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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 13, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गांवों में खेती की जमीन पर भी प्लॉटिंग कर सकेंगे बिल्डर

छत्तीसगढ़ के गांवों में खेती की जमीन पर भी बिल्डर अब आसानी से प्लॉटिंग कर सकेंगे।

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Publish Date: Tue, 13 Oct 2015 04:00:51 AM (IST)Updated Date: Tue, 13 Oct 2015 12:54:16 PM (IST)
गांवों में खेती की जमीन पर भी प्लॉटिंग कर सकेंगे बिल्डर

भोलाराम सिन्हा/रायपुर। छत्तीसगढ़ के गांवों में खेती की जमीन पर भी बिल्डर अब आसानी से प्लॉटिंग कर सकेंगे। कृषि भूमि को आवासीय करने के नियम में राज्य सरकार जल्द ही बदलाव करने जा रही है। इस बदलाव के बाद गांव की कृषि भूमि में आवासीय कॉलोनी विकसित की जा सकेगी।

अब तक बिल्डर गांवों में खेती की जमीन पर अवैध प्लॉटिंग करते रहे हैं। ऐसे अवैध प्लॉट खरीदकर कई लोग बिल्डरों के चंगुल में फंस चुके हैं। इस तरह की अवैध प्लॉटिंग पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ ग्राम पचांयत (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निर्बंधन तथा शर्तें) नियम 1999 में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन का प्रारूप तैयार कर लिया गया और उस पर प्रभावित लोगों से आपत्ति व सुझाव भी मांगे गए हैं।


आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नए प्रावधान के तहत पंजीकृत सहकारी समिति या कॉलोनाइजर ग्राम पंचायतों में कृषि भूमि पर आवासीय कॉलोनी विकसित कर सकेंगे। साथ ही कृषि भूमि में आवासीय, गैर-आवासीय या समूह आवास (ग्रुप हाउसिंग) का निर्माण कर उसे बेच भी सकेंगे।

हालांकि कॉलोनी बसाने के लिए कॉलोनाइजर को सड़क, बिजली, पार्किंग, गंदे पानी की निकासी, पेयजल व्यवस्था, गार्डन सहित केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कॉलोनी निर्माण संबंधी मापदंडों को पूरा करना होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मापदंडों के अनुसार गंदे पानी के उपचार के लिए संयंत्र भी स्थापित करना पड़ेगा, जहां उपचार की व्यवस्था किया जाना है।

वहां कॉलोनाइजर, ग्राम पंचायत कोष में कॉलोनी के क्षेत्रफल के अनुसार एक लाख रुपए प्रति हेक्टेयर प्रतिभूमि राशि, अनुमति शुल्क के साथ जमा करेगा। प्रतिभूमि राशि सक्षम प्राधिकारी व ग्राम पंचायत के संयुक्तत खाते में रखी जाएगी। उपचार व्यवस्था होने के बाद प्रतिभूति राशि लौटाई जाएगी।

एक लाख की बैंक गारंटी

कॉलोनाईजर को पंजीयन के लिए आवेदन के साथ सक्षम प्राधिकारी के पक्ष में बैंक गारंटी देना आवश्यक है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में बैंक गारंटी रजिस्ट्रीकरण की संपूर्ण अवधि के लिए एक लाख रुपए निर्धारित है। सहकारी गृह निर्माण समितियों को आवेदन के साथ बैंक गारंटी देना आवश्यक नहीं है।

आवेदन मंजूर होने पर रजिस्ट्रीकरण प्रमाण-पत्र तभी जारी नहीं किया जाएगा जब बैंक गारंटी 90 दिनों के भीतर जमा होगी। इसके अलावा रजिस्ट्रीकरण शुल्क दस हजार रुपए व नवीनीकरण शुल्क पांच हजार रुपए की राशि देनी होगी।

गरीबों के लिए भूमि या आवास आरक्षित

आवासीय कॉलोनी में आर्थिक रूप से कमजोर या निम्न आय वर्ग के लिए भूमि, भूखंड या मकान-फ्लैट का हस्तांतरण व आरक्षण करना होगा। कॉलोनी के कुल क्षेत्रफल की 15 प्रतिशत भूमि कॉलोनाइजर द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए हस्तांतरित की जाएगी। कॉलोनाइजर प्रस्तावित भूमि का नक्शा व आवेदन के साथ शपथ-पत्र भी देगा।

प्रस्तावित भूमि उपयुक्त नहीं पाए जाने पर कॉलोनाइजर वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराएगा और उसे स्वयं के खर्च पर विकसित करने का वचन देगा। कॉलोनाइजर सहमति पत्र प्राप्त करने के पहले कॉलोनी का विकास कार्य प्रारंभ नहीं करेगा। प्रस्तावित भूमि आवासीय कॉलोनी की सीमा से एक किमी के भीतर होगी और उसका प्रयोजन मास्टर प्लान में आवासीय होगा। प्रस्तावित भूमि तक वैधानिक पहुंच मार्ग भी जरूरी है।

सेवानिधि में शुल्क भुगतान का विकल्प

भूमि के मूल्य की राशि का भुगतान कॉलोनाइजर को करने के बाद जमीन हस्तांरण विलेख का निष्पादन तथा पंजीकरण किया जाएगा। इसके बाद नगरीय निकाय, विकास प्राधिकरण या हाउसिंग बोर्ड को गरीबों के लिए प्रस्तावित भूमि आवंटित की जाएगी। कॉलोनी का निर्माण छोटे भू-भाग, जिसका कुल क्षेत्रफल एक एकड़ से कम हो तो कॉलोनाइजर गरीबों की सेवा निधि में शुल्क के भुगतान का विकल्प चुन सकता है।

भवन या फ्लैट्स में मूलभूत सुविधाएं आवश्यक

निर्मित भवन या फ्लैट्स आरक्षित रखने का भी प्रावधान है। प्रत्येक भवन या फ्लैट का निर्मित क्षेत्रफल 400 वर्गफुट से कम तथा 500 वर्गफुट से अधिक नहीं होगा। पेयजल, बिजली, भूमिगत जल निकासी व शौचालय की व्यवस्था होनी चाहिए। छह माह के भीतर भूमि या भवन विक्रय नहीं होने पर सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बाद कॉलोनाइजर आरिक्षत भूमि या भवन किसी को भी बेच सकेगा।

चयन समिति भी

निम्न आय वर्ग के लोगों की पहचान के लिए सक्षम प्राधिकारी की अध्यक्षता में चयन समिति गठित की जाएगी, जिसमें सरपंच, ग्राम पंचायत सचिव व जनपद पंचायत के सीईओ शामिल रहेंगे। निम्न आय वर्ग के सदस्य को किसी भी कॉलोनी में एक से अधिक आवास खरीदने की पात्रता नहीं होगी। प्रत्येक कॉलोनाइजर सीधे या किसी एजेंट के माध्यम से भूखंड, भवन या फ्लैट के विक्रय पर क्रेता से भुगतान प्राप्त करने के पूर्व अनुबंध करेगा।

प्रदेश के गांवों में कॉलोनाइजरों के माध्यम से आवासीय कॉलोनी विकसित करने की योजना है। इसके लिए छत्तीसगढ़ ग्राम पचांयत (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण निर्बंधन तथा शर्तें) नियम 1999 में संशोधन किया जा रहा है। प्रस्ताव पर आपत्ति व सुझाव भी मांगे गए हैं। विकसित कॉलोनियों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए कुल क्षेत्रफल की 15 फीसदी भूमि के साथ ही मकान या फ्लैट आरक्षित किए जाएंगे। - एमके राउत, अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग

गांवों में आवासीय कॉलोनी बनाने के नाम पर किसानों की जमीन छीनने की साजिश की जा रही है। खेती की जमीन हाउसिंग के नाम पर दिए जाने से छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य पर गलत असर पड़ेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी चरमरा जाएगी। वैसे भी औद्योगिकीकरण के चलते कृषि का रकबा लगातार घट रहा है। प्रदेश में भूमि उपयोग बोर्ड बनाने पर भी शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए। - गौतम बंधोपाध्याय, संयोजक, नदीघाटी मोर्चा