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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 17, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अगले तीन महीने में बदल जाएगा भाजपा का संगठनात्मक ढांचा, पार्टी नई टीम के साथ छत्‍तीसगढ़ निकाय चुनाव में झोंकेगी ताकत

भाजपा ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में जीत के बाद निकाय चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी संगठनात्मक बदलाव के तहत 14 से 20 नवंबर तक बूथ स्तर पर प...और पढ़ें

By Sandeep TiwariEdited By: Ashish Kumar Gupta
Publish Date: Sun, 17 Nov 2024 10:18:21 AM (IST)Updated Date: Sun, 17 Nov 2024 02:27:00 PM (IST)
अगले तीन महीने में बदल जाएगा भाजपा का संगठनात्मक ढांचा, पार्टी नई टीम के साथ छत्‍तीसगढ़ निकाय चुनाव में झोंकेगी ताकत
छत्‍तीसगढ़ भाजपा में संगठनात्मक बदलाव। फाइल फोटो

HighLights

  1. भाजपा ने विधानसभा-लोकसभा चुनावों में जीत के बाद निकाय चुनावों की तैयारी शुरू की।
  2. 22 नवंबर को दिल्ली में चुनाव प्रभारियों की बैठक, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा संभव।
  3. भाजपा संगठन चुनावों में विधायक-सांसदों को अपने समर्थकों को पद दिलाने से रोका जाएगा।

संदीप तिवारी, नईदुनिया, रायपुर। विधानसभा-लोकसभा चुनाव में मिली जीत के बाद अब भाजपा निकाय चुनाव में ताकत झोंकेगी। इसके पहले भाजपा में संगठनात्मक बदलाव के लिए संगठन चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। फिलहाल बूथ स्तर पर भाजपा के सक्रिय सदस्यों को पदाधिकारी चुना जा रहा है। भाजपा के संगठन पर्व के तहत 14 नवंबर से बूथ कमेटी के चुनाव शुरू हो चुके हैं, जो 20 नवंबर तक चलेंगे।

मंडल और जिलाध्यक्ष के चुनाव से पहले 22 नवंबर को सभी राज्यों के चुनाव प्रभारियों की दिल्ली में बैठक होने जा रही है, जिसमें अगले चरणों की तिथि तय की जाएगी। पार्टी नेताओं का यह भी आकलन है कि इस बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है।


चुनाव में भागीदारी के लिए भाजपा का सक्रिय सदस्य होना अनिवार्य हैं। सक्रिय सदस्यता अभियान के लिए एक लाख लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 50 हजार सदस्य बने हैं। बाकी सामान्य सदस्यों के 60 लाख लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 53 लाख सदस्य बने हैं। संगठन ने इस बार सक्रिय सदस्यता में हर वर्ग को जोड़ने का संदेश दिया है। ऐसे लोग जो कि समाज हित में काम कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जा रही है। संगठन के चुनाव के जरिए भाजपा अपना ताकत दिखाने के लिए रणनीति बना रही है।naidunia_image

समर्थक-रिश्तेदारों को बैठाने से परहेज

पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस पर भाजपा के संगठन चुनाव में विधायक-सांसदों पर कड़ी नजर है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बूथ, मंडल या जिलाध्यक्ष के चुनाव निष्पक्ष और सर्वसम्मति से होने चाहिए। विधायक या सांसद अपने समर्थक या रिश्तेदार को संगठन में बैठाने का प्रयास करें तो उसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। भाजपा पीढ़ी परिवर्तन की रणनीति पर काम कर रही है। इसका सीधा आशय यही है कि कोई भी जनप्रतिनिधि संगठन को जेब में रखने यानी अपनी मर्जी से चलाने की कोशिश करेगा तो ऐसे प्रयास को विफल कर देना है।

नड्डा की कार्यशाला में बनेगी रणनीति

जानकारी के मुताबिक दिल्ली में संगठन चुनाव को लेकर आयोजित कार्यशाला पार्टी के नेताओं ने एक ही संदेश दिया जाएगा कि पार्टी अपनी ताकत का एहसास करने के लिए तैयार रहे। जिला स्तर तक कार्यशालाएं कराकर भाजपा इस बार के संगठन चुनाव को और मजबूत बनाएगी।

राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार अगले 90 दिनों में भाजपा के जिला अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष में परिवर्तन को तय करने की रणनीति बनी है। इस कार्यशाला में भाजपा के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य राष्ट्रीय पदाधिकारियों और सभी प्रदेश अध्यक्षों सहित संगठन से जुड़े लगभग सवा सौ शीर्ष नेता शामिल होंगे।naidunia_image

सक्रिय सदस्यता अभियान की होगी समीक्षा: संजय श्रीवास्ताव

भाजपा के प्रदेश महामंत्री व सक्रिय सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक संजय श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश में 405 मंडल हैं और प्रत्येक मंडल में 200 सक्रिय सदस्यता बनाने का लक्ष्य है। एक लाख सक्रिय सदस्य बनाएंगे। अभी 50 हजार सक्रिय सदस्य बन चुके हैं। दिल्ली में हो रही बैठक में इसकी समीक्षा हो सकती है। बागी संगठन चुनाव की प्रक्रिया को लेकर भी रूपरेखा तैयार होगी। इसमें प्रदेश के नेता शामिल होंगे।

निकाय चुनाव पर भाजपा-कांग्रेस दोनों का फोकस

राज्य में नगरीय निकाय और त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने के लिए प्रदेश के राजनीतिक दलों ने अपने-अपने होमवर्क पर काम करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस-भाजपा दोनों ही राजनीतिक दलों का मुख्य फोकस युवा मतदाता हैं। इन्हें साधने के लिए भाजपा ने अपने भाजयुमो और कांग्रेस ने एनएसयूआई को आगे कर दिया है।

इन दोनों का प्रयास है कि आने वाले चुनाव से पहले युवा और नए मतदाताओं को अपनी-अपनी पार्टी की विचारधारा से जोड़ा जाए। इसके लिए भाजयुमो और एनएसयूआइ को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि कांग्रेस में कुछ स्तर पर पदाधिकारियों के बदलाव के संकेत हैं, इसकी सूची कांग्रेस के शीर्ष पदाधिकारियों को भेजी गई है। हम निकाय चुनाव में पूरा फोकस करेंगे।