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छत्तीसगढ़ की चरण पादुका योजना हाई कोर्ट में फंसी, 50 करोड़ के टेंडर पर विवाद

छत्तीसगढ़ की चरण पादुका योजना हाई कोर्ट में निविदा विवाद में फंस गई है। छह जुलाई को सुनवाई होगी, जबकि तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते वितरण फिलहाल अटक ग...और पढ़ें

By Sandeep TiwariEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Fri, 03 Jul 2026 11:17:39 AM (IST)Updated Date: Fri, 03 Jul 2026 11:17:39 AM (IST)
छत्तीसगढ़ की चरण पादुका योजना हाई कोर्ट में फंसी, 50 करोड़ के टेंडर पर विवाद
रण पादुका योजना हाई कोर्ट में फंसी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. चरण पादुका योजना विवादों में घिरी।
  2. छह जुलाई को होगी सुनवाई।
  3. हाई कोर्ट में संशोधन आवेदन।

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए शुरू की गई चरण पादुका योजना निविदा विवाद में फंस गई है। चरण पादुका की खरीदी से संबंधित निविदा को निरस्त करने के लिए दिए गए हाई कोर्ट के आदेश में संशोधन कराने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ ने मॉडिफिकेशन आवेदन दायर किया है।

इस मामले में छह जुलाई को सुनवाई होनी है। तेंदूपत्ता संग्राहकों को अप्रैल में ही चरण पादुकाओं का वितरण किया जाना था।

भूपेश सरकार ने बंद कर दी थी योजना

बता दें कि राज्य में चरण पादुका योजना की शुरुआत नवंबर 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में हुई थी। जंगलों में कंटीले रास्तों और जहरीले जीव-जंतुओं से तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुरक्षा के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना को कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने बंद कर दी थी। फिर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस योजना को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया।


यह है निविदा में विवाद का मामला

  • दरअसल, हाई कोर्ट ने चरण पादुका खरीदी के लिए जारी निविदा में अनियमितताएं पाई थीं। इसके साथ ही निविदा से जुड़ी अतिरिक्त शर्तों को भी निरस्त कर दिया था। कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ ने विवाद के समाधान के लिए तैयारी शुरू कर दी है।
  • बता दें कि सत्र 2026-27 के लिए चरण पादुका योजना के तहत तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते वितरित किए जाने थे। इसके लिए जारी निविदा में लगभग साढ़े 12 लाख जोड़ी जूतों की आपूर्ति का प्रविधान किया गया है। विवाद की शुरुआत टेंडर में शामिल सेफ्टी शू की शर्त को लेकर हुई।

  • आरोप है कि कैनवास जूतों के स्थान पर फैक्ट्री में उपयोग होने वाले सेफ्टी शू खरीदे जाने का प्रविधान किया गया, जबकि इसके लिए संचालक मंडल की अनुमति नहीं ली गई। इस निविदा की अनुमानित लागत करीब 50 करोड़ रुपये है।
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