महानदी जल विवाद सुलझाने अब अमित शाह की एंट्री, छत्तीसगढ़- ओडिशा के मुख्यमंत्री के साथ करेंगे 1 अक्टूबर को बैठक
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से जारी महानदी जल विवाद के समाधान के लिए एक अक्टूबर को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रि...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 03:30:57 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 04:00:16 PM (IST)
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह। अर्काइवHighLights
- गृह मंत्री अमित शाह ने बुलाई अहम बैठक
- नई दिल्ली में एक अक्टूबर को होगी चर्चा
- ओडिशा और छत्तीसगढ़ जल्द सुलझाएंगे विवाद
डिजिटल टीम, रायपुर। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस संवेदनशील और जटिल मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने मंगलवार को इस घटनाक्रम की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ-साथ दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और तकनीकी समितियों के सदस्य भी उपस्थित रहेंगे। इस अहम बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल भी शामिल होंगे, जिससे दशकों पुराने इस गतिरोध को खत्म करने के ठोस रास्ते खुलने की उम्मीद है।
दिवाली से पहले समाधान की उम्मीद
यह बैठक उस समय आयोजित की जा रही है जब करीब दस दिन पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भुवनेश्वर की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी। उस दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने का भरोसा जताया था। मुख्यमंत्री माझी ने आशा व्यक्त की थी कि दिवाली से पहले इस मसले का सौहार्दपूर्ण हल निकाला जा सकता है। इससे पूर्व 30 जुलाई को जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में भी दोनों पक्षों ने सहमति जताई थी। महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने भी आपसी समझौते के विचार का समर्थन किया है और केंद्रीय जल आयोग इस दिशा में कार्ययोजना तैयार कर रहा है।
विवाद की जड़ और कानूनी प्रक्रिया
महानदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों में यह विवाद एक दशक से भी अधिक समय से चल रहा है। ओडिशा सरकार का मुख्य आरोप यह रहा है कि छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी हिस्से में औद्योगिक जरूरतों के लिए बनाए गए बैराजों से नदी के निचले प्रवाह पर गंभीर असर पड़ता है, विशेष रूप से कम वर्षा और सूखे के समय ओडिशा को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ओडिशा ने 2016 में तत्कालीन जल संसाधन मंत्रालय के पास छह बैराजों के निर्माण को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था।
राज्यों की निर्भरता और नई उम्मीदें
महानदी छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा मानी जाती है, जहां राज्य की लगभग 78 प्रतिशत आबादी इसके बेसिन क्षेत्र में निवास करती है। हालांकि राज्य में गोदावरी, गंगा, ब्राह्मणी और नर्मदा जैसी नदियों के बेसिन भी मौजूद हैं, लेकिन महानदी सामाजिक और आर्थिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर ओडिशा के तटीय जिलों की खेती और पेयजल आपूर्ति भी इसी नदी पर निर्भर है। नई दिल्ली में प्रस्तावित यह बैठक दोनों राज्यों के बीच विश्वास बहाली और स्थायी समाधान की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।