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रायपुर में करोड़ों का GST फर्जीवाड़ा: चाय वाले, मजदूर और मृत व्यक्ति के नाम पर 10 फर्जी फर्में, अमन अग्रवाल पर FIR दर्ज

रायपुर में दूसरों के नाम और फर्जी दस्तावेजों से फर्म बनाकर करोड़ों का कारोबार दिखाने का मामला सामने आया है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 03:14:20 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 03:33:17 PM (IST)
रायपुर में करोड़ों का GST फर्जीवाड़ा: चाय वाले, मजदूर और मृत व्यक्ति के नाम पर 10 फर्जी फर्में, अमन अग्रवाल पर FIR दर्ज
रायपुर में 10 फर्जी फर्मों से करोड़ों का फर्जीवाड़ा उजागर

HighLights

  1. चाय ठेले वाले, मजदूर के नाम पर करोड़ों का कारोबार दिखाया
  2. फर्जी दस्तावेजों से 16 करोड़ तक की खरीद और ITC का खेल
  3. मृत व्यक्ति फूल सिंह के नाम पर बनाया गया किरायानामा

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। दूसरों के नाम और फर्जी दस्तावेजों से फर्में बनाकर करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाने का मामला सामने आया है। राज्य जीएसटी विभाग की जांच के बाद मेसर्स अगस्त्य इंटरप्राइजेस के प्रोपराइटर अमन कुमार अग्रवाल के खिलाफ तेलीबांधा थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।

विभाग का कहना है कि अमन ने 10 ऐसी फर्में बनाईं, जो या तो मौके पर चल ही नहीं रही थीं या जिनके नाम पर कारोबार करने वाले लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। इन फर्मों से खरीद दिखाकर अगस्त्य इंटरप्राइजेस में बड़ी रकम का इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया।


जांच के दौरान जीएसटी विभाग ने इन फर्मों के पते पर जाकर पड़ताल की। कई जगह फर्म नहीं मिली। जिन लोगों के नाम पर फर्में दर्ज थीं, उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने संबंधित कारोबार करने से इनकार कर दिया। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि जीएसटी में दर्ज बैंक खाता उनका नहीं है।

मृत व्यक्ति के नाम पर बनाया किरायानामा

हुसैनी इंटरप्राइजेस के नाम से गरियाबंद में फर्म दर्ज थी। जांच में पता चला कि किरायानामे में मकान मालिक के रूप में फूल सिंह का नाम था। विभाग के अनुसार फूल सिंह की वर्ष 2010 में मृत्यु हो चुकी थी, जबकि किरायानामा 21 मार्च 2025 का बनाया गया था। फर्म के प्रोपराइटर मोहम्मद इस्लाम ने भी कारोबार और बैंक खाते से अनजान होने की बात कही। इस फर्म से अगस्त्य इंटरप्राइजेस को 16.61 करोड़ रुपये की खरीद-बिक्री और 2.99 करोड़ रुपये का आईटीसी दिखाया गया।

इलेक्ट्रिशियन, मजदूर के नाम पर करोड़ों का कारोबार

यूनिक इंटरप्राइजेस के नाम पर 11.61 करोड़ का कारोबार और 2.08 करोड़ रुपये का आईटीसी दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर मजहर खान ने बताया कि वे इलेक्ट्रिशियन हैं और इस कारोबार से उनका कोई संबंध नहीं है। अंसारी ट्रेडर्स के नाम पर 30.71 करोड़ का कारोबार और 5.52 करोड़ रुपये का आईटीसी दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर एफजल अंसारी ने बताया कि वे पार्किंग में नौकरी करते हैं और अमन अग्रवाल को नहीं जानते।

चाय ठेले वाले के नाम पर 22 करोड़ का कारोबार

विकास यदु के नाम से अगस्त इंटरप्राइजेस बनाई गई। विभाग के अनुसार इस फर्म से 22.47 करोड़ का कारोबार और 4.04 करोड़ रुपये का आईटीसी दिखाया गया। विकास ने बताया कि वह पहले चाय का ठेला लगाता था। इसी तरह ललित ट्रेड लिंक से 29.72 करोड़ का कारोबार और 5.17 करोड़ रुपये का आईटीसी दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर ललित सोनी ने बताया कि वे पिछले तीन वर्ष से नौकरी कर रहे हैं।

दिहाड़ी मजदूर के नाम पर 17 करोड़ का कारोबार

विनायक वेंचर्स के नाम पर 17.95 करोड़ का कारोबार और 1.36 करोड़ रुपये का आईटीसी दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर प्रताप सिंह वर्मा ने बताया कि वे दिहाड़ी मजदूर हैं। महावीर इंटरप्राइजेस के नाम पर 12.67 करोड़ का कारोबार और 2.27 करोड़ रुपये का आईटीसी दिखाया गया। इसके प्रोपराइटर महेश फकीरा सोनी ने बताया कि वे सफाईकर्मी हैं।

फर्जी दस्तावेजों से फर्म बनाने का आरोप

जीएसटी विभाग के अनुसार जांच में कई फर्मों के पते पर कारोबार नहीं मिला। कुछ किरायानामों में संबंधित लोगों के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए। वहीं फर्मों के नाम पर दर्ज बैंक खातों को भी संबंधित लोगों ने अपना नहीं बताया। विभाग ने इसे फर्जी दस्तावेजों के जरिये कारोबार दिखाकर टैक्स का लाभ लेने का मामला माना है। पुलिस ने अमन अग्रवाल के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।