदेल इस प्रयोगशाला के सीईओ और यहां की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. अर्चना एस. प्रसाद क्वालिटी मैनेजर नियुक्त हुई हैं। इन्हीं की बदौलत विवि ने यह उपलब्धि हासिल की है।

अभी हैदराबाद और महाराष्ट्र में लगानी पड़ रही थी दौड़

कृषि विवि के प्रोफेसर डा. गिरीश चंदेल बताते हैं कि धान का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसान अंधाधुंध कीटनाशक और रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल करते हैं। मगर प्रदेश में कीटनाशक के अवशेष की जांच करने के लिए किसी प्रयोगशाला को मान्यता नहीं होने से यहां के चावल और सब्जी को विदेशी बाजार में जगह नहीं मिल पा रही थी।

इससे प्रदेश में यदि किसी को राज्य से बाहर चावल या सब्जी बाहर भेजना होता था, तो उसे पहले आंध्र प्रदेश के हैदराबाद, महाराष्ट्र से कीटनाशक के अवशेष की जांच करानी होती थी। अब छत्तीसगढ़ खुद दूसरे राज्यों के किसानों के चावल और सब्जी उत्पादों को प्रमाणित कर सकेगा।

किसानों को मिलेगा बेहतर मूल्य

इस प्रयोगशाला की क्वालिटी मैनेजर डा. अर्चना एस. प्रसाद ने बताया कि कीटनाशक के साथ-साथ जो भी जहरीले तत्व हैं यदि वे मानक से अधिक मिलते हैं तो ऐसे उत्पाद को विदेशी बाजार में जगह नहीं मिल पाती है। अब किसान चावल और सब्जियों की जांच कराकर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकेंगे।

विशेषज्ञ ने कहा- स्वास्थ्य के लिए भी यह जांच जरूरी

पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के प्रोफेसर डा. शम्स परवेज कहते हैं कि एनएबीएल से अनुमति मिलने के बाद अब प्रदेश के किसानों को अपने उत्पादों में मौजूद कीटनाशक की जांच करने की आसानी होगी। कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल करने से लोगों को कैंसर का सबसे अधिक खतरा रहता है।

लोग समझते हैं कि फल-सब्जियों को धोकर खाने से उनके जहरीले कीटनाशक निकल जाते हैं, पर ऐसा नहीं है इनके भीतर मौजूद कीटनाशक के अवशेष खाद्य सामग्री के रूप में खाने से लीवर, किडनी खराब कर देते हैं और साथ-साथ कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

25 फीसद अकेले चावल निर्यात

कृषि विवि के अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश में कुल निर्यात होने वाले उत्पादों में अकेले 25 फीसद चावल है। प्रदेश में 37 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 13 मिलियन टन धान का उत्पादन हो रहा है। इनमें 8.5 मिलियन टन धान की खरीदारी सरकार करती है। बाकी कुछ धान किसान स्वयं उपयोग के लिए रखते हैं। धान की खरीदारी के बाद सरकार के पास 20 फीसद धान का उठाव नहीं हो पाता है।

वर्षवार उत्पादन

सब्जी क्षेत्रफल (हेक्टेयर) उत्पादन (मीट्रिक टन में)

मिर्च 35,912 2,46,438

टमाटर 64,717 11,82,648

मुनगा 2,486 19,418

लौकी 14,332 2,51,594

वर्जन

एनएबीएल से अनुमति मिलने के बाद अब हम खुद अपने उत्पाद में मौजूद कीटनाशक के तत्वों की जांच के लिए अधिकृत हो गए हैं।

- डा. एसके पाटिल, कुलपति, कृषि विवि

Posted By: Shashank.bajpai

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