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रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि
यदि आप कुत्ते पालने के शौकीन हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि इससे लिवर, फेफड़े, मस्तिष्क और हृदय से संबंधित बीमारियां आपको घेर सकती हैं। ऐसे ही मामले में हाइडैटिड सिस्ट (फेफड़े, लिवर, मस्तिष्क, हृदय में होने वाली बीमारी) से पीड़ित मरीज का आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में सफल सर्जरी की गई है।
सर्जरी करने वाले कार्डियोथोरेसिक सर्जन और एसीआइ के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू, डीकेएस अस्पताल के गैस्ट्रोसर्जन डॉ. रोमिल जैन ने बताया कि सारागांव निवासी 40 वर्षीय व्यक्ति खांसी, सांस फूलने, पेट दर्द की शिकायत लेकर मार्च में आंबेडकर अस्पताल के एसीआइ विभाग में पहुंचा। एक्स-रे, सोनोग्राफी, छाती व पेट का सीटी स्कैन करने से पता चला कि उसके बाएं फेफड़े व लिवर के बाएं लोब में हाइडैटिड सिस्ट संक्रमित हो गया है। कोरोना की वजह से अस्पताल में नॉन इमरजेंसी ऑपरेशन बंद होने के कारण मरीज को फौरी राहत के लिए कृमि की दवाई एलबेंडाजॉल देकर घर भेज दिया गया। मरीज को कोरोना नियंत्रण के बाद आने को कहा गया, लेकिन मरीज की सांस फूलने की शिकायत को देखते हुए सर्जरी करनी पड़ी। 15 दिन पहले हुई एक साथ दो सर्जरी के बाद सोमवार को मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत निशुल्क किया गया।
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हाइडैटिड सिस्ट बीमारी को समझें
हाइडैटिड सिस्ट इकाइनोकोकस ग्रेन्युलोसस नामक कृमि से इंसानों में फैलता है। यह कृमि कुत्ता, भेड़, बकरी के मल से उत्पन्न होकर फैलता है। यह धूल व मिट्टी में सब्जी व खाद्य सामग्रियों में मिल जाता है। यह कृमि कुत्ते के मल के साथ सिस्ट के रूप में बाहर निकलता है। मल सूख कर मिट्टी में मिल जाता है और कृमि बहुत दिनों तक मिट्टी एवं हवा में जिंदा रह सकता है। सांस के जरिए, फल, सब्जी, सलाद के माध्यम से या गंदे हाथों से खाना-खाने पर यह शरीर में प्रवेश कर जाता है। जब हम ऐसे कुत्तों के साथ रहने लगते हैं या खेलने लग जाते हैं तो उसके शरीर सिस्ट इंसानों में प्रवेश कर जाता है।
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कुत्ते पाल रहे हैं तो क्या सावधानी बरतें
-कुत्तों की जांच नियमित वेटनरी डॉक्टर से कराएं।
-अधपकी कच्ची सब्जियां न खाएं। अच्छे से धोकर सब्जी पकाएं।
-गंदे हाथों से खाना न खाएं।
-कुत्तों से नजदीकी रखने पर मास्क लगाएं और खेलने के बाद हाथ अच्छे से धोएं।
वर्जन
हाइडैटिड सिस्ट फेफड़े, मस्तिष्क, हृदय और लिवर में होता है। इससे लिवर की अपेक्षा फेफड़े, मस्तिष्क और हृदय में खतरा अधिक होता है। समय पर इलाज नहीं किया गया तो जान भी जा सकती है। 40 वर्षीय पुरुष मरीज में यह बीमारी फेफड़े और लिवर दोनों में फैली थी। सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। कुत्ता पालने या उसके संपर्क में आने पर लोगों को अधिक सावधानी के साथ खाने-पीने के साथ स्वच्छता का विशेष ध्यान देना चाहिए। -डॉ. कृष्णकांत साहू, विभागाध्यक्ष, एसीआइ, आंबेडकर अस्पताल
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