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पीएम सूर्य घर से बिजली बिल जीरो, महतारी वंदन से सिलाई व्यवसाय, सरगुजा में सरकारी योजनाओं से बदली जिंदगी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से पांच परिवारों की जिंदगी बदली है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 11:43:11 AM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 11:43:11 AM (IST)
पीएम सूर्य घर से बिजली बिल जीरो, महतारी वंदन से सिलाई व्यवसाय, सरगुजा में सरकारी योजनाओं से बदली जिंदगी
छत्तीसगढ़ में सोलर से बिजली बिल में राहत, बेटियों की पढ़ाई और रोजगार को मिला सहारा (AI Generated Image)

HighLights

  1. पीएम सूर्य घर से बिजली बिल में बड़ी राहत
  2. छात्रवृत्ति बनी कृष्णा की उच्च शिक्षा का सहारा
  3. 25 लाख के लोन से हर्षिता बनीं उद्यमी

डिजिटल डेस्क, रायपुर। विकास की वास्तविक पहचान केवल सड़कों, भवनों और अधोसंरचनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव से होती है। जब किसी परिवार का बिजली खर्च कम होने लगे, आर्थिक कठिनाइयों के बीच विद्यार्थी उच्च शिक्षा जारी रख सके, कोई महिला स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर परिवार की जिम्मेदारियां संभाले और एक उद्यमी उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर विकसित करे, तब जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक प्रभाव दिखाई देता है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित परिवारों की कहानियां ऐसे ही बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संचालित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहलों से नागरिकों को शिक्षा, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।


प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनकी क्षमताओं को विकसित करने में भी सहायक बन रही हैं।

सरगुजा के पांच हितग्राहियों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का लाभ जब लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को नई दिशा मिलती है।

पीएम सूर्य घर योजना से बिजली बिल में राहत

बढ़ती घरेलू बिजली जरूरतों के बीच सौर ऊर्जा नागरिकों के लिए बिजली खर्च कम करने का उपयोगी विकल्प बन रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य न केवल बिजली बिल में कमी लाना है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना भी है।

अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी पंकज साहू ने इस योजना का लाभ लेकर अपने घर की छत पर तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। पंकज साहू बताते हैं कि पहले गर्मी के दिनों में उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच जाता था। बढ़ती गर्मी में कूलर, पंखे और अन्य उपकरणों के अधिक उपयोग से बिजली की खपत बढ़ जाती थी, जिससे हर महीने बजट पर असर पड़ता था।

घरेलू बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सोलर सिस्टम लगवाया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल एक लाख आठ हजार रुपये की आर्थिक सहायता से सोलर सिस्टम स्थापित करने का खर्च कम हुआ। सब्सिडी मिलने के बाद उनके लिए यह निवेश करना आसान हो गया।

सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। पंकज साहू के अनुसार, कई बार घरेलू आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजे जाने के कारण उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है। पहले जहां बिजली बिल परिवार के नियमित खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा था, वहीं अब घर की छत पर स्थापित सोलर सिस्टम बिजली खर्च में राहत देने के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का माध्यम बन गया है। उनका कहना है कि यह योजना मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बेहद लाभदायक है।

पंकज साहू का अनुभव दर्शाता है कि सौर ऊर्जा के उपयोग से परिवार अपनी बिजली जरूरतों का एक हिस्सा स्वयं पूरा कर सकते हैं। इससे घरेलू खर्च कम करने के साथ पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को भी प्रोत्साहन मिलता है। यह योजना न केवल आर्थिक बचत का जरिया है, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए भी एक स्थायी समाधान है।

छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा का सपना हुआ साकार

शिक्षा किसी भी परिवार की सामाजिक और आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन सीमित आय वाले परिवारों के लिए उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना आसान नहीं होता। किताबें, फीस, आवागमन और अन्य शैक्षणिक खर्च कई बार प्रतिभाशाली छात्रों के रास्ते में बाधा बन जाते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं पढ़ाई जारी रखने का महत्वपूर्ण सहारा बन रही हैं।

अम्बिकापुर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कृष्णा यादव की कहानी इसका उदाहरण है। कृष्णा के पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। खेती से प्राप्त सीमित आय में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों के साथ कॉलेज की पढ़ाई का खर्च उठाना चुनौतीपूर्ण होता है। किताबें, कॉपियां, अध्ययन सामग्री और कॉलेज आने-जाने पर होने वाला खर्च परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों को बढ़ा देता है। ऐसे में छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता कृष्णा की शिक्षा को निरंतर जारी रखने में उपयोगी साबित हो रही है।

कृष्णा छात्रवृत्ति की राशि का उपयोग पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और आवागमन के खर्च में करते हैं। इससे उनके परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल रही है। वे बताते हैं कि अगर छात्रवृत्ति नहीं मिलती तो उच्च शिक्षा जारी रखना मुश्किल हो जाता।

आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उच्च शिक्षा प्राप्त करने का उनका प्रयास दर्शाता है कि छात्रवृत्ति योजनाएं जरूरतमंद विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने और भविष्य के लिए बेहतर अवसर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। यह योजना ग्रामीण और किसान परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा की राह आसान कर रही है। कृष्णा जैसे कई छात्र हैं जो इस सहायता से अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं।

पीएमईजीपी से उद्यमिता को मिला बढ़ावा

आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वरोजगार और उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। नौकरी की तलाश करने के बजाय खुद का रोजगार शुरू करना और दूसरों को भी रोजगार देना आज के समय की जरूरत है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के माध्यम से इच्छुक उद्यमियों को स्वयं का उद्योग या व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

अम्बिकापुर की हर्षिता खत्री ने इस योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है। हर्षिता खत्री श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं। उनके पति दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। परिवार लंबे समय से स्वयं का व्यवसाय स्थापित करना चाहता था, लेकिन पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो पा रहा था।

जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद हर्षिता खत्री के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। ऋण स्वीकृत होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई की स्थापना संभव हो सकी। यह इकाई आज स्थानीय बाजार में अपनी पहचान बना रही है।

इस इकाई में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर तैयार किए जाते हैं। उद्योग स्थापना से हर्षिता खत्री के परिवार को स्वरोजगार का अवसर मिला है, वहीं इकाई से जुड़े कर्मचारियों की आजीविका को भी सहारा मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हो रहा है और बाजार में गुणवत्तापूर्ण फर्नीचर उपलब्ध हो रहा है।

हर्षिता की सफलता बताती है कि उद्यमिता के लिए आवश्यक वित्तीय सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध होने पर लोग अपने व्यावसायिक विचारों को वास्तविक उद्योग में बदल सकते हैं। ऐसे उद्यम स्थानीय स्तर पर उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ रोजगार के अवसर विकसित करने में भी योगदान देते हैं। महिला उद्यमी के रूप में हर्षिता अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

सक्षम योजना से इंदु लता ने शुरू किया डेयरी व्यवसाय

महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक तस्वीर इंदु लता गुप्ता के जीवन में दिखाई देती है। जीवन में अचानक आई कठिनाइयों के बाद भी हिम्मत न हारना और परिवार को संभालना उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश है। पति के निधन के बाद चार बेटियों के पालन-पोषण और उनकी शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। परिवार के पास नियमित आय का पर्याप्त साधन नहीं था। ऐसे में घर चलाने के साथ बेटियों की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया था।

कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और स्वरोजगार के माध्यम से परिवार को संभालने का निर्णय लिया। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना की जानकारी मिली। यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करती है।

योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त होने पर उन्होंने अपनी ओर से भी राशि मिलाकर दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की। अब दोनों भैंसों से प्राप्त दूध की बिक्री उनके परिवार की आजीविका का सहारा बन रही है। रोजाना दूध बेचकर जो आय होती है, उससे घर का खर्च और बेटियों की पढ़ाई का खर्च निकल रहा है।

इंदु लता के लिए डेयरी व्यवसाय का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि वे अपनी चारों बेटियों की शिक्षा जारी रख पा रही हैं। उनकी एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है, दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है और दो अन्य बेटियां स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। पति के निधन के बाद उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों के बीच बेटियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना उनके संघर्ष और आत्मविश्वास की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इंदु लता की कहानी बताती है कि आर्थिक सहायता मिलने पर महिलाएं कठिन पारिवारिक परिस्थितियों में भी स्वयं का रोजगार स्थापित कर सकती हैं। सक्षम योजना से मिले ऋण ने उन्हें डेयरी व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया, जिससे वे परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों के भविष्य को भी संवार रही हैं। यह योजना विधवा और जरूरतमंद महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।

महतारी वंदन योजना से हुनर को मिला सहारा

महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके घरेलू खर्चों के साथ छोटी स्वरोजगार गतिविधियों को भी संबल प्रदान कर सकती है। सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी सरिता तिग्गा इसका उदाहरण हैं। उनके पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं और परिवार में तीन बच्चे हैं। सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों का पालन-पोषण करना उनकी बड़ी जिम्मेदारी है।

सरिता तिग्गा घर पर सिलाई का काम करती हैं और अपने हुनर से परिवार की आय में योगदान देती हैं। सिलाई कार्य को नियमित रूप से जारी रखने के लिए उन्हें धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदनी पड़ती है। इसके लिए महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। यह राशि हर महीने उनके खाते में आती है।

सरिता इस राशि का उपयोग सिलाई कार्य से जुड़ी आवश्यक सामग्री खरीदने में करती हैं, जिससे उन्हें अपना काम जारी रखने में मदद मिलती है। मजदूरी से होने वाली पारिवारिक आय के साथ सिलाई कार्य से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहायक बन रही है। बच्चों की पढ़ाई और घर के छोटे-मोटे खर्चों में यह राशि बहुत काम आ रही है।

सरिता का अनुभव बताता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके छोटे व्यवसाय और कौशल आधारित स्वरोजगार को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे महिलाएं परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी बढ़ाने के साथ अपनी कार्यक्षमता का भी उपयोग कर पाती हैं। महतारी वंदन योजना लाखों महिलाओं के जीवन में इसी तरह का बदलाव ला रही है।

योजनाओं से बन रहा आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़

सरगुजा जिले के इन पांच हितग्राहियों की कहानियों में परिस्थितियां और जरूरतें अलग-अलग हैं, लेकिन सभी में एक समानता है शासकीय योजनाओं से मिले सहयोग का उपयोग कर अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास। पंकज साहू ने सौर ऊर्जा अपनाकर बिजली खर्च कम किया, कृष्णा यादव को छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद मिली, हर्षिता खत्री ने उद्योग स्थापित कर स्वरोजगार के साथ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया, इंदु लता गुप्ता ने डेयरी व्यवसाय से चार बेटियों की शिक्षा को संबल दिया और सरिता तिग्गा ने महतारी वंदन योजना की राशि का उपयोग अपने सिलाई कार्य को आगे बढ़ाने में किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद नागरिकों तक पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। इन योजनाओं के माध्यम से मिलने वाली सहायता परिवारों को आर्थिक चुनौतियों से निपटने, अपने कौशल का उपयोग करने और आय के नए साधन विकसित करने में सहयोग प्रदान कर रही है।

सरगुजा की ये सफलता की कहानियां दर्शाती हैं कि विकास का प्रभाव तब अधिक व्यापक होता है, जब योजनाएं लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ती हैं। सौर ऊर्जा से खर्च में बचत, छात्रवृत्ति से शिक्षा की निरंतरता, उद्योग स्थापना से रोजगार और महिला सशक्तिकरण से परिवारों की आर्थिक मजबूती ये सभी पहलें आत्मनिर्भरता और समृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।