
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. रायपुर। राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े वाहन चालकों और छोटे ठेकेदारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पावर कंपनी की ओर से विद्युत संचार-संधारण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने और इसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए जाने के विरोध में 'पावर कंपनी वाहन मालिक कल्याण संघ' ने कड़ा रुख अपना लिया है। संघ ने प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि टेंडर को जल्द से जल्द निरस्त नहीं किया गया, तो राज्य भर में बिजली सेवाएं ठप हो सकती हैं।
संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत तीन नवंबर को एक दिन के लिए मेंटेनेंस और फ्यूज कॉल सेंटर का कार्य पूरी तरह बंद रखा जाएगा। विद्युत सुधार और वाहन जैसी आवश्यक सेवाएं अचानक बाधित होने से आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। संघ का कहना है कि इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर कंपनी प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संघ ने बड़े आंदोलन की तैयारी कर ली है। यदि प्रबंधन ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो दीपावली के दिन यानी सात नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। इस हड़ताल के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बिजली लाइनों के रखरखाव और आपातकालीन फ्यूज कॉल सेवाओं पर गहरा असर पड़ सकता है, जिससे त्योहार के दिनों में उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
संघ का मुख्य तर्क है कि इस तरह के बड़े ग्लोबल टेंडर निकाले जाने से स्थानीय वाहन चालकों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे स्थानीय ठेकेदारों के रोजगार पर सीधा असर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर वर्षों से सेवाएं दे रहे लोगों को दरकिनार कर निजी कंपनियों को प्राथमिकता देना अन्यायपूर्ण है। संघ ने जोर देकर कहा है कि उनका उद्देश्य किसी भी प्रकार से विभाग से टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि वे केवल अपने जायज स्थानीय हितों की रक्षा करना चाहते हैं।
संघ ने इस विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी कदम उठाए हैं। स्थानीय हितों की रक्षा की गुहार लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जा चुका है। इसके साथ ही, संघ के प्रतिनिधियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे समस्या के समाधान के लिए कंपनी प्रबंधन के साथ किसी भी समय बैठक और सार्थक चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिजली कंपनी प्रबंधन इस चेतावनी के बाद क्या कदम उठाता है।