
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ की तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि बढ़ाने के फैसले की जांच तेज कर दी है। खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में राइस मिलर्स को दी जाने वाली विशेष प्रोत्साहन राशि 40 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये प्रति क्विंटल करने के निर्णय को लेकर ईडी ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में सरकार ने करीब साढ़े तीन सौ पेज के दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं सार्वजनिक रूप से प्रोत्साहन राशि 40 से बढ़ाकर 120 रुपये किए जाने की जानकारी दी थी।
ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रोत्साहन राशि तीन गुना करने का प्रस्ताव किस स्तर पर तैयार हुआ, किन परिस्थितियों में इसे मंजूरी मिली और इस प्रक्रिया में किन अधिकारियों व संबंधित संगठनों की भूमिका रही। सरकार ने ईडी को राशि बढ़ाने की प्रक्रिया से जुड़े मूल दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई हैं।
सूत्रों के अनुसार खाद्य विभाग ने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर अंतिम अधिसूचना जारी होने तक की नोटशीट की प्रतियां ईडी को दी हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन सहित अन्य संगठनों की ओर से सरकार को दिए गए आवेदन और पत्र भी उपलब्ध कराए गए हैं। राशि बढ़ाने को लेकर हुई बैठकों, अधिकारियों के बीच हुई चर्चाओं और संबंधित प्रस्तावों से जुड़े रिकार्ड भी जांच एजेंसी को दिए गए हैं। यानी ईडी अब सिर्फ राशि बढ़ाने के फैसले को ही नहीं, बल्कि फैसले तक पहुंचने वाली पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया को खंगाल रही है।
मामले में आरोप है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में विशेष प्रोत्साहन राशि में 80 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने के बाद बढ़ी हुई राशि में से 20-20 रुपये की दो किस्तों में कुल 40 रुपये प्रति क्विंटल मिलर्स से कथित रूप से वसूले गए। जांच एजेंसियों के सामने आरोप यह भी है कि मार्कफेड के अधिकारियों और राइस मिलर्स एसोसिएशन से जुड़े लोगों के माध्यम से मिलर्स के बिलों के भुगतान को वसूली से जोड़ा गया। इस मामले में करीब 140 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच चल रही है।
कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले की जांच ईओडब्ल्यू-एसीबी भी कर रही है। प्रकरण में कांग्रेस के प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी और राइस मिलर रोशन चंद्राकर समेत अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया। बाद में अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया। जांच के दौरान कई राइस मिलर्स के बयान दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।
खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में राइस मिलों को प्रोत्साहन राशि देने के संबंध में तत्कालीन सरकार के फैसले में भुगतान की प्रक्रिया भी तय की गई थी। इसमें प्रोत्साहन राशि की 50 प्रतिशत राशि कस्टम मिलिंग शुल्क के साथ और शेष 50 प्रतिशत राशि केंद्रीय पूल में निर्धारित लक्ष्य की पूरी मात्रा जमा होने के बाद देने का प्रावधान था।