ऋण माफी समेत अन्य मांगों को लेकर किसानों का रायपुर मार्च, पुलिस ने मुरमुंदा में रोका, 17 दिनों से भूख हड़ताल जारी
छत्तीसगढ़ के धमधा ब्लॉक में ऋण माफी और विभिन्न मांगों को लेकर 17 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे किसान गुरुवार को राजधानी रायपुर की ओर मार्च करने निक...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 24 Sep 2026 05:48:09 PM (IST)Updated Date: Thu, 24 Sep 2026 05:59:39 PM (IST)
मुरमुंदा में जुटे किसान। -नईदुनियाHighLights
- राजधानी कूच करने निकले किसानों को रोका
- 17 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल जारी है
- ऋण माफी के लिए प्रतिनिधिमंडल चर्चा करने गया
नईदुनिया प्रतिनिधि, दुर्ग। छत्तीसगढ़ के धमधा क्षेत्र में किसानों का आंदोलन और अधिक तेज हो गया है। ऋण माफी और अन्य प्रमुख मांगों को लेकर किसान बंधु संगठन के बैनर तले पिछले 17 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल जारी है। अपनी मांगों का कोई ठोस समाधान न मिलने पर गुरुवार को गुस्साए किसान धमधा से राजधानी रायपुर की ओर कूच कर गए।
रायपुर की ओर कूच कर रहे किसानों को प्रशासन ने कुम्हारी पहुंचने से पहले ही मुरमुंदा में रोक लिया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी के कारण किसानों को आगे बढ़ने नहीं दिया गया। स्थिति को नियंत्रित करने और बातचीत का रास्ता निकालने के लिए प्रशासन ने दस किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों के साथ चर्चा करने के लिए राजधानी रायपुर भेजा। हालांकि, बाकी अन्य किसान मुरमुंदा में ही डटे रहे और अपनी मांगों पर अड़े रहे।
बातचीत के प्रस्ताव पर असहमति
इससे पहले बुधवार को आंदोलन स्थल पर पहुंचे एसडीएम और तहसीलदार ने किसानों से संवाद किया था। प्रशासन ने कुछ किसानों को बैंक भेजकर अधिकारियों से चर्चा करने की समझाइश दी थी, ताकि समाधान निकाला जा सके। लेकिन किसान नेताओं ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। किसान नेता बाबा टेक सिंह चंदेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे लंबे समय से बैंक और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट चुके हैं, जिससे कोई फायदा नहीं हुआ। अब सिर्फ बातचीत और झूठे आश्वासनों का दौर खत्म होना चाहिए।
क्या है पूरा मामला और मांगें?
धमधा ब्लॉक के खपरी, परसबोड़, कुटहा, पेंड्री और खैरझीटी गांवों के किसानों ने कोरोना काल से पहले निजी बैंक आईडीबीआई बैंक की विभिन्न शाखाओं से कृषि ऋण लिया था। किसान लगातार इस ऋण को माफ करने की मांग कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगों में वर्ष 2018 के एनपीए खातों की गहन जांच, पात्र किसानों को योजना का लाभ देना तथा जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की ऋण वसूली, कुर्की और भूमि नीलामी पर पूर्ण रोक लगाना शामिल है। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।