
जितेंद्र सिंह दहिया, रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रसव के दौरान सिजेरियन ऑपरेशन का अनुपात बढ़ा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के अनुसार राज्य में हुए प्रसव में 20 प्रतिशत प्रसव ऑपरेशन से हुए हैं। चार साल पहले हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में यह अनुपात 15.2 प्रतिशत था। यानी 4.8 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।
निजी और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच अंतर सबसे अधिक है। निजी संस्थानों में हुए प्रसव में 64.9 प्रतिशत ऑपरेशन से हुए, जबकि सरकारी संस्थानों में यह अनुपात 12.2 प्रतिशत रहा। यानी निजी संस्थानों में ऑपरेशन की दर सरकारी संस्थानों से करीब 5.3 गुना है।
पहले यह दर निजी में 57 और सरकारी में 8.9 प्रतिशत थी। सर्वेक्षण यह नहीं बताता कि इनमें कितने ऑपरेशन चिकित्सकीय रूप से जरूरी थे। इसलिए केवल इन आंकड़ों के आधार पर अनावश्यक ऑपरेशन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
यदि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में एक हजार प्रसव हों तो 64.9 प्रतिशत के हिसाब से करीब 649 प्रसव ऑपरेशन से होंगे। सरकारी संस्थानों में एक हजार प्रसव होने पर 12.2 प्रतिशत के हिसाब से करीब 122 प्रसव ऑपरेशन से होंगे। यानी दोनों में 527 प्रसव का अंतर है।
निजी संस्थानों में ऑपरेशन की दर सरकारी संस्थानों की तुलना में करीब 5.3 गुना है। राज्य के सभी स्वास्थ्य संस्थानों को मिलाकर एक हजार प्रसव में करीब 200 ऑपरेशन होंगे। चार साल पहले यह संख्या करीब 152 प्रति एक हजार प्रसव थी। यानी हर एक हजार प्रसव पर करीब 48 अधिक ऑपरेशन दर्ज हुए।
राज्य में अस्पताल या स्वास्थ्य संस्थान में होने वाले प्रसव का अनुपात 85.7 प्रतिशत से बढ़कर 86.9 प्रतिशत हुआ है। सरकारी संस्थानों में होने वाले प्रसव का अनुपात 70 प्रतिशत से घटकर 69.1 प्रतिशत रहा। प्रसव के दौरान कुशल स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी 88.8 से घटकर 88.6 प्रतिशत हुई।
वहीं गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार जांच कराने वाली महिलाओं का अनुपात 60.4 से बढ़कर 68.8 प्रतिशत हुआ। गर्भावस्था में 180 दिन या उससे अधिक समय तक आयरन-फोलिक अम्ल की गोलियां लेने वाली महिलाओं का अनुपात भी 26.3 से बढ़कर 48.5 प्रतिशत हुआ।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में देश में कुल सिजेरियन प्रसव का अनुपात 27.2 प्रतिशत दर्ज हुआ है। छत्तीसगढ़ में यह 20 प्रतिशत है। यानी राज्य की दर देश की तुलना में 7.2 प्रतिशत अंक कम है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में देश की दर 21.5 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ की 15.2 प्रतिशत थी।
जम्मू-कश्मीर (42.5%), पंजाब (39.8%), हिमाचल प्रदेश (29.4%) और दिल्ली (25.1%) जैसे राज्यों में सिजेरियन प्रसव की दर बहुत अधिक दर्ज की गई है। वहीं, पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश (14.9%) और उत्तर प्रदेश (14.5%) में यह दर छत्तीसगढ़ के समकक्ष है, जबकि बिहार (13.2%) में यह सबसे कम दर्ज हुई है। रिपोर्ट में सबसे बड़ा अंतर सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों के बीच देखा गया है।
एक हजार प्रसव को आधार मानें तो राज्य में करीब 200 प्रसव ऑपरेशन से होते हैं। निजी संस्थानों में यह संख्या 649 और सरकारी संस्थानों में 122 है। यानी निजी और सरकारी संस्थानों में एक-एक हजार प्रसव मानने पर 527 ऑपरेशन का अंतर दिखता है।
छत्तीसगढ़ में सिजेरियन प्रसव: 20 प्रतिशत
पिछले सर्वेक्षण में: 15.2 प्रतिशत
बढ़ोतरी: 4.8 प्रतिशत अंक
निजी संस्थानों में: 64.9 प्रतिशत
सरकारी संस्थानों में: 12.2 प्रतिशत
निजी-सरकारी अंतर: 52.7 प्रतिशत अंक
निजी दर: सरकारी से करीब 5.3 गुना
जम्मू-कश्मीर: 42.5 प्रतिशत
पंजाब: 39.8 प्रतिशत
हिमाचल प्रदेश: 29.4 प्रतिशत
दिल्ली: 25.1 प्रतिशत
मध्य प्रदेश: 14.9 प्रतिशत
उत्तर प्रदेश: 14.5 प्रतिशत
बिहार: 13.2 प्रतिशत
संस्थागत प्रसव: 86.9 प्रतिशत
देश में सिजेरियन प्रसव: 27.2 प्रतिशत