
रायपुर, राज्य ब्यूरो। लघु वनोपज संग्रहण के क्षेत्र में माडल स्टेट के रूप में उभरे छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार की तरफ से विभिन्न श्रेणियों में दस पुरस्कारों से नवाजा गया है। प्रदेश को छह श्रेणियों में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। राज्य में निर्मित महुआ सैनिटाइजर और इमली चस्का को नव उत्पाद और नवाचार श्रेणी में पुरस्कार मिला है। प्रदेश के 12 वन धन केंद्रों को 15 राज्य स्तरीय पुरस्कार भी मिले हैं। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को ये पुरस्कार प्रदान किए।
भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन संघ मर्यादित (ट्राइफेड) ने तीन श्रेणियों, न्यूनतम समर्थन मूल्य, वन धन, विक्रय और विपणन के अंतर्गत राज्यों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर राष्ट्रीय पुरस्कार दिया है। इनमें छत्तीसगढ़ छह श्रेणियों में पूरे देश में अव्वल रहा है। वीडियो कांफ्रेंस से आयोजित पुरस्कार समारोह में जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री मुंडा ने वनोपजों के प्रसंस्करण कार्य में लगे बस्तर के बकावंड और जगदलपुर के स्वसहायता समूहों के कार्यों की प्रशंसा की।
उन्होंने समूह की महिलाओं से चर्चा कर उनकी हौसला अफजाई भी की। मुंडा ने इन महिलाओं से प्रसंस्करण कार्य को और विस्तारित करने कहा, जिससे अधिक मात्रा में प्रसंस्कृत सामग्रियों का उत्पादन हो और ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिले। उन्होंने इस काम में आने वाली समस्याओं को जनजातीय कार्य मंत्रालय से साझा करने कहा। ट्राइफेड के प्रबंध संचालक प्रवीर कृष्ण ने मुंडा को बकावंड की महिलाओं द्वारा प्रसंस्कृत काजू भेंट किया। उन्होंने बताया कि देशभर में स्थित ट्राइफेड के 140 केंद्रों में बस्तर कैश्यु ब्रांड से वहां के काजू की बिक्री हो रही है।
सर्वाधिक वनोपज खरीदी का कीर्तिमान: बघेल
छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में सर्वाधिक वनोपज क्रय कर राज्य ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सरकार के इन प्रयासों से वनवासियों की आर्थिक स्थिति सुधरी है। इससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल रहा है। बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार बीते दो सालों में वनवासियों व लघु वनोपज संग्राहकों के जीवन में बदलाव लाने के लिए क्रांतिकारी फैसले लिए गए हैं। इससे औने-पौने दाम में बिकने वाले लघु वनोपजों को अब मूल्यवान बना दिया है। इसका सीधा लाभ यहां के वनोपज संग्राहकों को मिलने लगा है। यही कारण है कि प्रदेश अब लघु वनोपजों के संग्रहण के मामले में देश का अव्वल राज्य बन गया है।
इन श्रेणियों में मिला पुरस्कार
वन धन पुरस्कार 2020-21 के तहत राज्य को लघु वनोपजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत सर्वाधिक नए वनोपजों (52) को शामिल करने, केंद्र की राशि से सर्वाधिक मूल्य (180.51 करोड़ रुपये) का लघु वनोपज खरीदने, केंद्र व राज्य शासन की राशि से सर्वाधिक मूल्य (1173 करोड़ रुपये) के लघु वनोपज की खरीदी और वर्ष 2020-21 तक उपलब्ध कराई गई राशि (127.09 करोड़ रुपये) की अधिकतम उपयोगिता के लिए प्रथम पुरस्कार मिला है।
वन धन योजना के तहत मूल्य संवर्धन के लिए अधिकतम उत्पादों (121) के निर्माण और मूल्य संवर्धन कर उत्पादों की अधिकतम बिक्री (4.24 करोड़ रुपये) के लिए भी प्रदेश को पहला पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसी श्रेणी में सर्वाधिक सर्वेक्षण पूर्ण करने और वन धन विकास केंद्र क्लस्टरों के लिए सर्वाधिक प्रशिक्षण के लिए प्रदेश को तीसरा पुरस्कार मिला है। नव उत्पाद और नवाचार की श्रेणी में राज्य में निर्मित महुआ सैनिटाइजर और इमली चस्का को पुरस्कत किया गया है।