
डिजिटल डेस्क, रायपुर। रायपुर के नकटी स्थित ब्लू वॉटर खदान में एक बार फिर दर्दनाक हादसा हुआ। 24 वर्षीय आदिल खान का शव करीब 77 घंटे की तलाश के बाद पानी की सतह पर तैरता मिला। SDRF और NDRF की टीमों ने लगातार तीन दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मामले में भारतीय नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद लेने का भी फैसला किया था।
'ब्लू वॉटर' रायपुर के माना क्षेत्र में नकटी गांव के पास स्थित पुरानी खदान है। समय के साथ इसमें पानी भर गया और यह झील जैसी नजर आने लगी। चमकीले नीले पानी और लाल चट्टानों के कारण यह स्थान सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुआ है।
दूर से यह जगह जितनी शांत और खूबसूरत दिखाई देती है, इसके भीतर खतरे उतने ही गंभीर बताए जाते हैं। खदान की गहराई करीब 300 से 400 फीट तक बताई जाती है।
ब्लू वॉटर को सामान्य झील समझना खतरनाक हो सकता है। पानी की ऊपरी सतह शांत दिखाई देती है, लेकिन गहरे हिस्सों में पानी का तापमान काफी कम रहता है। इसके अलावा वहां भंवर और अचानक बढ़ती गहराई भी परेशानी का कारण बन सकती है।
पानी की वास्तविक गहराई का अनुमान आसानी से नहीं लगाया जा सकता। इसके बावजूद कुछ लोग तैरने या रोमांच के लिए पानी में उतर जाते हैं। यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित होती है।
ब्लू वॉटर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल होने के कारण यहां लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। बड़ी संख्या में युवा घूमने और वीडियो बनाने के लिए खदान क्षेत्र तक पहुंचते हैं। इस दौरान कई लोग सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए पानी के बेहद करीब चले जाते हैं।
लगातार हादसों को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में प्रवेश और पानी में उतरने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके बावजूद लोग नियमों की अनदेखी कर यहां पहुंच रहे हैं।
आदिल खान की मौत ने एक बार फिर ब्लू वॉटर खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद लोगों की आवाजाही जारी है। ऐसे में प्रशासन के प्रतिबंध, सुरक्षा इंतजाम और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।