रायपुर। मूक-बधिरों को सरकारी नौकरी के लिए बेरा टेस्ट (ब्रेनस्टेम इवोक्ड रिस्पॉन्स आडियोमेट्री टेस्ट) अनिवार्य कर दिया गया है। इसका प्रमाण-पत्र सरकारी अस्पताल से ही जारी होगा। अभी तक यह सुविधा प्रदेश के मेडिकल कॉलेज अस्पतालों तक सीमित थी।
जिलों के मरीजों को सीधे अंबेडकर अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती थी। लेकिन अब राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के 9 जिलों को 15-15 लाख की बेरा मशीन उपलब्ध करवा दी है। इससे सही मरीजों की पहचान तो होगी ही, फर्जीवाड़े की आशंका पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
'नईदुनिया" ने इसे लेकर कई जिला अस्पतालों के डॉक्टर्स से बात की। नाम न छापने की शर्त पर यह स्वीकार किया कि मरीजों से पूछकर कि क्या उन्हें सुनाई नहीं देता? मरीज कहता है कि डॉक्टर साहब सुनाई नहीं देता तो मूक-बधिरता का सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता था। इसमें हम क्या कर सकते हैं।
जब आशंका होती है तो मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर करते हैं, यही विकल्प है। अब इनका मानना है कि वास्तविक मरीजों की पहचान हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य बजट से इन 9 मशीनों की खरीदी की है।
मशीन ऑपरेट करने की ट्रेनिंग जिला अस्पताल के विशेषज्ञ, तकनीशियन को करवाई जा चुकी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों, कलेक्टर और जिला पंचायतों के सीईओ को निर्देश जारी किए हैं कि वे प्रत्येक भर्ती में नि:शक्तता प्रमाण-पत्र अनिवार्य करें।
इन्हें दी गई मशीन
जिला अस्पताल बस्तर, मुंगेली, जशपुर, कांकेर, कोरबा, रायगढ़, धमतरी, बलौदाबाजार, गरियाबंद
हम कुछ इस तरह सुनते हैं
आवाज की तरंगों का अंत:कर्ण (लैबरिंथ) तक पहुंचना। अंत: कर्ण (लैबरिंथ) में इन तंरगों का संकेतों में बदलना। आठवीं मस्तिष्क तंत्रिका द्वारा तरंगों का दिमाग के सुनने वाले हिस्से में पहुंचना। इस पूरे रास्ते में कहीं भी गड़बड़ी होने से बहरापन हो सकता है।
पूरा बोझ अंबेडकर अस्पताल पर
रायपुर संभाग के सभी जिले और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में बेरा जांच के लिए लोग रायपुर अंबेडकर अस्पताल पहुंचते हैं। यहां लंबी वेटिंग के कारण लंबा इंतजार और आने-जाने में पैसा खर्च अलग से। मरीजों को कम से कम 2-3 माह बाद जांच रिपोर्ट दी जाती है। मरीज चक्कर काट-काटकर हताश हो जाते हैं। लंबे समय से सभी जिलों में बेरा मशीन लगाने की मांग उठ रही थी, अस्पताल अधीक्षकों ने खुद भी मांग की थी, जो अब पूरी हुई है।
- राज्य सरकार के बजट से अभी 9 जिलों को बेरा मशीन मुहैया करवाई गई। अन्य जिलों में भी जांच सुविधा हो, इसके लिए मशीनें खरीदी जाएंगी। - रानू साहू, संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं