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88 टुकड़ों में बांटी जमीन, करोड़ों का खेल! भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले की जांच मांगते किसान पहुंचे EOW

रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला कॉरिडोर में कथित करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले की शिकायत लेकर धमतरी के करीब 100 किसान ईओडब्ल्यु कार्यालय पहुंचे। किसानों ...और पढ़ें

By Paritosh DubeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 16 Jun 2026 09:30:34 AM (IST)Updated Date: Tue, 16 Jun 2026 09:30:34 AM (IST)
88 टुकड़ों में बांटी जमीन, करोड़ों का खेल! भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले की जांच मांगते किसान पहुंचे EOW
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर विशाखापत्तनम के बीच तैयार हो रहे राजमार्ग की प्रतीकात्मक तस्वीर। अर्काइव

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला इकोनामिक कारिडोर में कथित भूमि मुआवजा घोटाले को लेकर सोमवार को धमतरी जिले के ग्राम सिवनीकला से करीब 100 किसान आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यु) कार्यालय पहुंचे। किसानों ने दस्तावेजों, रजिस्ट्री प्रतियों, नामांतरण रिकार्ड, मुआवजा सूची और नक्शों के साथ शिकायत सौंपते हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार की जांच की मांग की।

गोपनीय जानकारी लीक कर रचा गया खेल

किसानों का आरोप है कि परियोजना की गोपनीय जानकारी लीक कर कुछ भू-माफिया और अधिकारियों ने मिलकर मूल खसरों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया, फिर परिवार और करीबियों के नाम नामांतरण कर वर्गमीटर के हिसाब से कई गुना अधिक मुआवजा लिया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि 19 मूल खसरों को 88 से अधिक हिस्सों में बांटकर शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। किसानों ने तत्कालीन राजस्व अधिकारियों, भू-अर्जन शाखा, रजिस्ट्री कार्यालय और कथित भू-माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर बैंक खातों और कॉल डिटेल की जांच कराने की मांग की है।


20 हजार की जमीन, मिला 18 लाख से ज्यादा मुआवजा

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप टकेश्वर चन्द्राकर और उसके परिवार पर लगाए गए हैं। किसानों के मुताबिक भारतमाला परियोजना का आशय पत्र जारी होने के बाद जमीन को परिवार के सदस्यों के नाम पर बांटकर मुआवजा लिया गया। आरोप है कि टकेश्वर ने अपनी पत्नी के नाम मात्र 20 हजार रुपये में जमीन की रजिस्ट्री कराई, जबकि उसी जमीन पर बाद में 18 लाख 34 हजार रुपये से अधिक का मुआवजा लिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एक ही परिवार ने अलग-अलग नामों से करोड़ों रुपये का लाभ उठाया। किसानों ने पूरे मामले में बैंक खातों, रजिस्ट्री दस्तावेज और मोबाइल काल डिटेल की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।

19 खसरों के 88 टुकड़े, वर्गमीटर खेल से बढ़ा मुआवजा

किसानों का आरोप है कि मूल कृषि भूमि को जानबूझकर 500 वर्गमीटर से कम हिस्सों में बांटा गया ताकि मुआवजा की गणना हेक्टेयर के बजाय वर्गफीट और वर्गमीटर के आधार पर हो सके। शिकायत में बताया गया कि 19 मूल खसरों को 88 से ज्यादा टुकड़ों में बांटकर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भुगतान कराया गया। किसानों ने दावा किया कि नामांतरण और बंटवारे की प्रक्रिया आशय पत्र जारी होने के कुछ ही दिनों बाद तेजी से पूरी कर ली गई, जिससे अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

नाला री-लोकेशन के नाम पर दूसरी बार मुआवजा!

कुछ खसरों का दोबारा अधिग्रहण दिखाकर नाला री-लोकेशन के नाम पर अतिरिक्त मुआवजा बांटा गया। किसानों के अनुसार 2019 में अधिग्रहित जमीन को बाद में फिर से नए अवार्ड और नई अधिसूचना के जरिए शामिल किया गया। कई खसरों में पहली और दूसरी बार अलग-अलग मुआवजा भुगतान का उल्लेख शिकायत में किया गया है। किसानों ने आरोप लगाया कि जिन जगहों को नाला रीलोकेशन बताया गया, वहां वास्तविक स्थिति में नाला दूर है।

फैक्ट फाइल

परियोजना - रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला

गांव - ग्राम सिवनीकला, तहसील कुरुद, जिला धमतरी

शिकायतकर्ता - गांव के करीब 100 किसान

आरोप - भूमि अधिग्रहण में फर्जी नामांतरण, बंटवारा और अधिक मुआवजा वितरण

मूल खसरे - 19 , बनाए गए टुकड़े 88 से अधिक

प्रभावित किसान - 232 किसान