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छत्तीसगढ़ में बदली बिजली बिल की व्यवस्था... नया टैरिफ ऑर्डर जारी, अब रोज के हिसाब से लगेगा जुर्माना

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का नया टैरिफ ऑर्डर जारी कर दिया है। इस बार आयोग ने केवल बिजली की दरों में ही स...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 15 Jun 2026 08:42:55 PM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jun 2026 08:42:55 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में बदली बिजली बिल की व्यवस्था... नया टैरिफ ऑर्डर जारी, अब रोज के हिसाब से लगेगा जुर्माना
छत्तीसगढ़ में बदली बिजली बिल की व्यवस्था (ये इमेज एआई से बनाई गई है)

HighLights

  1. अब महज कुछ दिन बिल लेट होने पर पूरे महीने का भारी जुर्माना नहीं लगेगा
  2. एडवांस भुगतान और प्रीपेड मीटर रीचार्ज पर मिलने वाली छूट को आयोग ने घटाया
  3. स्ट्रीट लाइट अब घरेलू दर पर चलेंगी; बिना सब्सिडी वाले कृषि पंपों पर छूट बढ़ी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (सीएसईआरसी) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का नया टैरिफ ऑर्डर जारी कर दिया है। इस बार आयोग ने केवल बिजली की दरों में ही संशोधन नहीं किया है, बल्कि बिलिंग और पेनल्टी सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है जो राज्य में पहली बार लागू होने जा रहा है।

इस नए फैसले के तहत अब बिजली बिल देरी से पटाने वाले उपभोक्ताओं पर भारी-भरकम पेनल्टी का बोझ नहीं पड़ेगा। आगामी 1 जुलाई, 2026 से राज्य में छत्तीसगढ़ बिजली के नए नियमों के तहत 'लेट पेमेंट पर अब फ्लैट रेट नहीं, प्रतिदिन का मीटर' वाली नई पारदर्शी व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।


जानिए क्या है 'प्रतिदिन का मीटर' और कैसे बचेगा आपका पैसा?

अब तक छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण कंपनी (सीएसपीडसीएल) का यह नियम था कि यदि कोई उपभोक्ता अपनी नियत तिथि (ड्यू डेट) तक बिजली बिल का भुगतान नहीं कर पाता था, तो उस पर सीधे 1.5% प्रति माह की दर से विलंबित भुगतान अधिभार (डेले पेमेंट सरचार्ज) ठोक दिया जाता था।

  • पुरानी व्यवस्था का नुकसान: यदि आपका बिल 10 तारीख को ड्यू था और आपने उसे महज 2 दिन की देरी से यानी 12 तारीख को पटाया, तब भी आपसे पूरे 30 दिनों का (यानी पूरे महीने का) फ्लैट 1.5% जुर्माना वसूला जाता था। यह व्यवस्था आम जनता के साथ एक तरह से नाइंसाफी थी।

  • पहली बार लागू नई व्यवस्था: नियामक आयोग ने जनहित में इस नियम को हमेशा के लिए बदल दिया है। अब फ्लैट रेट की जगह 0.04% प्रति दिन (पर डे) के हिसाब से जुर्माना तय किया गया है। यानी अब आपका पेनल्टी मीटर रोज के हिसाब से चलेगा। अगर आप सिर्फ 2 दिन लेट हुए हैं, तो आपको केवल 2 दिन का ही चार्ज देना होगा, पूरे महीने का नहीं।
  • डिजिटल पेमेंट करने वालों को लगा झटका, इंसेंटिव में कटौती

    एक तरफ जहां लेट पेमेंट करने वालों को आयोग ने बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ एडवांस और डिजिटल पेमेंट के जरिए छूट का लाभ उठाने वाले जागरूक उपभोक्ताओं को इस बार थोड़ा झटका लगा है। बिजली कंपनी के राजस्व को संतुलित करने के लिए आयोग ने रियायतों (इंसेंटिव्स) में पहली बार कटौती की है...

    • अग्रिम भुगतान (एडवांस पेमेंट) पर कैंची: जो उपभोक्ता अपने बिजली बिल का एडवांस भुगतान करते थे, उन्हें मिलने वाली 1.25% की छूट को अब घटाकर सीधे 0.75% कर दिया गया है।
    • प्रीपेड मीटर रीचार्ज पर भी असर: घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने और उसे रीचार्ज करने पर मिलने वाली 1.5% की इंसेंटिव छूट को भी आयोग ने घटाकर अब 1% पर ला दिया है।

    बिजली दरों का नया गणित: 100 से 500 यूनिट पर अब कितना आएगा बिल?

    नियामक आयोग ने बिजली वितरण कंपनी के 24 प्रतिशत बढ़ोतरी के भारी-भरकम प्रस्ताव को खारिज करते हुए केवल 6.23 प्रतिशत की औसत वृद्धि को ही हरी झंडी दी है। घरेलू उपभोक्ताओं (एलवी-1) के लिए ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। नीचे दिए गए विवरण से समझिए कि अब आपकी मासिक खपत पर नया बिल कितना बनेगा...

    • 100 यूनिट की खपत: यदि आपके घर का मासिक खर्च 100 यूनिट है, तो पहले ₹4.10 की दर से ऊर्जा प्रभार ₹410 आता था। अब नई दर ₹4.40 होने से यह ₹440 आएगा (यानी केवल ₹30 का अंतर)।
    • 200 यूनिट की खपत: क्रमिक टैरिफ (टेलीस्कोपिक टैरिफ) के अनुसार, 200 यूनिट खपत होने पर अब कुल ऊर्जा प्रभार ₹890 बनेगा। पुरानी दरों के मुकाबले इसमें ₹60 प्रति माह की वृद्धि होगी।
    • 300 यूनिट की खपत: जिन घरों में कूलर या एसी चलते हैं और खपत 300 यूनिट तक जाती है, उनका नया ऊर्जा बिल अब ₹1,490 आएगा, जो पहले से ₹100 अधिक है।
    • 500 यूनिट की खपत: बड़ी खपत वाले घरों में 500 यूनिट बिजली जलने पर नया बिल ₹2,790 का बनेगा। इन उपभोक्ताओं की जेब पर सीधे ₹180 प्रति माह का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

    (नोट: इस गणना में फिक्स चार्ज, सरकारी ड्यूटी और उपकर शामिल नहीं हैं, जो अंतिम बिल में अलग से जुड़ेंगे। राहत की बात यह है कि 5 किलोवाट तक के लोड पर फिक्स चार्ज ₹20 प्रति किलोवाट पर ही स्थिर रखा गया है।)

    आदेश की अन्य बड़ी बातें: स्ट्रीट लाइट और किसानों को बड़ा फायदा

    इस नए टैरिफ ऑर्डर में कुछ अन्य बेहद महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए हैं, जो व्यवस्था को पहली बार एक नया रूप दे रहे हैं...

    • स्थानीय निकायों को बड़ी बचत: इतिहास में पहली बार नगर निगमों, नगर पालिकाओं और छत्तीसगढ़ आवास बोर्ड की कॉलोनियों की स्ट्रीट लाइट तथा सार्वजनिक जल आपूर्ति (पब्लिक वॉटर वर्क्स) के टैरिफ को ‘गैर-घरेलू’ (एलवी-2) से हटाकर सीधे ‘घरेलू उपभोक्ता‘ (एलवी-1) श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे सरकारी निकायों का बिजली खर्च आधा हो जाएगा।
    • किसानों के लिए बड़ा सुरक्षा कवच: गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप कनेक्शन का उपयोग करने वाले किसानों को मिलने वाली छूट को एक झटके में 30% से बढ़ाकर सीधे 40% कर दिया गया है, जो अब तक की सबसे बड़ी एकमुश्त राहत है।
    • आदिवासी क्षेत्रों की रियायतें बरकरार: बस्तर, सरगुजा सहित उत्तर और दक्षिण आदिवासी विकास प्राधिकरणों के तहत संचालित ग्रामीण अस्पतालों, हॉस्टलों और नर्सिंग होम को मिलने वाली 10 प्रतिशत की विशेष छूट आगे भी जारी रहेगी।

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