
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के सीमावर्ती घने जंगलों में सक्रिय संगठित बाघ शिकारियों और तस्करों के नेटवर्क की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई है। राज्य शासन के गृह विभाग ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना के सदस्यों का क्षेत्राधिकार पूरे प्रदेश में विस्तारित करते हुए औपचारिक सहमति पत्र जारी कर दिया है। यह कदम कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल और इंद्रावती टाइगर रिजर्व में दर्ज गंभीर वन अपराधों की तह तक जाने के लिए उठाया गया है। जांच एजेंसियों को अंदेशा है कि यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी से भी जुड़ा हो सकता है।
हाल ही में कांकेर, बीजापुर और इंद्रावती टाइगर रिजर्व के जंगलों से तीन बाघों की दुर्लभ खालें बरामद की गई थीं। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक नौ मुख्य आरोपितों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इस प्रकरण में लापरवाही और मिलीभगत बरतने वाले विभागीय कर्मचारियों पर भी बर्खास्तगी की गाज गिरी है। मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब प्रारंभिक जांच में महाराष्ट्र पुलिस की विशेष शाखा के एक सिपाही और एक प्रमुख पुलिस मुखबिर के इस तस्करी नेटवर्क में सक्रिय होने के पुख्ता सबूत मिले।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, तस्करों का यह संजाल महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना तक फैला हुआ है। अंतरराज्यीय सीमा और पुलिस तंत्र से जुड़े लोगों की मौजूदगी के कारण स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच संभव नहीं थी। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में बाघों की कुल संख्या केवल 35 बची है। ऐसी गंभीर स्थिति में दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व को बचाने और इस संगठित सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए सीबीआई जांच को बेहद जरूरी माना गया है।