बस्तर के धुड़मारास की शांत वादियों में स्थित धुरवा डेरा बना राज्य का बेस्ट होमस्टे, कांगेर घाटी में जनजातीय संस्कृति की है आरामगाह
विश्व पर्यटन दिवस 2026 के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन की ओर से धूड़मारास बस्तर के धुरवा डेरा होम स्टे को बेस्ट होमस्टे सम्मान प्रदान किया गया। यह गौरव...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 28 Sep 2026 04:52:56 PM (IST)Updated Date: Mon, 28 Sep 2026 04:57:16 PM (IST)
बस्तर के धुड़मारास स्थित धुरवा डेरा। अर्काइवHighLights
- धुरवा डेरा को मिला प्रतिष्ठित बेस्ट होमस्टे सम्मान
- विश्व पर्यटन दिवस पर बस्तर की ऐतिहासिक उपलब्धि
- आदिवासी संस्कृति और ग्रामीण समुदाय को मिला गौरव
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। विश्व पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर बस्तर ने एक बार फिर अपनी गौरवशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। कांगेर घाटी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम धूड़मारास स्थित प्रसिद्ध 'धुरवा डेरा होम स्टे' को राज्य स्तर पर 'बेस्ट होमस्टे' के प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार बस्तर के सतत पर्यटन, स्थानीय आदिवासी संस्कृति और ग्रामीण आतिथ्य सत्कार के उत्कृष्ट मॉडल पर मुहर लगाता है।
राजधानी रायपुर में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध निदेशक सौमिल रंजन चौबे ने यह सम्मान प्रदान किया। मंच पर उपस्थित अतिथियों ने धुरवा डेरा द्वारा प्रकृति संरक्षण और पारंपरिक मूल्यों को संजोते हुए पर्यटकों को दिए जा रहे प्रामाणिक अनुभव की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
धुरवा डेरा के संचालक मान सिंह को सम्मानित करते पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल व अन्य। -पर्यटन विभाग
स्थानीय समुदाय और समृद्ध संस्कृति का साझा गौरव
सम्मान प्राप्त करने के बाद धुरवा डेरा प्रबंधन ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए अविस्मरणीय क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल धुरवा डेरा की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि धूड़मारास की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय धुरवा समाज की अनूठी संस्कृति और ग्रामीण समुदाय के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल है। बस्तर का पारंपरिक आतिथ्य, स्थानीय खानपान और लोकजीवन ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिसे गांव के लोगों ने अपनी निष्ठा से जीवंत रखा है।
सतत पर्यटन और प्रकृति संरक्षण का संकल्प
धुरवा डेरा संचालक मान सिंह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को अपने परिवार और धूड़मारास के समर्पित ग्रामीणों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि परिवार के हर कदम पर मिले सहयोग, प्रोत्साहन और ग्रामीणों के विश्वास के बिना यह यात्रा अधूरी थी। उन्होंने छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल और शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान भविष्य में प्रकृति संरक्षण, आदिवासी विरासत के संवर्धन और सतत इको-पर्यटन के विस्तार के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करेगा।