रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के दो जिलों के 40 गांवों का राजस्व सर्वे करा रही है। इसमें 21 गांव बस्तर व 19 गांव कांकेर जिले में हैं। अफसरों के अनुसार इन गांवों की बंदोबस्त में 10 फीसद से अधिक की त्रुटि पाए जाने के बाद नए सिरे से सर्वे का आदेश जारी किया गया है।
राजस्व विभाग के अफसरों के अनुसार सर्वे सूची में बस्तर जिले की बकावंड तहसील के दो गांव कोसमी और तुंगापाल भी शामिल हैं। इन गांवों की बंदोबस्त में त्रुटि नहीं है, लेकिन सीमा परिवर्तन की वजह से इन गांवों का भी नए सिरे से राजस्व सर्वे कराया जा रहा है।
अबुझमाड़ का अब तक नहीं हो सका सर्वे
बस्तर संभाग में स्थित अबुझमाड़ का आज तक राजस्व सर्वे नहीं हो पाया है। हालांकि मुगल शासनकाल से लेकर अब तक कई बार इसकी कोशिश हुई, लेकिन कोई सफल नहीं हो पाया। घने वन क्षेत्र वाले इस इलाके में नक्सलियों की पकड़ मजबूत है। इसी वजह से सरकारी तंत्र वहां तक पहुंच नहीं पाता है।
अक्टूबर 2016 में सरकार ने आइआइटी रुड़की की मदद से भौगोलिक सूचना प्रणाली और दूरसंवेदी उपग्रह के जरिये वहां का सर्वे कराया। इसमें 237 गांवों का पता चला, हालांकि भौतिक सत्यापन के लिए सर्वे टीम का गांव तक पहुंचना जरूरी था, जो आज भी नहीं हो पाया है।
फिलहाल इन गांवों का रहा सर्वे
बस्तर जिला में जगदलपुर तहसील में कुरंदी व आड़ावाल गांव। बस्तर तहसील के गुनपुर, अलवाही, पूर्वी टेमरा, पश्चिमी टेमरा, रतेंगा, झारतराई, बागमोहलई, भुरसुंडी व भाटपालगांव। इसी तरह बकावंड तहसील के करपावंड, संधकरमरी, टुहटीदेवड़ा, मटनार, बोरपदर, पंडानार, कोसमी और तुंगापाल। तोकापाल तहसील के सिंघनपुर और बड़े मारेंगा गांव शामिल हैं।
कांकेर जिला में कांकेर तहसील के पुसावंड व कोकानपुर। चारामा तहसील के कोटतरा, अरौद, कुर्स्र्भाट, नरहरपुर तहसील के कंहनपुरी, धनेसरा, भिरौद, पेंड्रावन, सरोना, साल्हेभाट, मुडपार दखनी, सिंगनपुर, लेंडारा, कुम्हानखान, ठेमा और डब्बीपानी शामिल हैं। इसके अलावा भानुप्रातापुर तहसील का साल्हे गांव को भी सर्वे सूची में रखा गया है।