
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में तेजी से फैल चुके आक्रामक सूबबुल के पेड़ों को हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। संस्थान के 63 हेक्टेयर के परिसर में करीब 21 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले 20 हजार से अधिक सूबबुल के पेड़ों को हटाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग ने पेड़ों की कटाई के साथ जड़ उन्मूलन, कटे पेड़ों के परिवहन और स्थल की सफाई का काम कराने के लिए एजेंसी आमंत्रित की है।
वन विभाग की योजना केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं है। सूबबूल की जड़ें जमीन में दोबारा फैलकर पौधे तैयार न करें, इसके लिए जड़ उन्मूलन भी किया जाएगा। इसके बाद खाली हुए क्षेत्र को स्थानीय और देशी प्रजातियों के पौधों के विकास के लिए तैयार किया जाएगा। इससे परिसर में स्थानीय वनस्पतियों को बढ़ने के लिए बेहतर परिस्थितियां मिलने की उम्मीद है।
वन अधिकारियों के अनुसार संस्थान परिसर में सूबबुल के पेड़ पिछले करीब 10 से 15 वर्षों में तेजी से फैले हैं। शुरुआत में सीमित क्षेत्र में मौजूद यह प्रजाति अब करीब 21 हेक्टेयर क्षेत्र में फैल चुकी है। घने फैलाव के कारण परिसर में जमीन की सतह तक पर्याप्त धूप नहीं पहुंच पाती। इससे छोटे देशी पौधों, जड़ी-बूटियों और अन्य स्थानीय वनस्पतियों के प्राकृतिक विकास पर असर पड़ता है।
सूबबुल की जड़ें जमीन में गहराई तक जाती हैं और बड़ी मात्रा में पानी का उपयोग करती हैं। इसके घने फैलाव से स्थानीय पौधों के लिए उपलब्ध संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, इसकी पत्तियों के लगातार गिरने से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना और पोषक तत्वों के संतुलन में बदलाव की आशंका भी रहती है।
राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना वर्ष 2007 में हुई थी। संस्थान का पूरा परिसर करीब 63 हेक्टेयर में फैला है। यहां वन अनुसंधान, प्रशिक्षण और वन प्रबंधन से जुड़े विभिन्न कार्य किए जाते हैं। अब परिसर के एक बड़े हिस्से में फैले सूबबुल को हटाकर स्थानीय वनस्पतियों के पुनर्विकास के लिए जगह तैयार करने की योजना है।
कटाई के बाद खाली क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इससे परिसर में केवल हरियाली बढ़ाने के बजाय स्थानीय वनस्पतियों की विविधता को पुनर्स्थापित करने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
- कौशलेंद्र कुमार, संचालक, राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर