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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Speed Governer In Vehicles: प्रदेश में भारी वाहनों की अनियंत्रित गति पर लगेगा ब्रेक

Speed Governer In Vehicles: भारी वाहनों में लगेगा गति नियंत्रक उपकरण। न लगवाने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन होगा निरस्त, चालानी कार्रवाई भी होगी।

By Shashank.bajpaiEdited By: Shashank.bajpai
Publish Date: Sat, 11 Sep 2021 03:03:00 PM (IST)Updated Date: Sat, 11 Sep 2021 03:03:56 PM (IST)
Speed Governer In Vehicles: प्रदेश में भारी वाहनों की अनियंत्रित गति पर लगेगा ब्रेक

रायपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Speed Governer In Vehicles: प्रदेश में भारी वाहनों की गति पर अब ब्रेक लगेगा, क्योंकि परिवहन विभाग भारी वाहनों में गति नियंत्रक उपकरण (स्पीड लिमिट डिवाइस) लगाने की शुरुआत करने जा रहा है। उपकरण लगने के बाद भारी वाहनों की स्पीड लिमिट तय हो जाएगी। वाहन चालक चाहकर भी वाहन की गति को रफ्तार नहीं दे सकेगा। उपकरण न लगाने वाले भारी वाहनों का फिटनेस जारी नहीं किया जाएगा।

इसके बाद भी यदि भारी वाहन बिना उपकरण के सड़क पर परिवहन करते पकड़े गए तो चालानी कार्रवाई के साथ-साथ वाहन का रजिस्ट्रेशन भी रद कर दिया जाएगा। इससे सड़क होने वाले हादसों पर अंकुश लगेगा। परिवहन विभाग का कहना है कि गति नियंत्रक उपकरण जल्द ही भारी वाहनों में लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।


ज्ञात हो कि प्रदेश में तकरीबन 60 लाख छोटे-बड़े वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

इनमें बहुत सारी बसों और ट्रकों में गति नियंत्रक उपकरण नहीं लगा है, जबकि नियम है कि भारी वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य है, लेकिन वाहन चालक फिटनेस के दौरान स्पीड गवर्नर का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर आरटीओ कार्यालय में जमा करते हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते वाहनों की जांच नहीं होती और फिटनेस प्रमाण पत्र आसानी से जारी हो जाता था।

बिना स्पीड गर्वनर के फर्राटे भर रहे भारी वाहनों से अक्सर सड़क हादसे हो रहे हैं। प्रदेश भर में एक साल में करीब पांच हजार लोग सड़क हादसे में अपनी जान गंवा चुके हैं। इस पर कंट्रोल करने के लिए परिवहन विभाग ने वाहनों में गति नियंत्रण उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है।

वाहन नामक साफ्टवेयर से रहेगा जुड़ा

गति नियंत्रण उपकरण परिवहन विभाग के एम वाहन नामक साफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। फिटनेस के लिए परिवहन कार्यालय आने वाले वाहनों की जांच की जाएगी। वाहन में उपकरण नहीं होने की स्थिति में साफ्टवेयर पकड़ लेगा। उपकरण लगाने के बाद ही गाड़ी का फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। परिवहन विभाग द्वारा एम-वाहन एप के साथ ही क्यूआर कोड भी शुरू किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा जारी की जाने वाला फिटनेस प्रमाण पत्र पर क्यूआर कोड रहेगा। एम-वाहन नामक एप से क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वाहन की पूरी कुंडली दिख जाएगी।

समय पर फिटनेस न कराने वालों पर कार्रवाई

परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार परमिट वाली बसों को हर साल फिटनेस जांच कराना अनिवार्य है, लेकिन टैक्स बचाने के लिए भारी वाहन संचालक न तो यातायात पुलिस के जांच शिविर वाहन भेजते हैं और न ही आरटीओ दफ्तर में जांच करवाते हैं। समय पर गाड़ियों की मरम्मत नहीं करवाने की वजह से आए दिन बसें दुर्घटनाग्रस्त हो रही हैं। कंडम वाहनों की सख्ती से जांच करने पर निश्चित रूप से सड़क हादसों में कमी आएगी। विभाग के अधिकारी का कहना है कि निर्धारित समय पर फिटनेस की जांच न कराने वालों पर भी सख्ती बरती जाएगी।

वर्जन

सड़क पर ओवर स्पीड की वजह से सड़क हादसे हो रहे हैं। वाहनों की गति को कम करने के लिए अब स्पीड लिमिट डिवाइस अनिवार्य कर दिया गया है। स्पीड लिमिट डिवाइस लगाने वाले वाहनों का ही फिटनेस जारी होगा।

- दीपांशु काबरा, अपर परिवहन आयुक्त, छत्तीसगढ़