
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया.रायपुर। शहरों और नगरों की सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब उनके मालिकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रदेश के सभी नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायतों में मवेशियों की पहचान के लिए 12 अंकों का डिजिटल ईयर टैग यानी ‘पशु आधार’ लगाया जाएगा। सड़क पर मवेशी छोड़ने वाले मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ जुर्माना और अन्य कार्रवाई की जाएगी।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी निकायों को इस संबंध में तत्काल काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार शहरों और नगरों की सीमा में पाले जाने और व्यावसायिक उपयोग में आने वाले गाय, बैल, भैंस समेत अन्य मवेशियों के कान में डिजिटल टैग लगाया जाएगा।
इस टैग की जानकारी केंद्र सरकार के इन्फार्मेशन नेटवर्क फार एनिमल प्रोडक्टिविटी एंड हेल्थ (आइएनएपीएच) पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इससे सड़क पर मिले मवेशी के मालिक का पता आसानी से लगाया जा सकेगा। जो लोग मवेशियों को दिन या रात में सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर खुला छोड़ते हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नगर सेना और स्थानीय पुलिस की मदद ली जाएगी। विभाग ने निकायों को ऐसे मामलों में जुर्माना लगाने और जरूरत के अनुसार अन्य कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
हर नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायत में एक जिम्मेदार अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो पशुओं की टैगिंग, धरपकड़ और गोशालाओं व पशु शेल्टरों के संचालन की निगरानी करेंगे। नगरीय सीमा में घूम रहे मवेशियों को पकड़कर निकायों के शेल्टर होम या पंजीकृत गोशालाओं में सुरक्षित पहुंचाया जाएगा। मवेशियों को ले जाते समय उसकी पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी और मालिक को इसकी पावती दी जाएगी।
नगरीय प्रशासन विभाग ने यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के निशा बनाम म्युनिसिपल काउंसिल संगरूर व अन्य मामले में 31 जुलाई 2026 को दिए गए आदेश के आधार पर जारी किए हैं। विभाग ने सभी निकायों से अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।