
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। आंबेडकर अस्पताल में बार-बार आग लगने की घटनाओं के बावजूद प्रबंधन सबक लेता नजर नहीं आ रहा है। हाल ही में इमरजेंसी वार्ड के मेडिसिन विभाग में आग लगने के बाद अब इसी वार्ड का रेनोवेशन किया जा रहा है। इसके बावजूद निर्माण में फायर सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। वार्ड में स्प्रिंकलर सिस्टम नजर नहीं आ रहा है और आग से बचाव के अन्य जरूरी इंतजाम भी पर्याप्त नहीं दिख रहे हैं।
अस्पताल जैसे संवेदनशील भवन में केवल अग्निशमन यंत्र रखना पर्याप्त नहीं है। आग की सूचना देने वाली व्यवस्था, फायर हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर और मरीजों के लिए सुरक्षित निकास की व्यवस्था भी जरूरी है। ऐसे में आग की घटना के बाद उसी वार्ड के रेनोवेशन में फायर सुरक्षा की अनदेखी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
आंबेडकर अस्पताल में आग की घटनाएं नई नहीं हैं। पांच नवंबर 2024 को अस्पताल की तीसरी मंजिल स्थित न्यू ट्रामा सेंटर के हड्डी रोग विभाग के आपरेशन थिएटर में आग लगी थी। उस समय ऑपरेशन चल रहा था। आग के बाद ओटी में धुआं भर गया था और मरीज को खिड़की का कांच व ग्रिल काटकर बाहर निकालना पड़ा। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की तीन गाड़ियां पहुंची थीं। घटना में मरीज और चिकित्सक सुरक्षित रहे, लेकिन धुएं के कारण आपरेशन कर रहे एक डाक्टर के बेहोश होने की भी जानकारी सामने आई थी।
2024 की घटना के बाद अस्पताल के फायर सिस्टम के रखरखाव और आडिट की बात सामने आई थी। पहले ही आधे अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम नहीं है। वहीं जहां लगा है, वह भी खराब है। रिपोर्टों के अनुसार अस्पताल में करीब 12 वर्ष पहले लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से फायर सिस्टम लगाया गया था, लेकिन नियमित रखरखाव नहीं होने से पाइप में जंग और नोजल जाम होने की समस्या बताई गई थी। फायर सिस्टम चलाने के लिए तकनीकी कर्मचारी की भी अस्पताल में कमी है।
24 मई 2025 को अस्पताल के पैथोलाजी विभाग के कक्ष क्रमांक 152 में रखी इनक्यूबेटर मशीन में आग लग गई थी। ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों ने धुआं देखकर फायर फाइटर कर्मियों को सूचना दी। अस्पताल में मौजूद अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग पर काबू पाया गया था। इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन मशीन में आग लगने की घटना ने अस्पताल की विद्युत और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर घटना की जांच के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन जांच सिर्फ घोषणाओं तक सीमित रह गई।
28 जुलाई 2026 को अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग के इमरजेंसी वार्ड में फिर आग लग गई। मानिटर से होते हुए आग ने पूरे वार्ड में लगे एसी को अपनी चपेट में ले लिया था, इससे दो एसी ब्लास्ट भी हो गए थए। आग के बाद पूरे वार्ड और आसपास धुआं फैल गया था। वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया और दमकल की गाड़ियों ने पहुंचकर आग पर काबू पाया। राहत की बात रही कि इस घटना में किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं मिली।
अभी वार्ड का काम पूरा नहीं हुआ है। सभी काम नार्म्स के अनुसार ही होंगे। सुरक्षा के इंतजाम भी किए जा रहे हैं।
- डाॅ संतोष सोनकर, अधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल