
रायपुर(ब्यूरो)। लंदन से न खाड़ी से, अब डीजल मिलेगा बाड़ी से, इस नारे के पुरजोर प्रचार के साथ छत्तीसगढ़ में रतनजोत से डीजल बनाने के दावे किए थे, जो अब हवा हो गए हैं। हालत यह है कि राज्य में बड़े पैमाने पर झाड़ी नुमा रतनजोत के तेल देने वाले बीज का उत्पादन हो रहा है, लेकिन यहां उसे कोई पूछने वाला नहीं है। नतीजतन रतनजोत के बीज अब पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, ओडीशा, मध्यप्रदेश से लेकर राजस्थान तक के व्यापारी खरीद रहे हैं, वहां इनसे तेल निकालकर बायोडीजल बनाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक रूप से मौजूद रतनजोत का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए सरकार ने करीब 10 साल पहले 3 करोड़ से अधिक पौधे प्रदेश भर में रोपे। इनमें से आधे पौधे बचे हैं, लेकिन इनसे इतनी अधिक मात्रा में बीज निकल रहा है कि इसे यहां के व्यापारियों ने पड़ोस के चार राज्यों में बेचना शुरू कर दिया है। यह धंधा पिछले कई सालों से चल रहा है। राज्य सरकार ने इतने सालों में इस बीज से बायोडीजल बनाने के लिए न तो खुद कोई प्रयास किया और न ही प्राइवेट सेक्टर को यहां प्लांट लगाने के लिए आमंत्रित कर पाई। इस प्रोजेक्ट पर सरकार करोड़ो रूपए फूंक चुकी है।
रतनजोत का पड़ोसी राज्यों में निर्यात करने वाले व्यापारियों के मुताबिक प्रदेश में 30 हजार टन से अधिक मात्रा में रतनजोत का बीज पैदा होता है। चूंकि प्रदेश में केवल एक प्लांट है जिसकी क्षमता 3 टन प्रति दिन है। सरकार इसके लिए केवल 500 टन रतनजोत खरीदती है। बाकी रतनजोत पड़ोस के राज्यों में निर्यात करना पड़ता है।
उल्लेखनीय है कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में 100 टन रतनजोत प्रतिदिन प्रोसेसिंग करने वाले प्लांट लगे हुए हैं। इनकी ज्यादातर आपूर्ति छत्तीसगढ़ से होती है। मरवाही, पेंड्रा से लेकर राजनांदगांव, डोंगरगांव आदि के जंगली इलाकों में बड़े पैमाने पर रतनजोत के पौधे हैं। ग्रामीणों की मदद से व्यापारी इनका कलेक्शन कर ऊंचे दामों में महाराष्ट्र भेजते हैं। उड़ीसा और राजस्थान में भी कुछ कंपनियों ने इसी क्षमता का प्लांट डाला है। यही वजह है कि यहां से भी काफी मात्रा में रतनजोत की डिमांड आने लगी है।
आधा भी नहीं होता कलेक्शन
रतनजोत व्यापारियों का कहना है कि प्रदेश में इतनी अधिक मात्रा में रतनजोत प्राकृतिक रूप से पैदा होता है कि इससे प्रदेश में कई प्लांट चल सकते हैं। यहां डिमांड नहीं है इसलिए इनका कलेक्शन नहीं हो रहा है। डिमांड आएगी बीज की अच्छी कीमत मिलेगी तो गांव-गांव से हजारो टन रतनजोत के बीज निकलेंगे।
इज आफ डूइंग बिजनेस हवाहवाई
उल्लेखनीय है कि पड़ोसी राज्यों में प्लांट लगाकर कई उद्योग छत्तीसगढ़ से रतनजोत का बीज आयात कर रहे हैं लेकिन छत्तीसगढ़ आकर प्लांट लगाने को तैयार नहीं है। ऐसा तब है जब सरकार ईज आफ डूइंग बिजनेस का प्रचार कर रही है। इस पेशे से जुड़े लोगों का कहना है कि कहीं ना कहीं इसमें सरकार की पॉलिसी का दोष है जो इतनी प्रचुर मात्रा में रतनजोत होने के बावजूद यहां प्लांट नहीं लगाया जा रहा। कुछ लोगों से यहां के भ्रष्ट सिस्टम पर भी इसका दोष मढ़ा।
- छत्तीसगढ़ में रतनजोत का बंपर उत्पादन होता है। यहां से चार पड़ोसी राज्यों में रतनजोत के बीज निर्यात किए जा रहे हैं। हमने भी अपने प्लांट का विस्तार 10 टन प्रति दिन के हिसाब से करने की तैयारी की है। प्राइवेट सेक्टर के लिए जबरदस्त संभावनाएं है लेकिन अभी तक रुचि नहीं दिखाई। ऐसा तकरीबन हर औद्योगिक मामलों में हो रहा है। एसके शुक्ला, सीईओ, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण