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भारतमाला मुआवजा घोटाला: 56 लाख की जमीन पर 9.83 करोड़ का भुगतान, ईडी ने मुख्य आरोपी को दबोचा

भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा वितरण में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अभनपुर निवासी जय प्रकाश गांधी ...और पढ़ें

By Deepak ShuklaEdited By: manoj dubey
Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 07:19:41 PM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 07:19:41 PM (IST)
भारतमाला मुआवजा घोटाला: 56 लाख की जमीन पर 9.83 करोड़ का भुगतान, ईडी ने मुख्य आरोपी को दबोचा

HighLights

  1. रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर परियोजना से जुड़ा है मामला
  2. जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बढ़ाया मुआवजा
  3. वास्तविक पात्रता से कई गुना अधिक मुआवजा प्राप्त किया

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा वितरण में हुए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभनपुर निवासी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है।

ईडी की रायपुर जोनल कार्यालय की टीम ने 3 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह कार्रवाई की।

रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर परियोजना से जुड़ा है मामला

ईडी के अनुसार यह मामला रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर की गई अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है। इस मामले की जांच छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।

जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बढ़ाया मुआवजा

जांच में सामने आया है कि जय प्रकाश गांधी ने अपने परिजनों तथा कुछ लोक सेवकों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रस्तावित एलाइनमेंट में आने वाली जमीन खरीदी थी। इसके बाद कथित रूप से उस जमीन को 500 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाले छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित किया गया।


वास्तविक पात्रता से कई गुना अधिक मुआवजा प्राप्त किया

ईडी का आरोप है कि यह पूरा खेल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से अधिक मुआवजा हासिल करने के उद्देश्य से रचा गया था। भूमि के कृत्रिम विभाजन के जरिए नियमों का फायदा उठाकर वास्तविक पात्रता से कई गुना अधिक मुआवजा प्राप्त किया गया।

56 लाख के बदले मिले 9.83 करोड़ रुपये

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को लगभग 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त हुआ, जबकि नियमानुसार उन्हें केवल 56.76 लाख रुपये ही मिलने थे। ईडी का दावा है कि इस तरह लगभग 9.27 करोड़ रुपये की अवैध आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) अर्जित की गई।


जांच में यह भी सामने आया है कि इस रकम को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेश माध्यमों में लगाकर उसके स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।

अप्रैल में हुई थी छापेमार कार्रवाई

इससे पहले ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमार कार्रवाई की थी। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और कथित अनियमितताओं से जुड़े अन्य साक्ष्य मिले थे, जिन्हें जब्त किया गया था।

तीन दिन की ईडी रिमांड

गिरफ्तारी के बाद जय प्रकाश गांधी को रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है।

यह भी पढ़ें- जहां सड़क ही नहीं, वहां 52 एकड़ भूमि पर बांटा करोड़ों का मुआवजा; CG भारतमाला सड़क परियोजना में नया घोटाला

अन्य आरोपियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

ईडी ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है। घोटाले से लाभान्वित अन्य व्यक्तियों, बिचौलियों तथा इसमें शामिल रहे शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति तक सीमित मामला नहीं है और आने वाले दिनों में कई अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं।

गौरतलब है कि भरतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले को प्रदेश के चर्चित मामलों में माना जा रहा है। इस मामले में पहले भी कई प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जांच एजेंसियां कार्रवाई कर चुकी हैं।