गंगा तव दर्शनात् मुक्ति
हजारों साल से मोक्षदायिनी गंगा नदी के प्रति प्रत्येक देशवासियों की अगाध श्रद्धा है। गंगा नदी में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि 'गंगा तव दर्शनात् मुक्ति' अर्थात गंगा मैय्या का दर्शन करने मात्र से पुण्य फल प्राप्त होता है।
By Nai Dunia News Network
Edited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Mon, 01 Jun 2020 09:52:58 PM (IST)
Updated Date: Mon, 01 Jun 2020 09:52:58 PM (IST)

रायपुर नईदुनिया प्रतिनिधि
हजारों साल से मोक्षदायिनी गंगा नदी के प्रति प्रत्येक देशवासियों की अगाध श्रद्धा है। गंगा नदी में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि 'गंगा तव दर्शनात् मुक्ति' अर्थात गंगा मैय्या का दर्शन करने मात्र से पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी मान्यता के चलते भारत के कोने-कोने से मृत्यु पश्चात परिजन अपने बुजुर्गों की अस्थियों को गंगा नदी में प्रवाहित करने ले जाते हैं। गंगा का अवतरण ज्येष्ठ शुक्ल दशमीं तिथि को हुआ था इसलिए देशभर में सोमवार को गंगा दशहरा श्रद्धाभाव से मनाया गया।
छत्तीसगढ़ में भले ही गंगा नदी न बहती हो लेकिन भक्तों ने अपने घर पर ही गंगा मैय्या का स्मरण किया और पूजा घर में रखे गए गंगाजल को पानी में मिलाकर स्नान करने की रस्म निभाई। इन दिनों कोरोना महामारी के चलते सभी मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर पाबंदी लगी हुई है। इस वजह से भक्तों को शिवजी की जटा पर सवार गंगा मैय्या का दर्शन करने का सौभाग्य नहीं मिल पाया।
शिव मंदिरों में की गंगा पूजा
कचना रोड स्थित सुरेश्वर महादेवपीठ के संस्थापक स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती एवं नहरपारा स्थित शिव मंदिर के पुजारी पं.नीलकंठ त्रिपाठी ने बताया कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी, सोमवार को गंगा दशहरा के मौके पर भगवान भोलेनाथ और गंगा मैय्या की पूजा-अर्चना की गई। कोरोना महामारी में मंदिरों में भक्तों को प्रवेश नहीं दिया गया। भक्तों ने अपने घर पर ही गंगाजल से स्नान करने का लाभ लिया।