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भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले के 'नागों' ने सड़क की दिशा बदली, सर्पाकार बना बटोरे करोड़ों

धमतरी के सिवनीकला में भारतमाला परियोजना के तहत करोड़ों रुपये का मुआवजा घोटाला सामने आया है। सड़क की दिशा बदलकर चुनिंदा जमीनों को अधिग्रहण के दायरे में...और पढ़ें

By Paritosh DubeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Thu, 18 Jun 2026 09:15:32 AM (IST)Updated Date: Thu, 18 Jun 2026 12:33:46 PM (IST)
भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले के 'नागों' ने सड़क की दिशा बदली, सर्पाकार बना बटोरे करोड़ों
भारतमाला परियोजना की प्रतीकात्मक तस्वीर। अर्काइव

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाले की परतें अब लगातार खुलती जा रही हैं। धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र के ग्राम सिवनीकला में सड़क की मूल दिशा बदलकर कुछ रसूखदारों की जमीनों को अधिग्रहण दायरे में शामिल करने का मामला सामने आया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि परियोजना के पाइंट नंबर-21 के बाद सड़क को करीब 25 मीटर तक मोड़ दिया गया, जिससे पहले बाहर रहने वाली कई जमीनें अधिग्रहण की जद में आ गईं और करोड़ों रुपये का अतिरिक्त मुआवजा बांट दिया गया।

एक किलोमीटर आगे से बदली दिशा

ग्रामीणों के मुताबिक सड़क का सर्वे पहले गांव के पहले हिस्से से मुड़ना था, लेकिन बाद में एक किलोमीटर आगे से टर्न दिया गया। इससे सड़क पूरी तरह “शर्फ” की तरह हो गई और जिन लोगों की जमीनें पहले प्रभावित नहीं थीं, वे अचानक करोड़ों के मुआवजा दावेदार बन गए। यदि भुइंया पोर्टल की लाग हिस्ट्री और रिकार्ड संशोधन की तकनीकी जांच हो जाए तो पूरे घोटाले का सच सामने आ सकता है।


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प्रभावित इलाके का राजस्व नक्शा।

खसरों की प्रविष्टियां बैक डेट में बदली

मामले में सबसे गंभीर आरोप आनलाइन भू-अभिलेखों से छेड़छाड़ का है। किसानों ने दावा किया है कि भुइंया पोर्टल में कई खसरों की प्रविष्टियां बैक डेट में बदली गईं। जिन जमीनों पर सड़क प्रस्तावित थी, वहां तेजी से नामांतरण, बटांकन और रिकार्ड संशोधन किए गए। कई जमीनों को आनलाइन रिकार्ड में केंद्र सरकार के नाम दर्ज दिखाया गया, ताकि भविष्य की जांच में वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि 15 अप्रैल 2019 को भूमि अधिग्रहण का आशय पत्र जारी होने के बाद अचानक बड़ी संख्या में डिजिटल एंट्री बदली गईं। इतने बड़े स्तर पर रिकार्ड संशोधन बिना उच्च प्रशासनिक सहयोग के संभव नहीं थे।

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प्रभावित इलाके का गूगल नक्शा।

19 खसरों की करीब 17.51 एकड़ जमीन को 84 से ज्यादा टुकड़ों

दस्तावेजों के अनुसार केवल 19 खसरों की करीब 17.51 एकड़ जमीन को 84 से ज्यादा टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग लोगों के नाम दर्ज किया गया। आरोप है कि एक ही परिवार, रिश्तेदारों और करीबी लोगों के नाम पर जमीनों का कृत्रिम बटांकन कर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त मुआवजा लिया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि करीब चार करोड़ रुपये के वास्तविक मुआवजे की जगह 15 करोड़ 50 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया, जिससे शासन को लगभग 11.50 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।

52 रजिस्ट्रियों में खुद गवाह बना ‘मास्टरमाइंड’

शिकायतकर्ता कृष्णकुमार साहू ने बताया कि पूरे खेल का मुख्य किरदार टिकेश्वर उर्फ टकेश्वर चंद्राकर रहा, जिसने 2019 के दौरान हुई 50 से ज्यादा रजिस्ट्रियों में खुद गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए। कई रजिस्ट्रियां एक ही तारीख में अलग-अलग लोगों के नाम की गईं। इनमें रिश्तेदार, परिचित, पंचायत से जुड़े लोग और करीबी कारोबारी शामिल बताए गए हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान बार-बार आशय पत्र जारी कर एक ही जमीन पर दोबारा मुआवजा भुगतान की स्थिति बनाई गई।

जांच के घेरे में तत्कालीन अफसर

मामले में तत्कालीन भूमि अधिग्रहण अधिकारी, एसडीएम, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुरूद में पदस्थ रहे कुछ अधिकारियों के निजी संबंध जमीन कारोबार से जुड़े लोगों से थे। भूमि अधिग्रहण अधिकारी एवं तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुरूद प्रेम कुमार पटेल के कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही भू-माफिया टिकेश्वर उर्फ टकेश्वर चंद्राकर के सनसिटी कालोनी स्थित मकान में उनके रहने के आरोप भी शिकायत में लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि प्रेम कुमार पटेल के अन्यत्र स्थानांतरण के बाद भी उनकी पत्नी प्रियंका पटेल वर्ष 2024 तक उसी मकान में निवासरत थीं।

ऐसे हुआ मुआवजा बढ़ाने का खेल

  • 19 खसरों को 84 से अधिक हिस्सों में बांटा गया
  • परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर छोटे-छोटे टुकड़े किए गए
  • सड़क की दिशा बदलकर जमीन अधिग्रहण दायरे में लाई गई
  • चार करोड़ की जमीन पर 15 करोड़ से ज्यादा मुआवजा