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भारतमाला प्रोजेक्ट में उजड़ा बुजुर्ग का घर, अब गायों के साथ पहुंचा रायपुर कलेक्ट्रेट, मुआवजा नहीं मिलने पर प्रदर्शन की चेतावनी

भारतमाला परियोजना के लिए पैतृक जमीन अधिग्रहित हुई, मकान और गौशाला भी टूट गई, लेकिन मुआवजा नहीं मिला।

By Jitendra DahiyaEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 08:51:01 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 08:51:01 PM (IST)
भारतमाला प्रोजेक्ट में उजड़ा बुजुर्ग का घर, अब गायों के साथ पहुंचा रायपुर कलेक्ट्रेट, मुआवजा नहीं मिलने पर प्रदर्शन की चेतावनी
गायों को लेकर बुजुर्ग पहुंच गया कलेक्ट्रेट, फोटो-एआई जनरेटेड

HighLights

  1. मुआवजा के लिए भटक रहा बुजुर्ग
  2. 12 महीनों से नहीं मिला मुआवजा
  3. गायों को लेकर पहुंच गया कलेक्ट्रेट

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। भारतमाला परियोजना के लिए पैतृक जमीन अधिग्रहित हुई, मकान और गौशाला भी टूट गई, लेकिन मुआवजा नहीं मिला। करीब एक साल से न्याय के लिए अलग-अलग जगह आवेदन देने का दावा कर रहे पारागांव के भास्कर चंद्राकर सोमवार को गाय-बछड़ों और बकरे के साथ रायपुर कलेक्ट्रेट पहुंच गए।

करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर आए ग्रामीण ने कलेक्ट्रेट के बाहर मवेशियों को बांधकर विरोध जताया। उनका कहना है कि प्रशासन और इंजीनियरों की टीम ने बिना पूर्व सूचना मकान और गौशाला तोड़ दी। नोटिस मिलता तो वे आपत्ति दर्ज करा सकते थे। अब मुआवजे के लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। ग्रामीण ने चेतावनी दी है कि उचित मुआवजा मिलने तक वह वहां से नहीं हटेंगे।


पैतृक जमीन और आशियाना छिनने का दावा

भास्कर चंद्राकर ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि ग्राम पारागांव, तहसील आरंग में खसरा नंबर 898/1 और 899/1 की जमीन उनकी पैतृक भूमि है। इसी जमीन पर उनका परिवार गौधन के साथ रहता था। उनके अनुसार, भारतमाला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण के बाद मकान और गौशाला तोड़ दी गई, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला।

सोमवार को वे दो गाय, दो बछड़े और एक बकरे के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300ए का हवाला देते हुए संपत्ति से वंचित किए जाने के मामले में न्याय की मांग की।

एक साल से आवेदन, सुनवाई नहीं होने का आरोप

ग्रामीण का कहना है कि घटना को करीब एक साल बीत चुका है। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग जगह आवेदन देकर अपनी समस्या बताई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की कोशिश करने पर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।

उनका सवाल है कि यदि अधिग्रहण और निर्माण की कार्रवाई नियमानुसार हुई, तो मुआवजे का भुगतान अब तक क्यों नहीं किया गया? वहीं, बिना पूर्व सूचना मकान तोड़े जाने के उनके आरोप की भी जांच जरूरी है।

मुआवजे तक नहीं हटने की चेतावनी

आवेदन में भास्कर चंद्राकर ने कलेक्टर से संरक्षण और मुआवजा दिलाने के लिए कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि यदि मवेशियों के साथ इस तरह प्रदर्शन करने से कोई कानूनी अपराध बनता है, तो इसकी जानकारी उन्हें लिखित में दी जाए। अब प्रशासन के सामने अधिग्रहण के दस्तावेज, मकान और गौशाला तोड़े जाने की प्रक्रिया, मुआवजे के निर्धारण तथा भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है।

एसडीएम आरंग को प्रकरण की जांच के लिए कहा गया है। जांच में आवेदक के मुआवजे का प्रकरण को जल्द से जल्द निराकृत करने को कहा गया है। डॉक्टर, गौरव सिंह, कलेक्टर रायपुर