महानदी जल विवाद: दिल्ली में अमित शाह व मोहन माझी के साथ बैठक के बाद साय बोले- संवाद से ही समाधान
नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी जल विवाद पर उच्चस्तरीय बैठक हुई। मुख्यमंत्...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 08:14:06 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 08:15:29 PM (IST)
दिल्ली में आयोजित बैठक में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी। - डीपीआरHighLights
- अमित शाह की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित
- महानदी दोनों राज्यों को जोड़ने वाली साझी जीवनधारा
- वैज्ञानिक आकलन और आपसी संवाद से निकलेगा समाधान
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाया गया है। नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई।
इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों के हितों, वास्तविक आवश्यकताओं और भविष्य की योजनाओं को विस्तार से रखा। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष तथा दोनों राज्यों के मुख्य सचिव व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
महानदी जोड़ने वाली जीवनधारा
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, कृषि और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। उन्होंने कहा कि महानदी दोनों पड़ोसी राज्यों को बांटने वाली नहीं, बल्कि आपस में जोड़ने वाली नदी है। इसलिए इस संवेदनशील विषय पर किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा या टकराव के बजाय सहयोग, परस्पर विश्वास और सहमति की भावना से समाधान तलाशना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा दीर्घकालिक मार्ग तैयार करना होना चाहिए, जिसमें दोनों राज्यों की जीत हो और आने वाली पीढ़ियों के हित भी पूरी तरह सुरक्षित रहें।
छत्तीसगढ़ की वास्तविक जरूरतें और हीराकुंड का सम्मान
मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में स्थित है और इसके कुल जलग्रहण क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा प्रदेश की सीमा में आता है। राज्य के ग्रामीण व आदिवासी अंचलों की पेयजल, कृषि, सिंचाई और बुनियादी विकास की जरूरतें इसी नदी पर टिकी हैं। इसलिए किसी भी स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की इन मूलभूत प्राथमिकताओं का पूरा ध्यान रखा जाना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करता है। हीराकुंड जलाशय ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके सुचारु संचालन में हर संभव सहयोग देने को तत्पर है।
वैज्ञानिक आकलन और सहकारी संघवाद से स्थायी समाधान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना से राज्यों के बीच जटिल मुद्दों के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण का स्मरण करते हुए संवाद की महत्ता पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को केंद्रीय जल आयोग के निष्पक्ष और वैज्ञानिक तकनीकी आकलन पर पूरा भरोसा है। जल की उपलब्धता, पर्यावरणीय जरूरतों और भविष्य की आवश्यकताओं का अध्ययन कर ऐसा न्यायसंगत रास्ता निकाला जा सकता है, जो दोनों राज्यों के किसानों और नागरिकों के हित में सिद्ध हो।