
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। चिकित्सा जगत में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जब कोई मरीज अपनी ही बीमारी को गहराई से समझने और उसका इलाज खोजने के लिए उस पर रिसर्च कर डाले।
एम्स रायपुर के फिजियोलाजी विभाग के पीजी छात्र तरुण साहू ने यह अनोखी मिसाल पेश की है। सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारी से खुद पीड़ित होने के बावजूद उन्होंने इसी बीमारी पर अपनी पीएचडी पूरी की है, जो एम्स रायपुर की पहली पीएचडी भी है।
तरुण ने अपनी रिसर्च में साबित किया है कि बिना किसी भारी दवा के, सिर्फ सांस लेने की एक खास तकनीक से इस बीमारी के दर्द और मस्तिष्क पर पड़ने वाले प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तरुण साहू ने इफेक्ट ऑफ शॉर्ट टर्म स्लो डीप ब्रीडिंग विषय पर अपना अहम शोध पूरा किया है। इस अध्ययन में उन्होंने पाया कि सिकलसेल के वयस्क मरीज अगर हर दिन 20 मिनट धीमी और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें, तो उनके ध्यान और सतर्कता में काफी सुधार होता है।
इससे मरीजों के दिमाग में आक्सीजन की कमी नहीं होती है और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ने वाले बुरे असर से बचा जा सकता है। तरुण ने सबसे पहले इस तकनीक का प्रयोग खुद पर किया और फिर विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. रंजन सिन्हा के मार्गदर्शन में अन्य मरीजों पर इसका सफल परीक्षण किया।