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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 10, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Chhattisgarh के इस ख्यात अभिनेता को निगल गई शराब, शानदार था फिल्मी सफर

Chhattisgarh actor Mahendra Mewati रंगमंच का मंझा हुआ कलाकार फिल्मी दुनिया में भी अपने जबरदस्त अभिनय का लोहा मनवा चुका था।

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Publish Date: Thu, 10 Jan 2019 12:42:56 PM (IST)Updated Date: Thu, 10 Jan 2019 12:46:14 PM (IST)
Chhattisgarh के इस ख्यात अभिनेता को निगल गई शराब, शानदार था फिल्मी सफर

अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ की माटी से जन्मे एक मशहूर अभिनेता और एनएसडी के लोकप्रिय टीचर महेन्द्र मेवाती का गुरुवार की सुबह मुंबई में निधन हो गया। वे 48 वर्ष के थे। अम्बिकापुर में जन्मे महेन्द्र ने एनएसडी से अभिनय की शिक्षा ली और कई फिल्मों, टीवी सीरियल व रंगमंच में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। बताया जा रहा है कि महेंद्र की मौत शराब की वजह से हुई।

अंबिकापुर के पीजी कॉलेज के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डॉक्टर एमआर मेवाती के बेटे महेंद्र मेवाती ने थिएटर से फिल्मों तक का सफर तय किया था। उन्होंने कई मशहूर नाटक दिल्ली के थियेटरों में किए थे जिनमें औरंगजेब, अपराध और सजा, थैंक यू बाबा लोचन दास काफी चर्चित हुए। हर रोज दिल्ली के मंडी हाउस के थिएटर में महेंद्र मेवाती के नाम पर टिकटें बिकती थीं।


रंगमंच का मंझा हुआ कलाकार फिल्मी दुनिया में भी अपने जबरदस्त अभिनय का लोहा मनवा चुका था। सुपरहिट फिल्म भाग मिल्खा भाग, तेवर व हाल ही में रिलीज केदारनाथ में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं।

अंबिकापुर के बहुत सारे युवाओं को उन्होंने दिल्ली के थिएटर तक पहुंचाया और अब वे टीवी सीरियल के साथ फिल्मी दुनिया में भी नजर आ रहे हैं। उनके निधन से सरगुजा के रंगकर्मी स्तब्ध हैं।

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अंबिकापुर में उन्होंने स्थानीय रंगकर्मी युवाओं को जोड़कर कई नाटकों के मंचन किए थे। जिनमें होली, ताजमहल का टेंडर, बगिया बांछाराम की जैसे प्ले शामिल हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के रेप्रेटरी में वे अंशकालीन टीचर रहे और उन्होंने यहां काफी लोकप्रियता पाई थी। अपने अंतिम दौर में महेंद्र काफी टूट चुके थे और गुमनामी के अंधेरों में खो रहे थे।

शराब ने उनके शरीर को खोखला कर दिया था और अंदर का कलाकार इसकी एक-एक घूंट के साथ मरता जा रहा था। महेन्द्र को करीब से जानने वाले उनके मित्र कमलेश सिंह बताते हैं कि कॉमर्शियल फिल्मों की तरफ उनका रुझान न हो कर समानांतर सिनेमा या थियेटर उनकी पसंद थी।

उन्होंने अम्बिकापुर से स्कूली शिक्षा ली और फिर सागर विवि से स्नातक की पढ़ाई की। इस दौरान आशुतोष राणा उनके सीनियर थे। उन्हीं से प्रभावित होकर महेंद्र ने अभिनय का रास्ता चुना और 1992 में एनएसडी की परीक्षा पास कर अभिनय की पढ़ाई में दाखिला लिया।

कमलेश कहते हैं कि महेंद्र में अच्छे कलाकार की सभी खूबियां थीं, लेकिन उन्हें अनुशासन कतई पसंद नहीं था। आजादी उन्हें पसंद थी। महेंद्र, तथास्तु नामका एक थियेटर गु्रप स्ट्रीट आर्टिस्ट के साथ मिलकर चलाते थे और मंडी हाउस के चबूतरे पर स्ट्रिट लाइट के नीचे यह गु्रप अपने शाज की रिहर्सल करता था। उन्हें करीब से जानने वाले अभिनेता भगवान तिवारी ने बताया कि उन्हें दो तीन दिनों से सीने में परेशानी थी। संभवतः हार्ट अटैक की वजह से उनकी मौत हुई।