एमपी में ब्लैकलिस्टेड कंपनी से छत्तीसगढ़ में करोड़ों की खरीदी, अमानक दवा सप्लाई के बाद भी अनुबंध जारी
मध्यप्रदेश में अमानक लैक्टुलोज दवाइयों की सप्लाई के कारण तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट की गई कंपनी यूनिकेयर इंडिया लिमिटेड से छत्तीसगढ़ में हर महीने लगभग छह करोड़ रुपये की दवाइयां खरीदी जा रही हैं। गुणवत्ता परीक्षण में तीन बैच फेल होने के बावजूद छत्तीसगढ़ दवा निगम (सीजीएमएससी) ने कंपनी के खिलाफ अब तक अनुबंध निरस्तीकरण या किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की है।
By Paritosh DubeyEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 09:28:52 AM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 09:28:52 AM (IST)
सीजीएमएससी की खरीद प्रक्रिया पर फिर उठ रहे सवाल। प्रतीकात्मक तस्वीर नईदुनिया अर्काइव नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। मध्यप्रदेश में अमानक दवाइयों की सप्लाई करने के कारण तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट की गई दवा निर्माता कंपनी यूनिकेयर इंडिया लिमिटेड से छत्तीसगढ़ में हर महीने लगभग छह करोड़ रुपये की दवाइयों की भारी-भरकम खरीदी जारी रहने का एक बड़ा मामला प्रकाश में आया है। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड ने गुणवत्ता परीक्षण में लगातार तीन बैच फेल पाए जाने के बाद इस कंपनी को प्रतिबंधित करने का कड़ा आदेश आठ मई 2026 को जारी किया था। कंपनी पर आरोप है कि उसने अस्पतालों में सप्लाई की जाने वाली लैक्टुलोज दवा के अमानक बैच उपलब्ध कराए थे।
जस का तस जारी है कंपनी से अनुबंध
इस कड़ी कार्रवाई के बावजूद छत्तीसगढ़ राज्य में इस विवादित कंपनी से 184 प्रकार की विभिन्न जीवन रक्षक दवाइयों की सप्लाई का सरकारी अनुबंध जस का तस जारी है। नियमों के मुताबिक, यदि किसी कंपनी पर दूसरे राज्य में ऐसी कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो इसकी सूचना सात दिनों के भीतर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन (सीजीएमएससी) को देना अनिवार्य होता है, लेकिन कंपनी ने यह जानकारी छिपाई। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ के दवा निगम ने अब तक कोई सार्वजनिक नोटिस जारी नहीं किया है और न ही अनुबंध निरस्त करने की कोई पहल की है। गौरतलब है कि लैक्टुलोज का उपयोग मुख्य रूप से कब्ज के इलाज के लिए किया जाता है।
मध्यप्रदेश में तीन बैच पाए गए अमानक
मध्यप्रदेश की शासकीय प्रयोगशालाओं के परीक्षण में यूनिकेयर द्वारा सप्लाई की गई इस दवा के तीन बैच (एलएलएस 1311, एलएलएस 1215 और एलएलएस 1336) "नाट आफ स्टैंडर्ड क्वालिटी" यानी अमानक पाए गए थे। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में दवाइयों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता सीधे मरीजों की जान और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राकेश गुप्ता ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है।
अलग-अलग हैं नियम
कंपनी के उपकरण सप्लाई मामले में ब्लैकलिस्ट होने की प्रारंभिक जानकारी मिली है। उन्होंने तर्क दिया कि दोनों राज्यों में ब्लैकलिस्टिंग के नियम अलग-अलग हैं और यहाँ नियमों के तहत ही दवाओं की खरीदी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
रीतेश अग्रवाल -प्रबंध संचालक (एमडी)- छत्तीसगढ़ दवा निगम