
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण के दौर में ऑनलाइन लेन-देन और व्यापार का दायरा जितना बढ़ा है, साइबर ठगों की सक्रियता भी उतनी ही बढ़ गई है। साइबर जालसाज रोज नए हथकंडे अपनाकर व्यापारियों और नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने विशेष डिजिटल सुरक्षा अभियान शुरू किया है।
बॉम्बे मार्केट स्थित चौ. देवीलाल व्यापार उद्योग भवन में आयोजित जागरूकता कार्यशाला में पुलिस अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने व्यापारियों को ठगी से बचाव और त्वरित कार्रवाई के महत्वपूर्ण गुर सिखाए। चेंबर अध्यक्ष सतीश थौरानी ने कहा कि तकनीक के विस्तार के साथ साइबर ठगों के पैंतरे भी लगातार बदल रहे हैं, इसलिए व्यापारियों को स्वयं सतर्क रहने के साथ-साथ अपने परिजनों और कर्मचारियों को भी तकनीकी रूप से जागरूक करना होगा।
रायपुर के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (क्राइम एंड साइबर) गौरव मंडल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की साइबर या यूपीआई ठगी में वारदात के तुरंत बाद के शुरुआती 10 मिनट सबसे अहम साबित होते हैं। यह समय पीड़ित के लिए 'गोल्डन ऑवर' की तरह होता है।
खाते से अनधिकृत रूप से रकम निकलते ही घबराने के बजाय तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। इसके तुरंत बाद संबंधित बैंक को सूचना देकर लेन-देन को फ्रीज या रुकवाने की प्रक्रिया शुरू कराएं। इसके अलावा ट्रांजेक्शन आईडी, संदिग्ध मोबाइल नंबर, मैसेज, स्क्रीनशॉट और लिंक के डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें, जिससे पुलिस को कार्रवाई करने और राशि वापस दिलाने में मदद मिल सके।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सोनाली गुहा ने डिजिटल पेमेंट के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि क्यूआर कोड स्कैन करने और यूपीआई पिन डालने से पहले यह जांचना जरूरी है कि आप भुगतान कर रहे हैं या प्राप्त। पैसा प्राप्त करने के लिए कभी भी पिन डालने या अनजान व्यक्ति के कहने पर क्यूआर कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके साथ ही दुकान या किसी परिचित के नाम से बने फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल से पैसे मांगे जाने पर वीडियो कॉल के जरिए पहचान की पुष्टि करें। किसी भी अनजान लिंक या मुफ्त उपहार वाले प्रलोभनों से हमेशा दूर रहें।
बिजनेस ई-मेल हैकिंग से बचाव के लिए व्यापारियों को हिदायत दी गई कि किसी भी पार्टी को बड़ा भुगतान करने से पहले केवल ई-मेल पर भरोसा न करें। रकम ट्रांसफर करने से पहले संबंधित व्यक्ति को फोन कर बैंक खाते और इनवॉइस का मौखिक सत्यापन अवश्य करें। व्यावसायिक ई-मेल में टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखें और हर कंप्यूटर सिस्टम के लिए अलग व मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें।
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त गौरव मंडल ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि पुलिस उनकी सुरक्षा और मदद के लिए पूरी तरह तत्पर है। उन्होंने व्यापारिक संगठनों के समन्वय से साइबर हेल्पडेस्क को और अधिक सक्रिय व सुदृढ़ करने की बात कही। इसके साथ ही दुकानों में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे लगाने की सलाह दी गई। इस कार्यशाला में चेंबर पदाधिकारियों सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।