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छत्तीसगढ़ में 2003 पीएससी भर्ती घोटाले में EOW का शिकंजा, 15 अधिकारियों पर चार्जशीट की तैयारी

छत्तीसगढ़ में 2003 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में EOW-ACB इस माह के अंत तक चार्जशीट पेश कर सकती है।

By Satish PandeyEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 09:08:48 AM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 09:08:48 AM (IST)
छत्तीसगढ़ में 2003 पीएससी भर्ती घोटाले में EOW का शिकंजा, 15 अधिकारियों पर चार्जशीट की तैयारी
CGPSC 2003 Scam: ईओडब्ल्यू इस माह पेश करेगी चालान

HighLights

  1. ईओडब्ल्यू इस माह पेश करेगी चार्जशीट
  2. 15 अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत
  3. ड्राई रन में 17 अपात्रों के चयन का खुलासा

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की साल 2003 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई होने जा रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW-ACB) इस मामले में आरोप पत्र पेश करने की तैयारी में है। अधिकारियों के मुताबिक चालान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे इसी महीने के अंत तक कोर्ट में पेश किया जा सकता है। हालांकि इससे पहले सरकार से अभियोजन की अनुमति लेना जरूरी है। इस भर्ती में अहम भूमिका निभाने वाले करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट पेश होने के संकेत हैं।

क्या है पूरा मामला

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि साल 2003 में हुई राज्य सेवा परीक्षा में कई अभ्यर्थियों का गलत तरीके से चयन किया गया था। यह परीक्षा तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुई थी। जांच के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस की बेंच ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को सही मानते हुए नई चयन सूची बनाने की सिफारिश की थी।


हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ मामला 2016 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां आदेश पर रोक लगा दी गई। इस बीच इस प्रकरण से जुड़े कई अधिकारियों को प्रमोशन मिल चुका है, कुछ को तो आईएएस अवार्ड भी मिल गया है।

ड्राई रन में खुली गड़बड़ी की परतें

ईओडब्ल्यू की शुरुआती जांच और दोबारा डेटा गणना के लिए किए गए ड्राई रन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में 17 अपात्र अभ्यर्थियों का चयन और 17 योग्य अभ्यर्थियों को बाहर करने का मामला मिला। वहीं 56 अभ्यर्थियों के पद और मेरिट क्रम में बदलाव पाया गया। 52 अपात्रों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जबकि इतने ही पात्र अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिला।

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वर्षा डोंगरे केस और स्केलिंग में खेल

कवर्धा की वर्षा डोंगरे ने 1290.41 अंक हासिल किए थे, फिर भी उनका चयन नहीं हुआ। उनकी प्रोफाइल शीट में आबकारी उप निरीक्षक पद के सामने काट-छांट मिली, फोरेंसिक जांच में उनकी लिखावट और स्याही नहीं मिली। मानव विज्ञान विषय में समान 200 वास्तविक अंक वालों को स्केल्ड में 170.01 और 239.22 अंक दिए गए। आरक्षण में भी गड़बड़ी का आरोप है, एक अनारक्षित युवक को एसटी कोटे में राज्य लेखा सेवा का पद दे दिया गया। राज्य बनने के बाद हुई पहली पीएससी परीक्षा में 147 पदों पर चयन हुआ था, जिसे लेकर वर्षा डोंगरे, चमन सिन्हा और रविंद्र सिंह ने कानूनी लड़ाई शुरू की थी।

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